सोंच नई – इरा जौहरी

कुछ झटके जीवन में समयानुकूल उपयोगी नया ज्ञान देते हैं ।अभी तक यही सोंचती थी कि जीवन में स्वास्थ्य बीमा कराना बहुत जरूरी है पता नहीं कब आवश्यकता पड़ जाये ।एसे में पास में कुछ धन हो तो काम आता है । किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता हैमम । पर हकीकत इससे कोसों … Read more

अधूरी इच्छा – पूजा मिश्रा

आज फिर शिवांगी ने अपनी सहेलियो को स्कूल जाते देखा तो वह झाडू छिपाकर खड़ी हो गई ,वह उन्हें -बाय बाय कह कर अंदर चली गई । जब भी वह स्कूल जाते अपने साथ के बच्चों को देखती उसको बहुत बुरा लगता वह भी पढ़ना चाहती है परंतु पापा की बीमारी ने मम्मी को घरों … Read more

अब में अबला नही – मंगला श्रीवास्तव

सरोज आज कुछ जल्दी में काम कर रही थी।सुबह से ही उसका सिर बहुत दर्द कर रहा था।इस कारण वो आज उठी भी थोड़ी देर सी थी।उसने जल्दी जल्दी नाश्ता बनाया और दोनों बच्चों नीरा और राघव को तैयार कर स्कूल भेजा ।और जल्दी से खुद भी तैयार होकर बुटीक पर निकल गयी अपना टिफिन … Read more

मर्यादा के नाम पर जज्बातों से खिलवाड़…… – भाविनी केतन उपाध्याय 

” कैसा है अब मंथन को ? अच्छा हुआ समय पर अस्पताल पहुंच गए,हमारा तो सुन कर ही दिल बैठा जा रहा है कि इतनी कम उम्र में हार्ट एटैक कैसे हो गया ? चिंता मत करो सब जल्दी ही ठीक हो जाएगा, वैसे भी सब है ना तुम्हारे साथ में …!!” शर्मा आंटी ने … Read more

घुटन – नीना महाजन नीर

 शाम का समय ठंडी हवाएं और सर्दी का मौसम …        सब ओर शीतलता पर भीतर की उष्णता से मैं त्रस्त हो चुकी थी ।           मैं कहां से कहां पहुंच चुकी थी.. मैं क्यों मर्यादा सीमा में नहीं रह पाई …        ख़ुद से ही लज्जित हो रही थी मैं..!             अब तो उम्र का वह हिस्सा मैं … Read more

कलकतही (कहानी) –     डॉ उर्मिला सिन्हा

 चूड़ियां सुहाग का प्रतीक। सुहागिनों की पहली पसंद।कुंआंरियों का सुनहरा भविष्य। मैं जब भी चूड़ियां खरीदने चूड़ी के दुकान पर आती हूं , मेरे मानस पटल में बचपन की एक धुंधली सी तस्वीर उभर आती है—कलकतही की। कलकतही कोई और नहीं बल्कि एक चूडीहारिन थी।उसका छोटा सा टोकरा हरी,लाल,नीली,पीली,प्लेन और कामदार चूड़ियों से भरा रहता … Read more

मर्यादा की वेदी पर कुर्बान’ – प्रियंका सक्सेना

सुधा की खबर आते ही घर में मातम छा गया…अम्मा छाती पीट पीट कर विलाप करते हुए सुधा की ससुराल वालों को कोसने लगीं, “कीड़े पड़े उन लोभियों को। मार डाला मेरी बिटिया को। हाय मेरी सुधा, मेरी बिटिया!  गार्गी से जब सहन नहीं हुआ तो वह आँगन में आकर बोली, “अम्मा दीदी को उन … Read more

डॉगी की व्यथा –  बालेश्वर गुप्ता

  कहीं पढ़ा भी था और समझा भी था कि शांति और सम्मान के साथ यदि जीवन यात्रा पूर्ण करनी है तो बुढ़ापे में सहनशील होना और चुप रहने की आदत डाल लेना ही कुंजी है।रमेश ने इन गुर को अपना लिया था।मुन्ना को उसने समझा दिया था बेटा देख हमने तो अपनी जीवन की पारी … Read more

लिव इन – भगवती सक्सेना गौड़

रामेश्वर जी रिटायरमेंट के बाद अपने तिमंजले घर मे सबसे नीचे पत्नी के साथ ही रहते थे। दोनो बेटे बड़े शहरों में व्यवस्थित हो चुके थे।  एक दिन सुबह उठकर उनकी पत्नी सारंगी गार्डन में घूम रही थी, तभी गेट खोलकर कोई लड़के लड़की ने अंदर प्रवेश किया। “सुनिये, किसी ने बताया, आपके घर मे … Read more

अम्मा की सौगात – नीरजा कृष्णा

दो दिनों के बाद उर्मि को  प्रयागराज जाना था। वो बहुत खुथ थीं और फिर चल पडा़ पुरानी यादों का सिलसिला…. उनके छोटे भाई वहाँ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे और उन्होनें सबकी इच्छा के खिलाफ़ आयशा बेगम से विवाह किया था। वो उन यादों की नाव पर सवार होकर हिचकोले खा रही थीं। आयशा के … Read more

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