“गलती किसकी” – ऋतु अग्रवाल
दीवाली की सफाई के बाद थकी हारी सुहानी आराम कुर्सी पर अधलेटी सी बैठी थी। तभी गेट खोल कर दफ्तर का चपरासी रामविलास अंदर दाखिल हुआ। “बहू जी!यह चिट्ठियाँ लेकर आया हूँ।साहब का फोन भी आया था। मुंबई से कोलकाता के लिए चल पड़े हैं। परसों लौट आएँगे।”उसने चिट्ठियाँ देते हुए कहा। सुहानी स्टडी रूम … Read more