बुआ जी,मेरे पिता ने मुझे दौलत नहीं संस्कार देकर विदा किया है – गीतू महाजन

भैया बहुत ही अच्छा रिश्ता है.. अच्छे खाते पीते लोग हैं और लड़के की एक ही छोटी बहन है..छोटा सा परिवार है। माता-पिता भी बहुत अच्छे स्वभाव के हैं और क्या चाहिए” सुहासिनी बुआ की आवाज़ सुन कॉलेज से वापिस आई दिशा के पांव ठिठक गए।मां से पूछने पर पता चला कि सुहासिनी बुआ उसके … Read more

“नई सोच” – कविता भड़ाना

अरे रोहन बेटा, आज भी तुम ही  सब्जी ले रहे हो? “जी आंटी, मम्मी को तीन दिन से बुखार और कमजोरी भी है बहुत, तो में ही सब्जी लेने आया हूं। पर बेटा तुम स्कूल भी नही जा रहे हो दो दिन से, पियूष (पड़ोसन का बेटा) ने बताया था मुझे…. जी दरअसल पापा कुछ … Read more

धरा जैसी बेटी – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

धरा और मेघा दोनो का ग्रेजुएशन का प्रथम वर्ष था , दोनो ही होनहार छात्रा थी परन्तु दोनो के आचार विचार मे जमीन आसमान का अन्तर था। धरा सभ्य सुशील सुलझी आधुनिक सोच की मर्यादा और संस्कारों मे बॅ॑धकर रहने वाली लड़की थी । धरा के पहनावे मे भी स्मार्टनेस के साथ साथ शालीनता थी,वह … Read more

नई संस्कृति- डेटिंग – कमलेश राणा

क्या बात है विनीत ,,ओये होये कहाँ जा रहा है ऐसे सज संवर के,, परफ्यूम भी बड़ा ही महक रहा है। अरे कहीं नहीं आंटी एक दोस्त से मिलने जा रहा हूँ , मुस्कुराते हुए विनीत बोला। हमें तो भई यह स्पेशल सजधज देखकर कुछ अलग सी फीलिंग आ रही है। आंटी आप तो अब … Read more

नाम लेने से इज्ज़त नहीं घटती…!  – मीनू झा

क्या बताऊं विमला..तू तो मेरा स्वभाव जानती है ना मैं शुरू से बहुत मीन मेख निकालने वाली नहीं रही हूं…जो खाना है खाओ जो पहनना हो पहनो जैसे रहना हो रहो जहां जाना आना है जाओ आओ…तुम तो देखती हो ना…बड़ी बहू के समय से ही हां सविता भाभी…बड़ी किस्मत वाली है तुम्हारी बहुएं सच … Read more

सही राह – लतिका श्रीवास्तव

वृद्धाश्रम के दरवाजे पर ही पिता रमानाथ जी को उतार कर राजन चलने लगा तो वृद्ध अशक्त पिता ने कोई शिकायत नहीं की बस आंसू भरी आंखों और रुंधे गले से हमेशा की तरह सदा खुश रहो बेटा का आशीष जरूर दिया जिसे सुनने के लिए बेटा राजन रुका ही नहीं….तुरंत कार स्टार्ट करके घर … Read more

मां हो बच्चों की ढाल बनो उन्हें कमजोर मत करो। – संगीता अग्रवाल 

” मम्मी देखो मेरे चोट लग गई !” पांच साल का आरव पार्क में खेलते हुए गिरने पर रोता हुआ वही बैठी अपनी मम्मी के पास आया। ” ओह माई गॉड इतनी चोट चलो जल्दी घर डेटॉल से साफ करके पट्टी कर दूंगी !” आरव की मम्मी स्वाति उसकी चोट को देख बोली उसके ऐसा … Read more

बहू ने बेटे को घर से निकाल दिया –  पूजा अरोरा

आज वृंदा जब आँगन में बैठी धूप सेंक रही थी तो पास बैठे उसके पोते-पोती गली के दूसरे बच्चों के साथ घर-घर खेल रहे थे कि अचानक उसके पोते अंश की आवाज कानों में पड़ी, “हमारे घर कोई शराब नहीं पीता, य़ह बुरी बात है | हैं ना दादी!” मुस्कराकर वृंदा ने स्वीकृति में गर्दन … Read more

ऐसी बहु हो तो बेटी की क्या जरूरत – कुमुद मोहन 

“बेटा क्या थोड़ा टाइम निकाल कर मुझे एक जगह ड्राॅप कर दोगी?” नीरा ने अपनी बहू सुमी से पूछा? “क्यूँ नहीं मम्मा,कब कहाँ जाना है बताईये?” सुमी ने बड़े प्यार से कहा। “असल में जब हम कानपुर में थे,हमारे पड़ोसी शर्मा जी से हमारी अच्छी दोस्ती थी,उनकी वाइफ़ का मायका यहाँ है,लंबा अरसा हो गया … Read more

अपाहिज कौन है – संगीता त्रिपाठी

“ये क्या अनर्थ कर दिया तुमने।” सुमन जोर से चिल्लाई। तुझे क्या लड़कियों की अकाल पड़ी थी जो एक पैर ख़राब वाली लड़की से कोर्ट- मैरिज कर ली। “नहीं माँ!!मैंने कोई अनर्थ नहीं किया एक दिन आप भी महसूस करोगी “सोहम ने सुमन को समझाते हुई कहा। “मेरे बेटे को फंसा कर तुम्हे चैन मिल … Read more

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