फरेब – रीमा साहू
सुमित्रा देवी की आँखों से पश्चाताप के आँसू बह निकले। उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। जिस बेटे को उन्होंने ‘नकारा’ और ‘पत्थर’ समझा था, असल में वही उनकी नींव का पत्थर था। और जिस दामाद को उन्होंने ‘हीरा’ समझा था, वह केवल कांच का टुकड़ा निकला जो वक्त आने पर चुभ गया। कहानी का … Read more