मर्यादा – कल्पना मिश्रा

“बहुओं को हमेशा मर्यादा में रहना चाहिए। ज़्यादा छूट देने पर वह और ज़्यादा फायदा उठाती हैं।” ऐसा मेरी सासू माँ का कहना था। वह पुरानी पीढ़ी की सोच थी,और ग्रामीण परिवेश से भी थीं ,इसी कारण मैं हमेशा साड़ी में लिपटी,पल्लू लिये रहती थी और सूट तक पहनने के लिए तरस गई। लेकिन मैं … Read more

सवालों का घेरा – पुष्पा जोशी

हमेशा, बहू को मर्यादा में रहने की शिक्षा देने वाली, जानकी देवी को, आज उनकी बहू केतकी ने सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया था। जहाँ प्रश्न और उनके उत्तर देने वाली वे स्वयं थी और निर्णायक भी वे ही थी। केतकी पढ़ी-लिखी,सुसंस्कारी बहू थी।माँ ने उसे हमेशा मर्यादा में रहने की शिक्षा दी … Read more

” पहल” – अनिता गुप्ता

क्या इसी दिन के लिए तुम्हें इतना पढ़ाया लिखाया था।” सासु मां ने अपनी बहु रुचिका से कहा। ” लेकिन मां! ” रुचिका ने कहना चाहा। ” लेकिन वेकिन कुछ नहीं। मैं चाहती हूं तुम अन्याय के खिलाफ आवाज उठाओ।इसलिए ही तो तुमको एलएलबी करने के लिए प्रेरित किया था। जिससे तुम बेकसूर पीड़ित महिलाओं … Read more

जुगल – अंकित चहल ‘विशेष’

सुपरमैन शक्तिमान कृष ये रुपहले पर्दे के हीरों देखने में बड़े आकर्षक और बढ़िया लगते हैं, मगर हक़ीक़त में असली हीरो बेहद साधारण होते हैं और हमारे आसपास ही होते हैं जो चुपचाप अपना काम करते हैं । ऐसा ही हीरो हमारी इस कहानी में है। बाबा मनसुख को सांसें खींच खींच कर आ रहीं … Read more

“हर काम मर्यादा में रहकर ही अच्छा लगता है पत्नी जी” – ज्योति आहूजा

देविका। देविका” पति अमित ने अपनी पत्नी देविका को आवाज देते हुए कहा। “कहां हो ?कब से बुला रहा हूं। “आई बाबा !क्यों इतना जोर जोर से चिल्ला रहे हो?आ तो रही थी। सुबह के 10:00 बजने को हैं देविका। तुमने ना मेरा कोई नाश्ता बनाया। ना मेरा ऑफिस के लिए टिफिन तैयार किया। सुबह-सुबह … Read more

 बेगाना होते हुए भी तुमने अपना बना लिया – अर्चना कोहली “अर्चि”

“अब क्या होगा। इतनी जल्दी इतने सारे पैसों का इंतजाम कैसे होगा। जिन भाइयों पर भरोसा था, उन्होंने ही कन्नी काट ली। माता-पिता के जाने के बाद जिन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया। हर खुशी उन पर न्योछावर कर दी। आज मेरा व्यापार मंदा होने पर लगता है, जायदाद के साथ दिलों का भी शायद … Read more

मर्यादा का उल्लंघन वो नहीं हम कर रहे ! – मीनू झा 

“वे एक दूसरे की जरूरतें पूरी करने का जरिया बन गए थे. ये बात हमें बीसियों लोगों ने फोन पर कहा, वो कहते कॉलोनी का हर इंसान उनके ही बारे में बातें कर रहा है तो बताइए सुधाकर अंकल, भला हम कैसे कान में तेल देकर सोए रहते.” तो उसमें गलत क्या था बेटे..जबसे नेपाली … Read more

औरत की इज़्ज़त करना सीखें – के कामेश्वरी 

गुंजन और रजनी दोनों पड़ोसी थी । एक ही स्कूल में पढ़तीं थीं । वे दोनों सिर्फ़ सोने के लिए ही घर जाती थीं वरना दो जिस्म एक जान के समान एक साथ ही दिखाई देतीं थीं । दोनों ने गाँव में जो स्कूल है वहाँ की पढ़ाई पूरी की थी । अब उन्हें शहर … Read more

ढोये हुए रिश्ते – कल्पना मिश्रा

कचहरी से आकर लॉन में ही पड़ी कुर्सी पर आँख मूंदकर बैठ गईं वो। अतीत की जिन बातों को अपने दिलोदिमाग़ से हटा देना चाहती ,उन्हें वही बातें बार-बार याद आ रही थीं। मात्र उन्नीस साल की ही तो हुई थी वह, जब बाबा की ज़िद की वजह से पढ़ाई बीच में ही छुड़वाकर ब्याह … Read more

आधुनिकता के नाम पर अपनी मर्यादा ना भूले— राशि रस्तोगी 

आज सुबह नीताजी जब मॉर्निंग वाक पर गयी, तो उन्हें उनके बेटे का दोस्त राहुल मिला | रोहन और राहुल दोनों मित्र पुणे में जॉब करते थे और साथ फ्लैट में रहते थे | “अरे, तू कब आया राहुल पुणे से? रोहन को भी ले आता अपने साथ ” यूँ हसते हुए उन्होंने राहुल से … Read more

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