जीजिविषा – डॉ उर्मिला सिन्हा

गली में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था.पहरेदार का “जागते रहो..”की तीव्र ध्वनि नीरवता भंग कर रही थी.रात आधी बीत चुकी थी .हंसा घुटनों में सिर दिये  झपकी ले रही थी. नींद के झोंके से माथा कभी इधर, कभी उधर लुढ़क पड़ता .वह पुनः सिमट कर बैठ जाती .वह जितना ही जागने का प्रयास करती नींद … Read more

ये हुई न बात – श्रद्धा निगम

सुबह मीनू के फोन से ही नींद खुली।मौसी आप को ज़रूरी  सूचना देनी है।आप सब अपने रिजर्वेशन,टिकट आदि कैंसिल करवा दीजिये.रोली दीदी की शादी कैंसिल हो गयी। लेकिन…सीमा ने कुछ कहना चाहा.. उनकी बात काटते हुए मीनू ने कहा -मम्मी आपसे दो-तीन दिन बाद बात करेगी।कह कर मीनू ने फोन काट दिया।  सीमा उसकी बात … Read more

बहुतै नांच नचायौ- नन्दलाल भारती

सम्भ्रान्त बाबू ने तो वैसे अपने बेटों के स्कूली शिक्षा के दौरान ही दहेज मुक्त ब्याह करने का एलान कर दहेज दानव के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था। सम्भ्रान्त बाबू का अपने ही घर से  दहेज विरोधी अभियान पर  किसी को विश्वास नहीं हुआ। कई दहेज लोभियों की टिप्पणी से सम्भ्रान्त बाबू ही नहीं उनकी … Read more

एक दिन का बादशाह  (हास्य रचना) –  -विनोद प्रसाद ‘विप्र’ 

“अजी उठिए, सात बज रहे हैं। और कितना सोएंगे ?”- शहद टपकती आवाज मेरे कानों में पड़ी तो मैं हड़बड़ा कर उठ गया। आँखें मलते हुए मैंने मुआयना किया कि मैं अपने ही घर में तो हूँ न। जब यकीन हो गया तब मैंने उन्हें गौर से देखा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामने … Read more

करवाचौथ सरप्राइस गिफ्ट – लतिका श्रीवास्तव 

…. पलाश का दिल मीठी सी आनंदानुभूति में मग्न था….आज शरद पूर्णिमा का चांद है तीन दिनों बाद करवाचौथ का चांद दिखेगा…..अभी ही उसकी शादी हुई है नई नवेली दुल्हन तूलिका उसके लिए करवाचौथ का व्रत रखेंगी …उसके लिए …!सोच सोच कर वो आनंदित हो रहा था….जैसे मां पिताजी के लिए रखती हैं….वो बचपन से … Read more

आज फिर जीने की तमन्ना है ” – अनिता गुप्ता 

  24 वर्षीय विभा कैंसर अस्पताल के जनरल वार्ड के पलंग पर लेटी है। अभी दो दिन पहले ही विभा को आईसीयू से जरनल वार्ड में शिफ्ट किया था। एक हफ्ते पहले उसका ब्रेस्ट कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। विभा एकटक छत की ओर देख रही है। पास में उसकी मां ललिता जी बैठी हैं। … Read more

औरत का 24 घंटा – पूजा गोयल 

अरूणा यह क्या है मेरा शर्ट का बटन अभी तक नहीं लगा पाई तुम यार तुम औरतें करती क्या हो घर पर पता नहीं मोहित रूम से चिल्लाते हुए अरूणा को सुनाता है अरूणा के लिए भी यह रोज का था मोहित खुद कुछ भी नहीं करता है अरूणा बिमार सास के साथ दो साल … Read more

खुशी – सुधा शर्मा

 शाम के साथ ही जैसे डूबते सूरज के साथ ही मन भी डूबने लगा था , रात की गहराती स्याही उतरने लगती थी चेतना में ।बरामदे में गौरी पिछले कुछ समय में घटी घटनाओं की त्रासदी में डूबने लगी थी।         कितना प्यारा भरा पूरा परिवार ।बेटा , बहू, सात वर्ष की चहचहाती पोती।बेटा कनाडा में … Read more

सुमि – सुधा शर्मा

‘सुमि’,इतने मधुर स्वर में कहा किसी ने कि हवाओं में रस भर गया । सुमि रसोईघर से बाहर आई।’क्या कर रहीं थीं? भूल गयीं? आज मेरी छुट्टी है हमें बाहर चलना है लंच के लिए । आज सारा दिन  हम सब साथ बितायेगे । चलो , अनु  को तैयार होने  को कह कर आया हूँ … Read more

सुनो न: – मुकेश कुमार (अनजान लेखक)

—– सुनो न, हाँ तुमसे ही बोल रहा हूँ, सुनो न! क्या? बोलो न, सुन रही हूँ। वो मैं बोल रहा था न! क्या? याद आती है मेरी? बुद्धु, ये भी पुछने वाली बात है क्या? हाँ, जब बोलती हो न, तब दिल ज़ोर से धड़कने लगता है। कुछ भी। नहीं, सच में। तो सुनो, … Read more

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