संस्कारी दिव्यांग – विनोद प्रसाद 

अस्पताल के बेंच पर अकेला बैठा अरूण बार-बार ऑपरेशन थियेटर के बंद दरवाजे के खुलने की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा था। भीतर उसकी पत्नी को प्रसव हेतु ले जाया गया था। बैठे-बैठे वह अतीत की गहराइयों में डूबता गया। दुनिया वाले भले ही उसे दिव्यांग मानते थे, लेकिन अरूण ने शारीरिक अपंगता को कभी … Read more

मिष्ठी’ – प्रियंका सक्सेना

दादी आज फिर परेशान हो गई।‌ मिष्ठी उनकी हालत देखकर दुखी हो गई। आइए मिष्ठी और उसके परिवार से आपका परिचय कराती हूॅ॑। मिष्ठी ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक मेधावी छात्रा है। विज्ञान उसका पसंदीदा विषय है। घर में मिष्ठी, दादी, मम्मी आशा और पापा अजीत ही रहते हैं। दादी में मिष्ठी की जान … Read more

परोपकार वर्सेज संस्कार – भगवती सक्सेना गौड़

सुजाता अस्पताल के बेड पर थी, अचानक उसने कहा, “अरे मैं यहां कैसे आयी?” तभी उसे आभास हुआ, सुकन्या बेटी उसका सिर सहला रही है, “हां, मम्मा, आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी पापा ने फ़ोन किया, तो रात को मैं आकर आपको यहां लेकर आयी। अब कैसा लग रहा है।” “ठीक है, … Read more

संस्कार – बेला पुनिवाला 

  सूशीला कि  बेटी आशा की शादी के कुछ महीनो बाद सुशीला  को अपनी बेटी आशा की बहुत याद आ रही थी, तब सुशीला ने सोचा, कि चलो, आज आशा को फ़ोन करके उसका हालचाल पूछ ही लेती हूँ और उसे कुछ दिन यहाँ आने को कहती हूँ। इसी बहाने उस से बात भी हो जाएगी। … Read more

सिर्फ अपने लिए नहीं….. – लतिका श्रीवास्तव 

डॉक्टर की बातें रामदयाल जी के दिमाग में भूचाल पैदा कर रही थीं कि एन मौके पर अगर आप यहां नहीं आते तो हार्ट अटैक हार्ट फेल में बदल गया होता!!….रमा ने संक्षिप्त में बताया था कि आज अदिति और अमीश के कारण ही फ्लाइट बुक हो पाई और आपको यहां लाना संभव हो पाया……..!! … Read more

नई विचारधारा का आगाज़” – भावना ठाकर ‘भावु’

घर में चहल पहल और माँ के चेहरे पर रौनक देखकर गायत्री ने काॅलेज से आते ही पूछा, “मम्मा ये सब क्या है? कोई मेहमान आने वाले है क्या? जो घर को चकाचक कर रही हो” बेटी के सवाल पर सुषमा ने चहकते हुए कहा, “हाँ बेटा जी आप भी चकाचक हो जाओ, आज शाम … Read more

मेरा खून ऐसा नहीं है..! – मीनू झा  

“नीना…मानती हूं शिवांश इकलौता बेटा है तुम्हारा, बहुत प्यार से पाला पोसा बड़ा किया है,पर अपने प्यार को इतना भी अंधा मत बनाओ कि जिन आंखों में बसा कर रखा है उसे..कल वहां सिर्फ आंसू ही रहें”–जेठानी नीना से कह रही थी। जीजी..किसने कहा आपसे कि मेरा प्यार अंधा है..या मेरा बेटा मुझे धोखा दे … Read more

एनुअल फ़ंक्शन – संजय मृदुल

एक घण्टे के इंतज़ार के बाद जब खुशी बाहर आई तो निशा की आंख भर आई। ख़ुशी का उतरा हुआ चेहरा, थका हुआ शरीर बयान कर रहे थे उसकी हालत। निशा को इतना गुस्सा आया कि लगा जाकर उसकी टीचर को मन भर के सुनाए। फिर किसी तरह ज़ब्त किया उसने गुस्सा अपना और खुशी … Read more

मेरे जैसी हुई तो “शादी” करेगा ना? –  मीनू झा

चिल्ल माॅम…आप दूसरों की बातें सुनते ही क्यों हो..कौन क्या,कब कैसे इनमें दिमाग लगाने की क्या जरूरत है..आप यहां मेरे लिए आए हो तो सिर्फ मेरे बारे में सोचो ना, मुझे अच्छा लग रहा है आपको अच्छा लग रहा है और क्या चाहिए?–रेयांश अपनी मां केतकी को समझा रहा था. वही बात तो मैं भी … Read more

 ” भले घर की बहु ” – डॉ. सुनील शर्मा

जब कलम लेकर लिखने बैठता हूं तो अपने आस पास बिखरी सैंकडों कहानियां पाता हूं जिनके किरदार आगे आ आकर कहते हैं कि उन पर भी कुछ लिखूं. आज यादों में ऐसा ही एक किरदार उभर कर आया, हमारी गली के नुक्कड़ पर बैठा मोची…रामलाल जबसे होश संभाला, रामलाल को मैंने हर रोज़ बिना नागा … Read more

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