अपनी तरह मुझे भी “सहारा” बना लीजिए !! – मीनू झा 

आज भी काफी मन लगाकर काम कर रही है देखना शाम तक जरूर फिर पांच सौ रूपये की डिमांड आ जाएगी। मैं तो तंग आ गई इनको काम के लिए रखकर दिमाग खराब कर देती है हर आठवें दिन–पति मोहन के लिए ब्रेकफास्ट प्लेट में लगाते लगाते मीरा बड़बड़ाए जा रही थी। अच्छा.. लगता है … Read more

एक दूसरे का सहारा –   मुकुन्द लाल 

शाम के समय रजनी पार्क में अपनी बच्ची पुष्पा के साथ बेंच पर खोई-खोई सी बैठी हुई सोच रही थी कि एक स्त्री के जीवन में ऐसा भूचाल भी आ सकता है? उसने ऐसा कभी सोचा ही नहीं था कि उसका सुगंधित और हर्ष से सराबोर दाम्पत्य जीवन एक झटके में ही ध्वस्त हो जाएगा … Read more

“एक दूजे के सहारे रिश्ते प्यार भरे” – कविता भड़ाना

“प्रिया”, “प्रिया”…. बेटा कहां हो? पुकारती हुई सुलभा जी ने देखा की उनकी नई नवेली बहुरानी ड्राइंग रूम में बैठी ऊंघ रही है….. दिसंबर महीने की कड़कड़ाती ठंड में 5बजे उठ कर नहा धोकर तैयार बैठी अपनी बहु को देख सुलभा जी को बड़ा प्यार आ रहा था, उन्होंने धीरे से जाकर प्रिया को जगाया … Read more

अमूल्य सहारा – शुभ्रा बैनर्जी 

आज प्राची को दादा -दादी के आशीर्वाद की महिमा ज्ञात हुई।दोनों हांथ जोड़कर आसमान की ओर देखकर दिल से प्रणाम किया उसने दोनों को।बचपन से ही बहुत लाड़ली थी वो दोनों की।दादाजी की गोद में टंगकर कहां – कहां नहीं घूमी थी।चलना सीख जाने पर दादाजी की उंगली पकड़ कर हर जगह जाती थी वो,चाहे … Read more

बुरे वक्त में जब हमसफ़र का ही सहारा ना हो – सुल्ताना खातून

बात लगभग 13 महिने पुरानी है…. मेरी बेटी हाॅस्पिटलाइड थी (जो बेटी अब नहीं रही, वह जन्मजात हृदय रोगी थी)मैं और मेरे हसबैंड बहुत परेशान थे… बेटी उस समय 5  महीने की थी… उसके नाक… मुहँ…मे नल्कियां हाथो मे सुईयां…लगी थीं,मेरी बच्ची तकलीफ के इंतेहा पर थी… देखकर हमारा कलेजा फटता…हम जहनी और जिस्मानी तकलीफ़ … Read more

सहारे की बैसाखी – मंजू तिवारी

मम्मी ये ऐसे वैसे कपड़े नहीं पहनते हैं इनको तो ब्रांडेड कपड़े चाहिए मम्मी पापा भी बड़े खुश होकर अपनी बेटी के कहे अनुसार दमाद को बेटी को और उसके बच्चों को अच्छे अच्छे कपड़े दिलाते कभी पैसे देते बेटी जब भी आती एक गाड़ी भर कर सामान के साथ उसकी विदा की जाती,,, बेटी … Read more

एक दूसरे का सहारा…… – अनु अग्रवाल

वाह! दीनदयाल…पूरी कॉलोनी में तेरे परिवार के ही चर्चे रहते हैं….तीनों बहुओं पर तेरा पूरा नियंत्रण है…….आजकल कहाँ देखने को मिलते हैं संयुक्त परिवार…..बच्चे अपनी मनमामी करते हैं और हम बुड्ढे बुढ़ियों को पुराने फर्नीचर की तरह घर में पटक दिया जाता है……आज्ञा लेना तो दूर की बात….. बच्चे बताना भी जरूरी नहीं समझते लेकिन … Read more

हीटर –  उषा भारद्वाज

 हाड़ कंपाती हुई ठंड ,चाहे कितने भी गर्म कपड़े पहन लो लेकिन ठंड दूर नही हो रही थी।  मोहन को आज  फिर से लौटने में देर हो गई। जैसे ही वह घर के अंदर पहुंचा मां की आवाज सुनाई पड़ी- आ गया बेटा। ” हां मां”- मोहन के शब्दों में लाचारी और मजबूरी पूरी तरह … Read more

“बाबा,आपको बेसहारा कैसे कर दूं!” – अमिता कुचया

रजनी आज सुबह ही बाबा के कमरे में झाड़ू लगा रही थी ।तभी उसने देखा कि बाबा के चश्मे से ग्लासेस टूट चुके हैं।तब उसने सोचा, चलो जब बाबा उठेंगे ,तब उनसे बात करुंगी और वह दूसरे काम में लग गई। बाबा को डर था कहीं रजनी बहू को पता न चल जाए कि चश्मे … Read more

बस!माँ आपसे ही सीखा है। – ममता गुप्ता

“दीपू को उसकी नानी जाते वक्त चीज खाने के लिए पैसे देकर गई थी,उन्ही पैसो को दीपू अपनी गुल्लक में डाल रहा था तो उस वक़्त राधा वहाँ आई औऱ दीपू की गुल्लक देख कर कहने लगी-“”अरे मैं भी तो देखूं मेरे दीपू ने अपनी गुल्लक में कितने पैसे जोड़ रखे है। राधा अपने बेटे … Read more

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