“स्वार्थी कौन” – डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव

 ऊजे कांच ही बांस के बहँगिया …बहँगी लचकत जाये  ऊजे भरिया जे होइहें …… छठी मईया के इस अधूरे गीत ने सुमन जी के हृदय में हाहाकार उठा दिया था। वह एक हाथ अपने कलेजे पर रखी हुई थी और दूसरे हाथ से अपने वियोग के निकले आंसुओं को पोंछ रहीं थीं। पिछले साल पति … Read more

कैसा ये इश्क है – कमलेश राणा

बात पिछले साल की है। नवम्बर का महीना था। गुलाबी ठंड दस्तक दे रही थी, मौसम बड़ा ही सुहाना था।  पड़ोस में रहने वाले मिश्रा जी के बेटे की शादी की रौनक मौसम के साथ साथ दिलों में भी सुहानी खुशियों का संचार कर रही थी।  वो कहने को हमारे पड़ोसी थे, हमारे बीच रक्त … Read more

पत्थर दिल – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

सुकन्या की नन्द की शादी को दो साल हो गए थे लेकिन उनको कोई बच्चा नही था। बच्चे के लिए वे काफी परेशान रहती थी तो सुकन्या ने उनको एक बहुत ही प्रसिद्ध काबिल डाक्टर के बारे मे बताया और कहा, आप इनको दिखाइए मै गारंटी देती हूं आपको एक साल के अन्दर ही बच्चे … Read more

कांच की दीवार – डा. मधु आंधीवाल

आज माधवी और अमर में फिर वाद विवाद होगया । इतनी उम्र साथ साथ व्यतीत होने के बाद भी कभी कभी तकरार भयंकर रुप ले लेती है। ऐसा नहीं कि दोनों में प्यार नहीं । एक के बिना दूसरा नहीं रह सकता ।  दोनों बेटियों की शादियाँ होगयी । बेटे की भी शादी हो गयी … Read more

हमारे घर का चिराग़ हमारे ही आँगन में होगा – रश्मि प्रकाश

रागिनी को जब पता चला कि वह माँ बनने वाली है तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा था ये यूँ तो उसका दूसरा बच्चा था पर ख़ुशी दुगुनी हो रही थी क्योंकि उसने अपने पति तुषार से यही कहकर दूसरे बच्चे के लिए हामी भरी थी कि पहले बच्चे के वक़्त मुझे महसूस ही … Read more

जिद्द की कीमत – पुष्पा पाण्डेय

राखी की पढ़ाई को लेकर घर में भाई-भाभी के बीच जो विवाद हुआ उसे लेकर चंदा काफी दुखी थी। घर के मुख्य दरवाजे पर चुपचाप उदास बैठी थी। भाभी चाहती थी कि राखी घर में ही रहकर काॅलेज की पढ़ाई करे। गाँव से शहर का काॅलेज पाँच किलोमीटर की दूरी पर था। बस तो आती-जाती … Read more

वक़्त का पहिया – डॉ उर्मिला शर्मा

 एक छोटे से शहर के निकटवर्ती गॉव की नम्रता स्नातक की छात्रा थी। जो रोजाना सायकिल से शहर के कॉलेज में पढ़ने जाया करती थी। औसत दर्जे की पढाई में नम्रता बहुत ही महत्वाकांक्षी लड़की थी। घर में तीन भाई- बहनों में नम्रता सबसे छोटी सबकी चहेती थी। उसका निम्न मध्यमवर्गीय परिवार बुनियादी जरूरतों को … Read more

 मां होती तो उसके दर्द को तो समझती – किरण कुशवाहा

अंजू की शादी को डेढ़ साल हुए थे, पति अजय दूसरे शहर में नौकरी करते थे| महीने में दो-तीन दिन के लिये आते तो दिन भर तो घरवालों के साथ ही रहते तो कुछ कहने और सुनने का समय ही नहीं मिलता। इधर कुछ दिनो से अंजू कुछ भी खा रही थी तो उसे उल्टी … Read more

तुम्हारी वजह से मैं आज खुद से प्यार करने लगी हूं – चाँदनी झा 

बीबीजी, आप इतना झल्लाई सी क्यों रहती है? विमला ने डरते हुए सुधा से पूछा। झल्लाई क्या, सारा काम मुझे ही करना पड़ता है। तुम्हारे साहब को, ऑफिस के आलावा किसी चीज की चिंता नहीं, रोहन, रिया सबका ख्याल रखना, मेरी सास भी बीमार रहती है, और तुम कहती हो की मैं झल्लाई क्यों रहती … Read more

मन की खुशी – सोनिया कुशवाहा

इस साल बहुत धूमधाम से मनाऊंगी करवाचौथ, खुशी ने मन ही मन निश्चय किया। हर साल पूजा और विधि के शानदार फोटो देखकर मुझे कितना खराब लगता है, ना सही से तैयार हो पाती हूँ ना ही कभी मुकुल ने कहा कि कोई नई साड़ी या जेवर खरीद लो। बस वही पुरानी साड़ियाँ पहन कर … Read more

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