अपशकुन – मिन्नी मिश्रा

 मेरा मन उदास था। घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। पतिदेव को आफिस विदा करते ही एक विचार आया , क्यों नहीं सहेलियों से मिलकर मन को हल्का किया जाय ।झट वार्डरोब खोलकर ड्रेस निहारने लगी | लाल कोर वाली हरी सिल्क साड़ी दिखी। अरे वाह ! यह साड़ी दादाजी ने शादी की पहली साल-गिरह … Read more

अतृप्त – सरिता गर्ग ‘सरि’

नारी -मन की संवेदना की अछूती कहानी           उस रात  उसकी सुगन्धित देह को घर्षण और चोट से रौंदता वो आनंद पाता रहा और वो ठंडी और निष्प्राण चादर -सी ,वक्त की सिलवटों से मुड़ी -तुड़ी बिस्तर पर बिछी रही । इसी तरह वो हर रात रौंदी जाती रही,उस पर बलात्कार होता रहा,फिर भी वो मुस्कुराती … Read more

बर्बाद हुआ घोंसला – नेहा मिश्रा ‘नेहू’

आज लता की शादी के 2 महीने पूरे हो गए। गरीबी के कारण उसके माता-पिता ने उसकी शादी एक ऐसे इंसान से की जिसकी पहली औरत स्वर्गवासी हो गई थी। पर उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता वह तो अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत खुश है। हालांकि उसके पति की पहली बीवी से … Read more

और कोहरा छँट गया – नीरजा कृष्णा

मीता घर के पास के एक छोटे से नर्सिंग होम में भर्ती थी…..कल रात को ही उसने एक प्यारी सी गु़ड़िया को जन्म दिया था..बहुत कोशिश के बाद भी सामान्य प्रसव    सम्भव नहीं हो पाया था…आँख खुली तो दाई की बेटी को बैठा पाया….मीता ने उससे नन्हीं गुड़िया एवं घर के अन्य लोगों के … Read more

पुनर्प्रतिष्ठा – दीप्ति मित्तल

बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आ शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गई. सुहावना मौसम, हल्के बादल और पक्षियों का मधुर गान कुछ भी उसके मन को वह सुकून नहीं दे पा रहे थे, जो वो अपने पिछले शहर के घर में छोड़ आई थी. शालू की इधर-उधर दौड़ती सरसरी नज़रें … Read more

“ईर्ष्या बनी औजार” –   सीमा वर्मा

अंधेरी रात। साढ़े आठ के करीब बिहार प्रांत के किसी शहर के पास किसी कस्बे में जहाँ शाम में ही रात का सन्नाटा पसर जाता है। आवाज आ रही है एक सफेद रंग से पुते चार कमरों वाले घर से। घर की दो बहुएँ हैं हीरा और नीरा जो आपस में सगी बहनें भी हैं। … Read more

 बारिश ने बना दी बात – ऋतु अग्रवाल

   आयुषी कल से बहुत परेशान है। जबसे मम्मी ने बताया है कि कल लड़के वाले उसे देखने आ रहे हैं तब से वह मन ही मन ना जाने क्या-क्या तिकड़में लगा रही है पर मम्मी भी उससे एक कदम आगे हैं। मतलब वह डाल डाल तो मम्मी पात पात।     अब आप सोचेंगे कि आयुष इतनी … Read more

बरसात की रोटी – डॉ.अनुपमा श्रीवास्तवा

पिछले साल से ज्यादा इस साल बारिश अपना विकृत रूप दिखा रही है। रात-दिन बिना रुके बारिश हो रही है। जिंदगी बिलकुल ही अस्त व्यस्त होकर रह गई है। चारो तरफ पानी ही पानी ।   अमीरों के लिए यह मौसम सुखद और खुशनुमा होगा। लोग घर में बैठकर पकौड़े के साथ बारिश का आनंद लेते … Read more

आखिरी पन्ना – पुष्पा पाण्डेय : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : पारुल बचपन से ही शिक्षण के क्षेत्र  में जाना चाहती थी। वह हमेशा शिक्षक बनने की इच्छा व्यक्त करती थी। स्नात्तर की परीक्षा के बाद उसका दोस्त प्रतीक उसे प्रशासनिक  प्रतियोगिता की तैयारी करने की सलाह दे रहा था, लेकिन पारुल अपना सपना पूरा करना चाहती थी। प्रतीक प्रशासनिक प्रतियोगिता … Read more

मेरी क्या गलती है – अनुपमा : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी , लगता है तूफान आएगा , एक तूफान तो हर वक्त सुमी के भीतर भी चलता रहता है और उसका न कोई वक्त है ना मौसम , बारिश लगातार तेज हुई जा रही है और सुमी की नज़रे बाहर ही लगी है , … Read more

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