जुर्म के खिलाफ – विनोद प्रसाद

कमला मुझे पाँच-पाँच सौ के चार नोट पकड़ाते हुए बोली- “दीदी इसे बैंक में जमा कर देना।” उसके नाम मैंने बैंक में एक खाता खुलवा दिया था ताकि वह दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा कर होने वाली कमाई के कुछ पैसे पति से छुपाकर भविष्य के लिए जमा कर सके। घर में पैसे रखने पर … Read more

जनसंख्या विरोध – भगवती सक्सेना गौड़

सुजाता अस्पताल के बेड पर थी, अचानक उसने कहा, “अरे मैं यहां कैसे आयी?” तभी उसे आभास हुआ, सुकन्या बेटी उसका सिर सहला रही है, “हां, मम्मा, आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी पापा ने फ़ोन किया, तो रात को मैं आकर आपको यहां लेकर आयी। अब कैसा लग रहा है।” “ठीक है, … Read more

मेरी बहू भी बेटी से कम नहीं •••• – अमिता कुचया

 मालती जी को कोई बेटी नहीं थी। उन्हें घर की बहू बेटी जैसी ही दिखती थी।वो चाहती थी कि बहू को इतना प्यार दूं कि बेटी की कमी न रहे •••• वो हमेशा ही बहू को बेटी के नजरिए से देखती और वो हमेशा सोचती कि अगर मेरी बेटी ऐसी होती तो क्या लड़के लड़की … Read more

“क्यों हम छोटे शहर वालों को सपने देखने का हक नहीं है क्या?” – ज्योति आहूजा|

यह कहानी है छोटे से शहर की रहने वाली एक ऐसी लड़की संध्या की जिसके सपने ऊंचे आसमान में उड़ने के थे|  बहुत ऊंचा उड़ना चाहती थी वह| दबंग इतनी कि पूछो मत, जो मन में वही जुबान पर था उसके| परिवार में पिता आलोक, मां जानकी, एक बड़ी बहन सुरभि और दादी सुमित्रा देवी … Read more

* लाली का प्रतिकार* –   बालेश्वर गुप्ता

 लाली मेरी बच्ची मुझे माफ़ कर दे,बेटी तुझे सब पता तो है तुझे कैसे बी एड, करा पाया हूँ।मुझ पर अब कुछ भी नही बचा है, तेरे हाथ कैसे पीले करूँ बच्ची?एक बाप की मजबूरी समझ बेटी,बड़े सेठ का बेटा है, थोड़ी उम्र अधिक है,पर परिवार धनवान है,तू जिंदगी भर सुखी रहेगी।तेरी सुंदरता से प्रभावित … Read more

तुम्हारा किया वापिस आ रहा तो विरोध क्यो ? – संगीता अग्रवाल 

” सुनो जी हमने पिछले जनम में ऐसे क्या बुरे कर्म किए थे जो इस जनम में उसकी सजा भुगत रहे हैं !” रीता जी अपने पति देवेन्द्र जी से रोते हुए बोली। ” रीता खुद को संभालो जो होना हो वो हो कर रहता है उसके लिए खुद को यूं सजा देना कहां तक … Read more

आज और कल का विरोध!! – मीनू झा

आइने गुजरा हुआ वक्त नहीं बताया करते…पता नहीं ये अच्छी बात है या बुरी..पर ये तो पक्का है कि आइना अगर अतीत को सहेजता रहता तो अपना विविधताओं से भरा रूप भले ही नजर आता, पर अपने ही अलग अलग उन अवतारों में उलझकर इंसान ये निश्चय ही नहीं कर पाता कि उसका असली चेहरा … Read more

आईना ! – किरण केशरे 

डाकतराईन ने क्या बोला ? लल्ला !  घर में घुसते ही अम्मा ने घेर लिया था भैरव को ! कुछ नही, लड़की है,, भैरव का उखड़ा हुआ स्वर सुनकर अम्मा बिफर ही पड़ी थी,,,, “कब से आस लगाकर बैठी थी अब दूसरी बार तो बेटा जनेगी करमजली”  पोते की चाह ने अम्मा को विकल कर … Read more

आखिरी आवाज़ – कंचन श्रीवास्तव 

की बोड पर हर वक्त थिरकती हुई उंगलियां अचानक शांत हो गई है ऐसा लगता है जैसे पोर पोर दुखता है पास होते हुए भी बेगाने सा पड़ा रहता है। आज पूरे दो महीने हो गए समीर को गए, पर ऐसा लगता है जैसे कल ही की बात है । हां कल ही कि बात … Read more

बर्दाश्त की हद – सुनीता मिश्रा

“कलुआ,पानी दे ।” “कल्लू मेरी चुनौटी तो ला दे।” “मास्टर जी,बुला रहे काले राम तेरे को।” कल्लू,कलुआ,कालेराम सब उसे इसी नाम से बुलाते।वैसे रंग ही उसका झक काला तो नहीं हाँ थोड़ा दबा जरूर था। छबि सुंदर थी।माँ पर गया था,बस रंग छोड़ कर।।संयुक्त परिवार मे बड़ी बहू जानकी(उसकी मां)दो देवर,उनकी पत्नियाँ,सास थी।सम्पन्न घर।सुघड़ जानकी … Read more

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