डिग्रियां तो बहुत मिलीं, मगर संस्कार सिलेबस से बाहर थे – रश्मि प्रकाश
*जिस मां ने अपने गहने बेचकर बेटे को ‘जज’ बनाया, आज वही बेटा अपनी मां को ‘कटघरे’ में खड़ा करके पूछ रहा था—”तुम मेरे स्टेटस में कहां फिट होती हो?”* “मुझे बस एक बात बता दे बेटा,” जानकी की आवाज़ भर्रा गई, “तेरी उन मोटी-मोटी किताबों में, तेरे उस संविधान में, या तेरे उस बड़े … Read more