अब और नहीं – निभा राजीव “निर्वी”

नवविवाहिता कनक अपने पति सुबीर के साथ ससुराल की देहरी पर गृह प्रवेश के लिए खड़ी थी। चावल से भरे हुए कलश को पाँव से गिरा उसने अंदर प्रवेश किया। उसकी सासु मां रमा देवी पूरे विधि विधान के साथ उसे अंदर ले गईं। विधि-विधानों के दौरान उनके द्वारा दिए जा रहे निर्देशों के ढंग … Read more

भाभी, आप अपना वक्त भूल गईं क्या?? – सविता गोयल 

 ” बेटा, देख ले तेरी बीवी को…. कितनी जुबान चलाती है मेरे सामने। ,, मोहित के घर में घुसते ही उसकी मां संयुक्ता जी रोनी सूरत बनाकर मोहित से बोलीं। सास की बात सुनकर मोहित की पत्नी मिताली भी चुप नहीं रह सकी और बोल पड़ी ,। ” हां हां…. इन्हें सिर्फ मेरा बोलना नजर … Read more

क्या इसी दिन के लिए तुम्हें पढ़ाया लिखाया? – कुमुद मोहन 

“देखो बेटा। मैं अब अगले महीने रिटायर होने वाला हूँ। बहुत दिनों से अम्मा के मोतियाबिंद का आपरेशन टाल रहा था कि ऑफिस से छुट्टी पाऊंगा तो आराम से करा दूंगा। हमारा खर्च तो मेरी पेंशन में जैसे तैसे हो जाएगा। मैं ये चाहता हूँ कि तुम भी अब घर के खर्चे में थोड़ा भार … Read more

माँ आपका भाभी के प्रति बर्ताव सही नहीं है!!! –  मनीषा भरतीया

अरे सुनीता बहु बाजार जा रही हो??जी मम्मी जी! सुन बेटा मेरी बीपी और शुगर की गोलियां भी खत्म हो गई है वो भी ले आना …. और सुन दवाइयों पर डेट अच्छी तरह देख लेना यह दुकानदार मुये पुराने डेट की दवाइयां दे देते है…. ठीक है….मम्मी जी तो अब मैं चलूं… अरे सुन … Read more

वो रुका हुआ फैसला – Family Story In Hindi

     “सुन कल कॉलेज मत जाना।लड़के के माता -पिता कल तुझे देखने आ रहे। “लड़के “.. क्या कह रही हो माँ, अभी तो मेरी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई। नहीं करनी मुझे शादी…। चुप कर पगली, रिश्ता बहुत अच्छा है, बस वो लोग तुझे पसंद कर ले, तो मै चट मंगनी पट ब्याह कर दूँ। … Read more

संपत्ति का वारिस बेटा और जिम्मेदारियों की वारिस बेटी क्यों… – संगीता त्रिपाठी

अर्पिता के पिता के असमय गुजर जाने से अर्पिता के कोमल कंधो पर घर की सारी जिम्मेदारी आ गई। असमय बड़ी हुई अर्पिता कभी बड़ी बन माँ को हौसला देती कभी छोटे भाई बहन की अभिभावक बन उनके भविष्य को सोचती। अनुकम्पा के आधार पर अर्पिता को पिता की जगह नौकरी मिल गई। सरकारी नौकरी … Read more

अब क्या रोटी भी ना खाने देंगी… – रश्मि प्रकाश

अपनी माँ को सिसकते देख रूहानी से रहा ना गया वो सोची आज जो कुछ हुआ है अपने पापा निकुंज को फ़ोन कर के बता दूँ ताकि जब वो घर आए तो पहले से जानकारी होने पर सब सामान्य कर सकें… उसने फ़ोन करके अपने पापा से आज की सारी घटना बता दी । शाम … Read more

समर्पण का ठप्पा… – स्मिता सिंह चौहान

राधिका अपनी ही तन्मयता में तेज तेज चली जा रही थी घर से काफी दूर आने के बाद उसे अपने हाथ में किसी का हाथ महसूस हुआ “पकड़ लिया  कहां भागे जा रही हो? कबसे आवाज लगाकर तुमहारे पीछे पीछे भाग रही हूँ? तुम सुन ही नहीं रही हो। ” राधिका की दोस्त बीना बोली।  … Read more

बेशर्मी नहीं शालीनता कहिए  – सोनिया कुशवाहा 

सर पर पल्लू जमाए भारी भरकम साड़ी में पंडाल के एक कोने में बैठ मैं मलाई कोफ्ते से नान का लुत्फ उठा रही थी कि तभी सामने से देवरानी आती दिखाई दी, अरे भाभी यहाँ अकेले में क्यूँ बैठी हो चलो थोड़ा चाट खाकर आते हैं! मैंने सिर उठाकर वीना को देख कर कहा ना … Read more

औरतों की जिंदगी में इतनी विवशता क्यों होती है? – नीतू सिंह

“रहने दो अनु! अगर उसे खाना नहीं खाना, तो उसकी सिफारिश करने की जरूरत नहीं।’ सुनील की एक तेज आवाज आई। अनु थोड़ा सहम गई। सुनील की बातों का टालना उसके बस में नहीं था फिर भी वह धीमे स्वर में बोली-लेकिन वो रात भर भूखे कैसे रहेंगी?” ‘रह लेगी उसे तो आदत है।’ सुनील … Read more

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