किसका है ये तुमको इंतजार मैं हूं  ना…………. सुधा जैन

 मेरी प्रिय परिचिता  बहन का आकस्मिक निधन हो गया। निधन के बाद उनके पुत्र, पुत्री पति, रिश्तेदार सभी बहुत दुखी हो गए ।रोने भी लगे। पुत्र कहने लगे “हम तो अपनी मम्मी से कभी जी भर बात ही नहीं कर पाए” मम्मी की किसी बात पर हमेशा गुस्सा ही आ जाता था, जब वह हिदायतें … Read more

मां का भी दिल होता है – सुधा जैन

45 वर्ष की कादंबरी एक ऑफिस में काम करती है। सुबह से लेकर शाम तक का उनका अपना रूटीन है ,और वह काम में लगी रहती है। घर पर उनकी प्यारी सी बिटिया है, जिसका नाम नव्या है, वह कॉलेज में पढ़ रही है। मोबाइल, दोस्त फैशन, इन सब में उसके पास बिल्कुल भी समय … Read more

पहचान – भगवती सक्सेना गौड़

राधा को कुछ जरूरी काम से दिल्ली जाना पड़ा। ट्रेन में बहुत भीड़ थी रिजर्वेशन का कोई मतलब नही समझ आ रहा था,लखनऊ से चढ़ने वाले धक्का मुक्की भी कर रहे थे। अचानक लगा पीछे से किसी ने सूटकेस राधा के पैर पर  रख दिया। वो जोर से चिल्ला पड़ी,”अंधे हो क्या, बच गयी, वर्ना … Read more

रब है दोस्ती – *नम्रता सरन”सोना”*

“अब कहां गए, आपके वह तथाकथित दोस्त, जिनके लिए आप एक पैर पर तैयार बैठे रहते हैं, कोई एक नज़र नहीं आता, पूछा किसी ने आपसे,कि इतने समय से फैक्ट्री बंद पड़ी है,तुम्हारा घर कैसे चलता है, किसी ने टोह तक नहीं ली, बाकी सब तो ठीक है, निमेष की फीस का क्या करें, अब … Read more

डरती हूं तुम्हें खो ना दूं –  कुमुद मोहन

 रमेश जी को रात में सीने में दर्द हुआ,पसीना आया और दिल घबराया!सीमा अकेली समझ नहीं पा रही थी इतनी रात किसे जगाऊं,कहां जाऊं,किसे बुलाऊं? बदहवासी में पड़ोसी मित्रा जी का ही ध्यान आया!कांपते हाथों से फोन लगाया सीमा की घबराई आवाज सुन कर  मित्रा दंपत्ति फौरन चले आए उन्होंने देखा तो बताया “हार्ट अटैक … Read more

मीठे का शगुन – अर्चना नाकरा

सावन का महीना चल रहा था और पिछले सावन को याद करके इस बार मन दुखी नहीं था ‘ पहला सावन शादी के बाद का’ फिर’ जेब में थोड़ी सी खनक रखता सावन’ सच में त्यौहार खुशियां लेकर आते हैं त्योहार जितनी खुशियां लेकर आते हैं कभी-कभी परेशानी आते ही अवसाद भी दे जाते हैं … Read more

लोग क्या कहेंगे – -विनोद प्रसाद ‘विप्र’

एक ही विभाग में काम करने वाले मोहन बाबू और सुधीर जी में गहरी मित्रता थी। जब मोहन बाबू के यहां बेटी ने जन्म लिया तब सुधीर जी ने बधाई देते हुए कहा था- “बधाई हो, आपके घर में लक्ष्मी आई है।” और बातों ही बातों में सुधीर जी ने कह दिया- “मोहन बाबू, बेटी … Read more

मुट्ठी भर धूप – सरिता गर्ग ‘सरि’

 बरसों बीत गए मेरे आँगन में धूप का कोई टुकड़ा नहीं उतरा। टूटी मेहराबों की किसी ने मरम्मत भी नहीं की। कंगूरे झड़ते रहे। कबूतरों की बीट से भरे  दालान गंधाते रहे और मेरी रूह उन गलियारों में अपना वजूद ढूँढती सदियों से किसी मुंडेर पर बैठी मुट्ठी भर धूप खोजती रही।          कोहरे से भरी … Read more

हासिल आयी शून्य – श्रद्धा निगम

————————–  आज फिर मालती ने अपनी आदत से मजबूर होकर फोन पर हंसते हुए सामने वाले से कहा -अरे आओ,मज़ा आ जाएगा।सब मिल कर धमाल करेगे और ऐसा करना साथ मे शिखा  और मणि को भी ले आना।बहुत दिनों से कोई पार्टी नही हुई।हंसते हुए मालती ने फोन रखा ही था कि राहुल ने टोकते … Read more

एक प्रेम कहानी ऐसी भी – डॉ. नीतू भूषण तातेड

बहुत समय बाद मिश्री अपने गाँव आई। अपने गाँव की गलियों को पार करते हुए जब वह गुज़र रही थी तो उसकी आँखों में बचपन का अल्हड़पन औऱ किशोरावस्था की मस्ती नाचने लगी। वह अपने गाँव आना लगभग बंद कर चुकी थी क्योंकि उसके भाइयों ने उसकी शादी जबरदस्ती किसी ऐसे दूसरे आदमी से करा … Read more

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