मेरी क्या गलती है – अनुपमा : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी , लगता है तूफान आएगा , एक तूफान तो हर वक्त सुमी के भीतर भी चलता रहता है और उसका न कोई वक्त है ना मौसम , बारिश लगातार तेज हुई जा रही है और सुमी की नज़रे बाहर ही लगी है , … Read more

प्यार को प्यार ही रहने दो–कोई नाम ना दो – कुमुद मोहन

सुधा के पति मनीष के गुजर जाने के बाद उनका बेटा समर और बहू लीना अपने साथ लंदन ले आए। उसे बहुत याद आता अपना खुला-खुला घर,छोटा सा बगीचा पुरानी काम वाली संतो उसके बच्चे जो दादी-दादी कहते हर वक्त टाॅफी-चाकलेट और बिस्कुट के लालच में उसके आसपास मंडराते रहते थे,उसका छोटा मोटा काम खुशी-खुशी … Read more

मुझे फ़र्क पड़ता है – बेला पुनीवाला

  मेरा नाम ख़ुशी, अपने घर में सब के होठों की मुस्कान, सब के दिलो की जान। मम्मी और पापा ने मेरा नाम बड़े प्यार से रखा था, ” ख़ुशी “। जिसके जीवन में हर पल खुशियांँ ही महकती  रहे और वह सब के जीवन को ख़ुशियों से भर दे। घर में, मैं  सब की प्यारी … Read more

अपने और पराये का एहसास – पूजा अरोरा

संडे का दिन था सब सुबह देर तक सोए हुए थे।  तभी अचानक से दरवाजे की बेल बजी।  ममता जी  ने  दरवाज़ा खोला तो देखा दरवाजे पर उसकी  बेटी  मोहिनी खड़ी थी|  हाथ में सूटकेस और दोनों बच्चों के साथ,   इतने में मोहिनी के पापा विनोद जी   की आवाज़ आयी, “ममता जी  कौन आया … Read more

दीदू माँ और तीज – तृप्ति शर्मा

छोटा सा परिवार था पलक का। मां पापा और एक बडी़ बहन। इत्तू सा परिवार पर प्यार ढेर सारा, बडी़ बहन काजल पलक से छह साल बडी थी , बहुत रोब दिखाती थी बड़ा होने का । पर पलक भी शैतानियों से भरी, अल्हड़ सी उसके हिस्से का थोड़ा भी प्यार बड़की दीदू को न … Read more

डॉक्टर रिक्शा – कहानी-देवेंद्र कुमार

विजनपुर एक छोटा-सा कस्बा था। संकरी और टूटी-फूटीसड़कें, जगह-जगह गंदगी और कूड़े के ढेर। एक छोटा-सा बस-स्टैंड, जहां गढ्डों में पानी भरा रहता था। उनमें मक्खी-मच्छर भनभनाते रहते थे, फिर भी लोग दूर-दूर के गावों से बिजनपुर पहुंचा करते थे। बिजनपुर मशहूर था डॉक्टर राय के लिए। डॉक्टर राय को लोग देवता मानते थे। उनके … Read more

सावन की फुहार: – मुकेश कुमार (अनजान लेखक)

बारिश तो वैसे भी हो ही जाती है, सावन से पहले भी और बाद में भी। लेकिन सावन की बरशात की बात ही कुछ अलग होती है। पता भी नही चलता और बारिश शुरु, कभी-कभी तो दिन भर बारिश होती है। कुछ देर मुसलाधार बारिश के बाद हल्की सी फुहार शुरु हो जाती है जो … Read more

आरती की थाली – दर्शना जैन

रक्षाबंधन आने के लगभग पंद्रह दिन पहले से सरिता की तैयारियाँ शुरू हो जाती थी। घर के काम से फुर्सत मिलते ही वह खरीददारी करने बाजार के लिये निकल पड़ती।     हर बार रक्षाबंधन पर चेहरे पर खुशी होती लेकिन इस बार चेहरा उदास था व आँखें रोये जा रही थी। कोरोना ने उसके भाई भाभी … Read more

बरसात – निभा राजीव “निर्वी”

रात के 9: 30 बज रहे थे।झमाझम बारिश हो रही थी। सुरेंद्र को साइकिल चलाने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी, फिर भी वह पैडल मारे जा रहा था और उसके पीछे उसकी पत्नी राधा बैठी थी। सुरेंद्र को मस्ती सूझी और वह गाना गाने लगा “- आज रपट जाएं तो हमें ना उठइयो…..” वह … Read more

‘गुडिया मुझे माफ़ कर देना !” –   शिखा कौशिक

सुधा और दीपक दो दिन की यात्रा के पश्चात्  घर पहुंचें.शाम के पांच  बजने आये थे .फरवरी का  माह था अत: हवाओं में शीतलता बची  हुई थी .दीपक ने घर के किवाड़  खुलवाने को अपने बेटे को आवाज लगाई -”बिट्टू ……बिट्टू ….” तीन-चार  आवाज पर भी जब किवाड़ नहीं खुले तो सुधा ने भी आवाज … Read more

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