घर को दोनों की ही जरूरत है!!! – मधू वशिष्ठ 

मम्मी रीना ने आज फिर बिना नहाए ही रसोई में गैस जलाई है। बिना भगवान का भोग लगाए कुछ भी खा लेती है। आप तो उसे कुछ नहीं कहती जो मर्जी पहनती है। जब से रीना और पवन हैदराबाद से आए हैं तब से भावना जी दोनों बहुओं के बीच रेफरी की ही भूमिका निभा … Read more

मुझसे भी ढंग से बात न करती है – चाँदनी झा 

निहारिका, यदि तुम्हारी शिकायत सबसे है तो सबको भी तुमसे शिकायत है। ऐसे हमेशा अपनी किस्मत को कोसना, और जो किस्मत ने दिया, उसके लिए कभी खुश रहती हो तुम? आखिर क्या नहीं है तुम्हारे पास। माता-पिता, मायके में भाई, भतीजा, ससुराल में भरा परिवार, खुद भी दो प्यारे प्यारे बच्चे, इतना कमाता है मनीष(पति), … Read more

बाज़ारू औरत –  गीतू महाजन

बिस्तर पर औंधे मुंह लेटी नीला के कानों में अभी भी पड़ोसन मालती के शब्द गूंज रहे थे।अभी कुछ देर पहले ही वह उसकी छोटी बेटी दिया के साथ बात कर रही थी कि मालती ने आकर दिया को डांट कर कहा,” तू इस बाज़ारू औरत के साथ क्या कर रही है” और उसे घसीटते … Read more

आप भूल गई है कि आपकी बहू मां भी है –  किरण विश्वकर्मा 

आज सुबह से ही नंदिनी को उसका दो साल का बेटा पार्थ परेशान कर रहा था वह उसे कोई भी काम नही करने दे रहा था और न ही किसी के पास जा रहा था। यह देखकर पति नीरज ने कहा…..” कि तुम पार्थ को संभालो मैं दोपहर में खाना खाने आ जाऊंगा।” नंदिनी ने … Read more

जेठानी जी आप तो यशोदा मैया बन गई!! – चेतना अग्रवाल

“सिर्फ जन्म देने से कोई माँ नहीं बन जाता। माँ बनने के लिए दिल में मातृत्व का एहसास होना जरूरी है…. जो तुम्हारे अंदर बिल्कुल नहीं है।” समीर गुस्से से चिल्ला रहा था। “क्या कमी कर दी मैंने अपने मातृत्व में… क्या नहीं मिल रहा रूही को… समय से खाना, दूध… पढ़ाने के लिए टीचर … Read more

रुठी हुई लक्ष्मी वापस आ रही है…. भाविनी केतन उपाध्याय  

रिया अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी और आज वो अपने किए पर पछता रही है.… अब उसे आदित्य के बगैर जीना जैसे जन बिन मछली ऐसा प्रतीत होता था तो उसने बिना वक्त गंवाए और बिना किसी की बात में आकर बिना सोचे समझे उसने अपनी ग़लती सुधारने के लिए आदित्य को फोन लगाया। … Read more

तिरस्कृत कौन – ऋतु अग्रवाल 

   “रोज रोज एक ही बात! थक गया हूँ तुम्हारी बकवास सुनकर। तुम समझती क्यों नहीं? जितनी मेरी आमदनी है उतना ही तो खर्च करने के लिए दे सकता हूँ। तुम्हें मेरी आमदनी के हिसाब से ही खर्च करना चाहिए।” रोज रोज की किचकिच से अभिषेक परेशान हो चुका था।        “अभिषेक! तुम्हारा तो रोज का रोना … Read more

तिरस्कार का तिरस्कार – सुभद्रा प्रसाद 

सूर्यास्त का समय था |श्याम लाल पुल पर खड़े डूबते सूरज को एकटक देख रहे थे |पुल पर सन्नाटा था |शीतल हवा बह रही थी |श्याम लाल को  अच्छा लग रहा था | वे शांत और स्थिर खड़े थे, पर उनका मन तेजी से अतीत की ओर दौड़ रहा था आज उनकी पत्नी का जन्म … Read more

फूल जैसी लड़की(HEIDI) -लेखिका -योहन्ना स्पायरी-(रूपान्तर =देवेंद्र कुमार)

एक थी लड़की सुन्दर सलोनी लेकिन अनाथ। उसके पिता एक दुर्घटना में मारे गए इसी दुःख  में माँ भी चली गई। नन्ही हाइडी को उसकी मौसी ने पाला था।वह स्विट्ज़रलैंड के एक गांव में रहती थी, तभी एक समस्या आ गई। हाइडी की मौसी को शहर में नौकरी मिल गई।वह हाइडी को अपने साथ नहीं … Read more

हूँ तो मैं भी पिता ही ना!! कोई पत्थर तो नहीं…. – चेतना अग्रवाल

वह उसके कलेजे का टुकड़ा थी… ये बात आज तक कोई ना जान सका। आज जब सुबह रेवती जी सौरभ जी के लिए चाय लेकर कमरे में पहुँची तो देखा वो उसकी तस्वीर हाथों में लेकर फूट-फूटकर रो रहे थे, उन्हें रोता देख रेवती जी की आँखों में भी आँसू आ गये। वो तस्वीर वाली … Read more

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