‘ सर्दी का मौसम और बुनाई ‘ – -विभा गुप्ता
कड़कती सर्दी में ठिठुरते हुए अचानक मुझे वो दिन याद आ गये, जब बुनाई हर घर का अपना एक निजी व्यवसाय हुआ करता था।व्यवसाय इसलिए क्योंकि गृहिणियाँ ननद-देवरों के साथ-साथ चचेरे-ममेरे भाई-भतीजों और भतीजियों के लिए भी स्वेटर बनाने का अपना पारिवारिक धर्म समझती थीं।मैं छह-सात बरस की रही होगी,जब घर में बुआजी को बुनाई … Read more