स्नेह बंधन – रश्मि प्रकाश

“ कहाँ ख़्यालों में खोई हुई हो.. कब से रज्जो चाय रख कर गई वो भी ठंडी हो गई होगी ।” नरेंद्र ने मान्या को ख़्यालों में खोया देख कर कहा “ कुछ नहीं जी दोनों बच्चों को यूँ बारिश में भीगता देख कुहू और पीहू की याद आ गई , ये चारों साथ में … Read more

एक खामोश सा बंधन – गीतू महाजन

भोर का उजाला हो चुका था। रोज़ की तरह अपनी आदत अनुसार कामिनी जी उठी और स्नानादि कर मंदिर की ओर निकल गई। पिछले कई सालों से उनकी यही दिनचर्या थी।सुबह मंदिर से आते हुए गौशाला होते हुए आना।उनकी यह दिनचर्या शायद तब से थी जब से वह ब्याह कर चौधरी खानदान की बहू बनी … Read more

तेरे जाने के बाद इस घर में तेरी कोई जगह नहीं रहेंगी – रश्मि प्रकाश

“ महक दी आप ऐसे कब तक अपने कमरे में ऐसे बंद होकर रहोगी….चलो बाहर आओ .. सब आप का ही इंतज़ार कर रहे हैं ।” महक की भाभी श्यामा उसे अपने कमरे से निकालने की हज़ार कोशिश कर चुकी थी पर महक चुपचाप कमरे में बैठ कर रोये जा रही थी तभी महक की … Read more

औरतों को इतना सर पे नहीं चढ़ाना चाहिए – डॉ उर्मिला शर्मा

 अजय  और नीतीश गहरे दोस्त थे। वह गर्मी की छुट्टियों में महानगर से अपने होमटाउन आया था। जैसा कि वह हर साल आया करता था। प्रायः रोज ही वो दोनों मिलते थे। फोन पर भी अक्सर उनकी बातें होती रहती थीं। एक सप्ताह अभी आये हुए थे। और हर बार  की तरह इस बार नीतीश … Read more

बालमन –  आरती झा

रसोई घर से राकेश की मम्मी की आवाज आती है राकेश तुम्हें स्कूल नहीं जाना है ?   टिफिन बना दिया है   फटाफट तैयार हो जाओ । राकेश स्नान के लिए तुरंत चला जाता है और स्कूल जाने के लिए वह रेडी हो जाता है ।मम्मी उसका टिफिन और पानी बोतल बैग में रख … Read more

 बंधन – ऋतु अग्रवाल

 राध्या यही कोई नौ दस बरस की रही होगी। राध्या एक बहुत बड़ी सोसाइटी के अपार्टमेंट नंबर 502 में अपने पापा, मम्मी, दादी और छोटे भाई नभ के साथ रहती थी। राध्या के पापा,मम्मी दोनों ही नौकरी करते थे। वैसे भी महानगरों में महंगाई के चलते एक की नौकरी से कहाँ गुजारा होता है। राध्या … Read more

एक बंधन ऐसा भी” – तृप्ति उप्रेती

 बात लगभग 25-30 वर्ष पहले की है। सुदूर सिक्किम के सीमावर्ती इलाके में भारतीय फौज की एक टुकड़ी तैनात थी। अक्सर ऐसे  दुर्गम इलाकों में फौजियों को दोहरे शत्रुओं से सजग रहना पड़ता है। एक तो पड़ोसी देश की तिर्यक दृष्टि और दूसरी हाड़ कंपा देने वाली ठंड। दूर दूर तक बिछी बर्फ की चादर … Read more

‘ शिक्षक ‘ – विभा गुप्ता

” सुनो, आज चार तारीख हो गई,पेंशन लेने का समय आ गया है।बैंक जा रहा हूँ,आने में देर हो जाए तो परेशान मत होना।युवाओं को समय की कद्र कहाँ, छोटे-छोटे काम में भी घंटों लगा देते हैं।” पत्नी को कहकर रामनिवास जी बाहर जाने लगे तो पत्नी ने पीछे से कहा, ” आपके इतने सारे … Read more

 पिंजरा – बालेश्वर गुप्ता

  कितना सुख है बंधन में, रजनी गंधा—      कहीं दूर से इस गाने की आवाज आ रही थी।रमेश ने पूरे घर की अकेले सफाई कर ली थी।बिटिया सोनिया का कमरा उसने बड़ी ही तन्मयता से साफ किया,कौन सी चीज सोनिया कहाँ रखती थी, वो सब उसने सोच सोच कर उसी की रुचिनुसार सजाया था। इतना करने … Read more

पुनरावृत्ति – डॉ उर्मिला सिन्हा

 घनी झाड़ियों ,ऊंचे पेड़ों से आच्छादित , शहर के कोलाहल से दूर निर्जर वन प्रांतर में बसा हुआ यह महिला महाविद्यालय मुझे अपने एकाकी जीवन जो कभी अभिशाप लगता था ; वरदान साबित हुई। यहां प्रकृति से सीधा साक्षात्कार मेरे रोम रोम में न‌ई स्फूर्ति भर देती है।     चपरासी ने एक पूर्जा आगे बढ़ाया। मैं … Read more

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