पतन  से रोकने वाली पत्नी –  सुधा जैन

” जहां चाय वही मित्र”, वसुंधरा  सुनंदा और आराधना  तीनों सहेलियों का यही नारा था। आज तीनों सहेलियां चाय की चुस्कियां का आनंद लेने के लिए आराधना के यहां इकट्ठे हुई ।आराधना के पति निलेश बाहर गए हुए थे, तो आराधना ने सोचा कि” चलो अपनी सहेलियों को बुलाकर बातें करते हैं”।, चाय की चुस्कियां … Read more

गुड़ की डली – कमलेश राणा

सहकारी कृषि पर दुनिया भर के लेख लिखे जा रहे हैं,,कोर्स में भी पढ़ाया जाता है पर असल के धरातल पर अभी यह कोसों दूर है,, पर आज से 45 साल पहले मैने अपने गाँव में इसका सुन्दर रूप देखा ही नहीं बल्कि मैं खुद इसका हिस्सा भी बनी और इसके आनंद को भरपूर जिया … Read more

मकान का किराया – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

मूसलाधार बारिश हो रही थी, एक बूढ़ा आदमी अपने कमरे का दरवाजा खोलकर फर्श पर बैठा बरसात को देख रहा था।निशा(छोटी बहू)…पिताजी (ससुर) के लिए पकौड़े बना रही थी तभी निशा के मोबाइल की घंटी बजती है निशा फोन रिसीव करती है,वह कुछ बोलती उससे पहले ही जेठ जी की कड़कती आवाज उसके कर्ण को … Read more

 बेड टी – नेहा शर्मा ‘नेह’

गैस पर चाय का पानी खौल रहा था और सुमित्रा अपने ही ख्यालों में खोई हुई थी। रोज़ सुबह उसकी दिनचर्या ऐसे ही शुरू होती। सुमित्रा रसोई में आती, चूल्हे पर पानी चढ़ाती और अपने ख्यालों में तब तक खोई रहती जब तक अंदर से उसके पति सुभाष की गुस्से में चिल्लाने की आवाज़ न … Read more

आत्मघात  – नेहा शर्मा ‘नेह’

अभी श्रावणी ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा ही था कि किस्मत ने उसे बहुत बड़ा धक्का दिया। उस दिन उसका सोलहवां जन्मदिन था जिस उम्र में हर लड़की की उमंगें जवान होना शुरू जाती हैं, सपने पंख लगाकर उड़ने को बेताब होते हैं, चंचल और शोख मन उन सपनों के परों पर अपनी … Read more

बस बहुत हो गया – डा. मधु आंधीवाल

आज सुनीता बहुत खुश थी क्योंकि कल उसके इकलौते बेटे संचित की शादी थी । वह तो भाग भाग कर सबको बता रही थी कि सबको बहू प्राची का स्वागत किस तरह करना है। उसके पति मोहन लाल उसकी प्रसन्नता को महसूस कर रहे थे । वह रात को सब इन्तजाम और मेहमानो के आराम … Read more

ख़ाली जगह – बेला पुनीवाला

 जब भी आधी रात को बिस्तर पे में करवट बदलता हूँ, तब मेरी नज़र सावित्री की जग़ह पे जाके रुक सी जाती है, क्यूंँकि आज वो जगह खाली है।       सुबह जिसके साथ में मंदिर जाया करता था, घर आकर चाय – नास्ता करता था, कल जो रातो को मेरा सिर दबाया करती थी, रात को … Read more

टाइमपास – कंचन शुक्ला

आभा!!  हाँ, यही नाम था उसका। जिसकी तारीफ़ में, मैं कलमें पढ़ा करता था। बारिश के मौसम की तरह शीतल, शांत तो बिल्कुल भी नही। उसी मौसम की तेज़ हवाओं सी चंचल, मदमस्त और अनन्य ऊर्जा से परिपूर्ण। मन के भावों को कभी समेटती कभी बिखेरती। पढ़ीलिखी, समझदार परंतु फिर भी सरल। सौम्यता की खान, … Read more

प्यारे अमित – गरिमा जैन 

  बहुत दिन हुए तुमसे कोई बातचीत नहीं हुई ।पहले तुम्हें जब मन फोन कर लिया करती थी पर अब वो अपनापन नहीं लगता कि जब चाहू तुमसे बात कर लूं इसलिए तुम्हें आज एक पत्र लिखने बैठ गयी। ऐसे तो यह बीते जमाने की बात हो गई पर कहते हैं ना कभी  कभी पुरानी बातें … Read more

विम्मो बूआ … सीमा वर्मा

विम्मो तो हम उन्हें प्यार से बुलाते हैं  उनका पूरा नाम था विमला । जब कभी मैं जाड़े के दिनों मे हौस्टल से घर वापस आती वे अम्मा के कहे अनुसार अंगीठी सुलगा कमरे में रख जाती सारा कमरा धुएं से भर जाता मेरी आंखें कड़वा जाती और मैं चिल्लाती ,  ” जल्दी बाहर कर … Read more

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