बड़े दिल वाली (निशा) – सपना शर्मा काव्या

मेरी यह कहानी एक सच्ची कहानी पर आधारित है। बस नाम और जगह बदल दी है। इस कहानी की सूत्रधार मैं ही हूं क्यू की जो हुआ मेरे सामने ही हुआ तो मैं अब कहानी पे आती हूं। मै सपना शर्मा जो पेशे से एक वकील भी हूं और नोएडा में रहती हूं। अभी कुछ … Read more

लिपट गई – कंचन श्रीवास्तव

भरपूर पति का प्यार, सुख सुविधा,मिलने के बाद भी राधा के चेहरे पर वो चमक नहीं है जो एक नई नवेली ब्याहता स्त्री के चेहरे पर होना चाहिए और अब तो साल के भीतर ही एक बेटा भी हो गया,और कहते हैं ना कि बेटियां कितना भी बढ़ती उम्र के साथ मां बाप के लिए … Read more

ऐसी विदाई हो तो.. – प्रियंका मुदगिल

“भाभी! आपकी लाडो मिली की शादी की डेट फिक्स हो गई है लड़केवालों ने कहा कि उन्हें सादे तरीके से ही शादी करनी है….इसलिए जब  देखने आए तभी  अंगूठी पहनाकर शगुन कर गए…..आप आएंगे ना…””संगीता ने अपनी जेठानी रजनी को फोन पर कहा। रजनी :- “”जब इतना सबकुछ कर ही लिया है तो शादी भी … Read more

संकटमोचक – डॉ. पारुल अग्रवाल

जब करोना का प्रथम लहर आई तो हम लोगों में किसी ने नहीं सोचा था कि ये छोटा सा सूक्ष्मदर्शी इतना विकराल रूप धारण कर लेगा और पूरी दुनिया को अपने आतंक से हिला से देगा । प्रथम लहर में लगा लॉकडाउन जिसे हम सबने थोड़े दिन की बंदिश समझा था और सोचा था चलो … Read more

अपने तो अपने होते ही हैं पराए भी अपने बन जाते हैं। – श्रद्धा खरे

आज जब मेरे  छोटे बेटे ने मुझे जन्मदिन पर उपहार स्वरूप  इनोवा गाड़ी की गिफ्ट की, तो मेरा मन कई साल पहले अतीत में चला गया। अतीत अपने पीछे बहुत कुछ छोड़ जाता है। ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ बात उन दिनों की है जब मेरे पतिदेव हॉस्पिटल में लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी … Read more

गाँव वाले बाऊजी  – रवीन्द्र कान्त त्यागी

“बाऊजी, आप की गाड़ी शाम चार बजे स्टेशन पर पहुंचेगी। मैं आप को लेने स्टेशन पर आ जाऊंगा।” रितेश ने गाँव से उसके पास शहर आ रहे अपने पिताजी से फोन पर कहा। “क्यूँ, तुम्हारी ड्यूटी नहीं होगी क्या उस दिन। इतनी दूर ऑफिस से सिर्फ मुझे घर तक छोड़ने आओगे।” “जी हाँ। मैं … … Read more

“ब्लड इज़ ऑलवेज थिकर दैन वॉटर ” – मीनू झा 

यूं तो इस त्योहार में बहन रक्षा का वचन मांगती है और भाई निभाने का वादा देता है,पर प्रिया आज मैं तुमसे कुछ मांगता हूं और वादा कर जो मांगूंगा देगी-प्रिंस अपनी बहन से बोला जो राखी की थाल लिए खड़ी थी। मैं कुछ समझी नहीं प्रिंस-प्रिया ऊहापोह में दिखी इन पेपर्स पर अपना पीकू … Read more

अपने हैं तो सपने हैं” –  सुधा जैन

अरे मम्मी ,क्या हुआ? आप तो रो रही हैं, क्या फिर कोई दिल दुखाने वाली मूवी देख ली ? बेटे शुभम ने देखा ,मम्मी एक शार्ट मूवी देख रही है जिसमें बेटा अपनी मां को एयरपोर्ट पर छोड़कर विदेश चला जाता है ,और मां अपना सब कुछ खोकर रो रही है। यह देख कर शुभम … Read more

बहू तेरे दर्द में हम तेरे साथ है! – ज्योति आहूजा

 रुचि बहुत ही चुलबुली और सदा हंसने वाली लड़की थी। जब वह संदीप की जिंदगी में आई तो उसने संदीप की जिंदगी को खुशियों से भर दिया था। रुचि और संदीप की शादी को ढाई वर्ष बीत चुके थे। संदीप अपनी नौकरी के चलते अपने मां  बाप से दूर अलग शहर में रहता था। एक … Read more

छन्नी – नीलम सौरभ

“माही को तो कुछ दिन पहले लड़के वाले देखने आये थे न रमा भाभी! …क्या हुआ फिर? ऋचा बता रही थी, बहुत बढ़िया घर-वर मिल रहा है अपनी माही को!” जया दूर के रिश्ते में रमा की ननद लगती थीं, शॉपिंग बैग से लदी-फँदी लौट रही थीं, थोड़ा सुस्ताने को उनके पास रुकीं तो बातों … Read more

error: Content is protected !!