मेरी पहली कमाई का हकदार कौन – सिन्नी पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

रूबी अपने स्कूल से लौटकर आई तो एक अलग ही आत्मविश्वास और चमक उसके चेहरे पर थी और हो भी क्यों न आख़िर आज उसे उसके जीवन में पहली बार खुद की मेहनत से कमाए हुए रुपये जो मिले थे। आज उसको पढ़ाते हुए एक महीना पूरा हो गया था और उसके हाथ मे उसकी … Read more

विश्वासघात – सुदर्शन सचदेवा : Moral Stories in Hindi

रेनु तो आज इतनी खुश थी कि चेहरा भी बिल्कुल पिंकिश पिंकिश लग रहा था , जानते है क्यूं ? क्योकि कालेज के बाद बहुत सालों से एक दूसरे से मिले नहीं थे | आज उसके पैर जमीन पर नहीं थे , ऐसे लग रहा था कि किसी ने उड़ान भर दी हो | रेनु … Read more

मां का घर – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

बड़ी नासमझ थी मैं समझती थी की मां का मायका है ये तो नानी का घर है।घर तो वो है जहां हम सभी एक साथ रहते हैं लेकिन जब मां को उनके मायके में देखा तो अहसास हुआ की सही मायने में यही घर मां का है। यहां मां की अपनी पहचान है। नानी को … Read more

एहसास – खुशी : Moral Stories in Hindi

जमुना प्रसाद जी और जानकी जी के तीन बेटे अमर अजय और  केशव थे और कुछ वर्ष बाद एक बेटी गीता हुई सब भाइयों में सबसे छोटी पिताजी उसे प्यार करते पर मा का दिल तो अपने बेटों में था।जमुना प्रसाद की कपड़ों की दुकान थी बीच बाजार में जो चलती भी बहुत थी।बड़ा बेटा … Read more

उल्टी पट्टी पढ़ाना – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

पदमा के पिता की मृत्यु बचपन में हो गई थी माँ कमला ने ही रेलवे में नौकरी करते हुए अपनी दोनों बेटियों को पाला था । पदमा की शादी जयपुर में नौकरी करने वाले एक वकील प्रदीप से हुई । प्रदीप की तीन बहनें हैं तीनों बहनें पदमा से प्यार करती थीं । वे तीनों … Read more

बेटी के ससुराल में साजिश न करों – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

कोरियर, और गेट खटखटाया , प्रकाश नारायण जी ने उठकर गेट खोला तो सामने कोरियर वाला खड़ा था। उसके हाथ में एक लिफाफा था जो उसने प्रकाश नारायण जी को पकड़ा दिया और चला गया। प्रकाश जी लिफाफा लेकर अंदर आए तो पत्नी आरती ने पूछा क्या है जी इस लिफाफे में । देखता हूं … Read more

मंझली बहू – शुभ्रा बैनर्जी  : Moral Stories in Hindi

चार बेटों की मां,मुग्धा देवी कठोर अनुशासन प्रिय महिला थीं।उनकी मर्जी के बगैर घर में पत्ता भी नहीं हिलता था।पति के जाने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी बड़े बेटे शुभ के कंधों पर आ गई थी।अपनी कमाई से ही संयुक्त परिवार का खर्च वहन करता था वह।मंझले बेटे के साथ गुरु दर्शन को गईं,मुग्धा … Read more

उल्टी पट्टी पढ़ाना – रंजना गुप्ता : Moral Stories in Hindi

गाँव रामपुर में एक बुज़ुर्ग अध्यापक रहते थे – नाम था हरिनारायण जी। पूरे गाँव में उनका बहुत मान-सम्मान था। वे न सिर्फ़ बच्चों को पढ़ाते थे, बल्कि जीवन की सीख भी दिया करते थे। उनका मानना था कि शिक्षा का अर्थ केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि सही रास्ता दिखाना भी है। गाँव में … Read more

वक़्त पर काम आना – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

“आजकल के बच्चों की यह बात मुझे एकदम पसंद नहीं आती है,जो कमाया सभी उड़ा दिया।आड़े वक़्त के लिए कुछ बचा कर रखते ही नहीं है।अब कुछ विपप्ति आई तो चलो किसी के आगे हाथ पैर जोड़ने।तुम्हारी शादी में इतना लेनदेन किया फिर भी मुझसे उम्मीद रखती हो। अब कहाँ से दूँ।”पापा की बात सुनकर … Read more

आप अपने बेटे के साथ क्यों नही रहते – रीतू गुप्ता : Moral Stories in Hindi

रंजन जी के एकलौते बेटे अभय की आज रिसेप्शन पार्टी चल रही थी।  सब खूब मस्ती कर रहे थे। नाच-गाना चल रहा था। रिश्तेदार दूल्हा-दुल्हन को उपहार और आशीर्वाद देकर फोटो करवा रहे थे। जैसे ही रंजन जी ने अपने बेटे-बहु को शादी के तोहफे में नए फ्लैट की चाबी दी .. और बोले बेटा….. … Read more

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