साथ  –  रीटा मक्कड़

हर रोज उनको देखती हूँ और देखती ही रहती हूं मैं बात कर रही हूं एक बजुर्ग जोड़े की। उनकी उम्र मेरे अंदाज से तो 85 से 90 के करीब तो होगी। हर रोज सुबह मैंअपने घर से थोड़ी दूरी पर सुबह गुरुद्वारा साहब दर्शन के लिए जाती हूँ।ताकि थोड़ा चलना भी हो जाये और … Read more

चैरिटी बॉक्स   – उषा भारद्वाज

 सब्जी वाले की आवाज सुनकर गीता बाहर निकली और उसको देखते ही ऐसे बोली, मानो बहुत दिनों से उसका इंतजार था। और यह सच भी था ये सब्जी वाला रोज गीता की कॉलोनी में आता था और सभी उससे सब्जी खरीदते थे। गीता ही नहीं बल्कि अधिकांश घरों को इसका इंतजार था।        गीता बहुत नम्र … Read more

गहरी नींद  – गीतू महाजन

गहरी अंधेरी रात में शशांक अपनी बालकनी में खड़ा दूर शून्य में देख रहा था।आज भी उसकी आंखों से नींद कोसों दूर थी।अपने आलीशान घर में बने विशाल कमरे में लगे हुए भव्य पलंग पर लेट कर भी पिछले कई रातों से वो सो नहीं पाया था। आज भी वो कितनी देर से सोने की … Read more

डोर जो न टूट सके  –  ………कुमुद चतुर्वेदी.

 स्कूल बस घर के पास जैसे ही रुकी वंश ने इशारे से माही को चुप रहने को कहा और खुद उतरने को आगे बढ़ गया।गेट के पास उसकी माँ पूजा ने आगे बढ़ उसका हाथ पकड़ा और घर चल दी।पीछे माही जब उतरी तो उसकी माँ लगभग दौड़ती आती दिखी,तब तक बस रुकी रही और … Read more

मेरी वंशिका – नीना महाजन नीर

आजकल वंशिका मानसिक रूप से बहुत परेशान थी  इससे उसकी पढ़ाई पर भी असर आने लगा था क्योंकि गली से नुक्कड़ पर आते जाते उसे कुछ आवारा लड़के उसे फब्तियां कसते और उल्टा सीधा बोल उसका मज़ाक बनाते थे।           वंशिका ने अपनी बचपन की मित्र और सहपाठी सौम्या को सब बताया कि आकाश अपने साथियों … Read more

  अपने तो अपने होते हैं –  बेला पुनिवाला 

  तो दोस्तों, ज़िंदगी भी बड़ी अजीब होती है, कभी कहीं किसी की ज़िंदगी में अपने अपनों का साथ छोड़ देते है, तो कभी कहीं किसी की ज़िंदगी में अपने ही अपनों के काम आते है। कभी कहीं किसी के अपने ही आँखों में आँसू दे जाते है, तो कभी कहीं किसी के अपने ही अपनों … Read more

 कभी ख़ुशी कभी ग़म –   बेला पुनिवाला 

 आज कल सभी बच्चों के सिर पे जैसे एक ही भूत सवार है, विदेश जाके पढ़ने और पैसे कमाने का। रवि की ममा रवि को सुनते हुए अपने आप से ही जैसे बातें कर रही थी मगर रवि के पापा और रवि समझ गए थे, कि रवि की माँ कुसुम किस के बारे में बात … Read more

भाई-भाई *-  पुष्पा जोशी

विषय #अपने_तो_अपने_होते_हैं आचार्य चिन्मय जी और मालिनी जी का परिवार एक आदर्श परिवार था.समाज और मौहल्लै में उनकी अच्छी साख थी. चिन्मय जी संस्कृत के प्रकाण्ड पंडित थे.हवन पूजन, वैवाहिक कार्यक्रम के सभी विधान, कथा वार्ता सभी में उन्हें महारत हांसिल था, उन्हें ज्योतिष विद्या का भी ज्ञान था, सब लोग अपनी छोटी बड़ी उलझन … Read more

बचपन के गली मुहल्ले वाले दोस्त अपने से लगते हैं…–  सुल्ताना खातून

आज जब दुनिया के रंगीनियों से अलग थलग होकर एक घर में कैद हुई हूं, तो दोस्त बड़े याद आते हैं… बचपन के गली मोहल्ले वाले दोस्त… स्कूल के दोस्त…. कॉलेज के दोस्त… ऑफिस के दोस्त। दरअसल दोस्तों की भी कैटेगरी होती है ना! स्कूल गए, गली मुहल्ले की दोस्ती छूटी! कॉलेज गए, स्कूल की … Read more

अब”बुरी बहू” के टैग से फ़र्क नहीं पड़ेगा !!- -मीनू झा

वह कभी हिम्मत हारने पर विश्वास नहीं रखती थी..तभी तो सारे एक तरफ वो अकेली एक तरफ और लगातार सफाई देती ही रही और अपने आपको सही सिद्ध करने के लिए लड़ती ही रहती…पर आज डाॅक्टर ने जो कहा उससे वो हिल गई… मिसेज वर्मा…जितनी जल्दी जल्दी आपको शुगर, ब्लड प्रेशर और थायराइड हुआ है…इट्स … Read more

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