उल्टी पट्टी पढ़ाना – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

क्या करूं मम्मी… समझ ही नहीं आता.. कल शाम को अमित के मम्मी पापा और भैया भाभी यहां हैदराबाद घूमने के लिए आ रहे हैं, पूरे एक हफ्ते का कार्यक्रम है उनका, मम्मी मैं तो काम करते-करते ही थक जाऊंगी…. बताइए ना क्या करूं..? पूजा की बात सुनकर मम्मी बोली.. देख बेटा ऐसा है जब … Read more

 रिश्ता – एम पी सिंह : Moral Stories in Hindi

राजू के पैदा होते ही उसकी मां गुजर गई थी और जब वो 7 साल का था, उसके पिता भी गुजर गए थे। दादी थी नही, इसलिए दादा ने जैसे तैसे बड़ा किया। 15 साल की उम्र में दादा भी साथ छोड़ गए। पेट भरने के लिए उसने पढ़ाई छोड़ दी और एक स्कूटर रिपेयर … Read more

अपनों की पहचान – विमला गुगलानी :

मुसीबत में ही असली चेहरा दिखता है      इनाया, शांतनु और अभिषेक , दो दो साल के अंतराल में पैदा हुए तीनों भाई बहन माँ रेवती और पिता आलोक की जान थे। लड़ते , झगड़ते , रूठते, मानते लेकिन फिर एक हो जाते।बचपन होता ही इतना प्यारा है,दुःख सुख सांझे, कुछ पता नहीं घाटा, नफा क्या … Read more

जादुई दर्पण – नीरज श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

रजनी के किच-किच से तो मैं परेशान हो चुका हूँ। जब देखो लड़ती रहती है। आज तो घर जाऊँगा ही नहीं, चाहे कुछ भी हो जाये।”   मन में बुदबुदाता हुआ, मनोज पार्क में आकर बैठा ही था कि हवाओं ने बहना शुरू कर दिया। जैसे हवाओं को उसके आने का एहसास हो गया हो। मनोज … Read more

रिश्तों का विश्वासघात – ज्योति आहुजा 

 बात कुछ वर्ष पुरानी है ।कुरुक्षेत्र का मेन बाज़ार  हर  रोज़ की तरह चहल–पहल से भरा था। दुकानों की रोशनी में गहनों की चमक आँखों को चौंधिया रही थी।  शारदा ज्वेलर्स की दुकान पर भी भीड़ थी। काउंटर के पीछे महेन्द्र जी और उनकी पत्नी शारदा जी बैठे थे। तभी अचानक एक जानी–पहचानी आवाज़ आई—“नमस्ते … Read more

वाह री दुनिया ! – अर्चना सिंह

गोपाल जी उस दिन बाजार से सब्जी लेकर लौट रहे थे कि सिर बहुत भारी सा लगने लगा । उन्होंने सोचा एक बार डॉक्टर से बी.पी जाँच करा लेता हूँ । जब डॉक्टर के पास जाँच कराने गए तो बी.पी सामान्य था और डॉक्टर ने बताया हार्ट के डॉक्टर को दिखा लीजिए, उसकी वजह से … Read more

ज़रूरत – करुणा मलिक

आदेश जी ने एक आर्मी ऑफ़िसर के पद से रिटायर होने के पहले अपनी पत्नी चित्रा के साथ अपने पैतृक गाँव में ही तीन बेडरूम का छोटा सा घर बनवा लिया था । आज रिटायरमेंट के बाद अपने उसी घर का गृहप्रवेश और रिटायरमेंट पार्टी साथ-साथ ही यह सोचकर रखी थी कि दो- दो बार … Read more

अपने बेटे के साथ क्यों नहीं रहते? – लक्ष्मी त्यागी

रामपाल यादव जी, प्रतिदिन पार्क में टहलने के लिए जाते हैं वहीं पर उनके कुछ हमउम्र मित्र भी मिल गए जो कुछ सेवानिवृत हो चुके हैं या कुछ होने वाले हैं, सभी लोगों का एक समूह बन गया है और सब एक दूसरे से परिचित हो गए हैं ,हंसी -मजाक करने के साथ -साथ कॉलोनी … Read more

लाख टके का हीरा – विभा गुप्ता 

   ” अब तो सभी आ गए हैं किशोरी अंकल..आप पापा का वसीयत खोलकर पढ़िए और…।”       ” नहीं..अभी कन्हैया को आने दीजिये..।” बेटे राघव की बात पूरी होने से पहले ही जानकी जी ने वकील किशोरी लाल को हिदायत दे दी जिसे सुनकर उनके बच्चों के माथे पर बल पड़ गये।दो मिनट बाद ही कन्हैया आ … Read more

आप बहू को खाने को नहीं देतीं

मैं सच बता रही हूं, कल रात रोहित भैया स्नेहा भाभी के लिए एक बड़ा पैकेट लेकर आए। लगता है उन्हें घर का खाना अच्छा नहीं लगता। मुझे पूरा यकीन है, कुछ खाने-पीने का ही सामान था। अब आज पड़ोस के लोग देखने वाले तो यही कहेंगे— “आप बहू को खाने को नहीं देतीं, इसलिए … Read more

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