प्रियतमा  – किरण केशरे

आज सुहाग पड़वा थी, नई नवेली सिमरन आज खूब सजधज कर तैयार हुई थी अभी कुछ महीने ही तो हुए थे शादी को,,रोज जींस टॉप ,टी शर्ट सूट, पहनने वाली सिमी ! साड़ी में बला की खूबसूरत लग रही थी,,,,वैसे उसका ससुराल खुले विचारों वाला था तो कोई रोक टोक किसी बात में नही थी … Read more

एक ससुराल ऐसा भी – संगीता अग्रवाल

” अरे कमला देखो चूड़ी वाला आया है दस दिन बाद तीज है। तीज के लिए चूड़ियाँ लेनी होंगी तुम्हे कहो तो बुला लूँ ?” सुधाकर जी ने अपनी पत्नी को आवाज़ दी। ” धीरे बोलो जी छोटी बहु सुन लेगी तो उसे कितना बुरा लगेगा …वैसे भी मैने बड़ी बहु को बोल दिया वो … Read more

मां में पराई नहीं हूं! – कामिनी सजल सोनी

पूजा के ससुराल में घर के बाहर चाट वाला आवाज लगा रहा था बेवफा चाट वाले की पानी पूरी पीलो खट्टी खट्टी, मीठी मीठी ! उसकी यह आवाज सुनकर पूजा का दिल अक्सर मचल जाता पानीपूरी देखकर यह फिसल जाता! पर हाय रे क्या करूं ससुराल में  घर के बाहर निकल कर पानीपुरी तो नहीं … Read more

बहू बेटी – डा.मधु आंधीवाल

सौम्या नाम ही नहीं स्वभाव की भी सौम्य थी । उदास सी खिड़की में खड़ी देख रही थी । पार्क में एकत्रित हरे परिधानों में गीत गाती सजी धजी महिलाओं को झूला झूलता देख रही थी पर उसकी जिन्दगी तो बेरंग हो चुकी थी । अच्छी खासी वैवाहिक जिन्दगी चल रही थी । इतना प्यार … Read more

कोना मायके का – भगवती सक्सेना गौड़

आज सुकन्या दीवाली की सफाई कर रही थी, सीढ़ी पर चढ़कर ऊपर की अलमारी के किवाड़ खोले। एक चरर्रर्रर सी आवाज़ हुई, क्योंकि ये अलमारी सिर्फ दीवाली के एक हफ्ते पहले ही खुलती थी। तभी एक लकड़ी का बक्सा दिखा, जिसमे सिर्फ उंसकी ही यादें थी, जिसमे सिर्फ उसके अपने थे, जिनका वो बहुत आदर … Read more

‘एहसास अपनों का!’ – प्रियंका सक्सेना

“मम्मी, विनीत का स्थानांतरण अहमदाबाद हो गया है, इसी महीने हम लोग शिफ्ट कर जाएंगे।” सुनंदा ने सरला जी को  बताया “बेटा, अभी तुम लोगों को लखनऊ आए एक साल ही हुआ है और फिर से ट्रांसफर हो गया?” आश्चर्य से सरला जी ने कहा “मम्मी, आप तो जानती ही हों, विनीत की सेंट्रल गवर्नमेंट … Read more

अलविदा भीगी आँखों से – गोमती सिंह

——सरस्वती और मंदाकिनी दोनों बैठकर आपस में पुरानी बातों को याद कर रहे थे।            सरस्वती बोल रही थी-पता है मंदाकिनी, मेघा जब स्कूल जाती थी तब मेरे से ही चोटी बनवाती थी । कभी-कभी उसकी चाची बोल देती “आओ मेघा मैं छोटी बना देतीं हूँ, माँ जी कुछ दुसरे काम में ब्यस्त है । ” … Read more

नया पन्ना —डा. मधु आंधीवाल

मां आज मेरा फाइनल इन्टरव्यू है आज तो कुछ बोलो मां केवल तुम्हारे बोल सुनने को मैं तरस गयी । मां पापा और सब परिवार वालों की सजा मुझे क्यों दी मां ? ये एक विनती उस यौवना की थी जिसका नाम युविका था । वह मौन साधिका अपूर्व सुन्दरी कभी यौवनावस्था में चांद भी … Read more

अनाम – सुधा शर्मा     

 अचानक सामने कुमार और रोहित को देखकर मै चौंक गयी । मैंने प्रश्न वाचक निगाहो  से दोनों की तरफ देखा मुँह से आवाज़ तक नहीं निकली। फिर कुमार की ओर मुखातिब हो कर कहा,’आप? क्या बात है?” इससे पहले कि कुमार कुछ कहते रोहित बोल उठा,”माँ,उनसे मत कहो कुछ मैं उन्हें यहाँ लाया हूँ ।”  … Read more

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