चिड़िया उड़ जायेगी – डा. मधु आंधीवाल

दादी ने अपनी लाडली पोती से कहा — देखो मानसी अब तुम्हारा सम्बन्ध पक्का होगया । रोका हो गया । एक बात गांठ बांध लो बेटा ससुराल की बड़ी बहू बन कर जा रही हो । सम्बन्धों को एक जगह बांध कर रखना तुम्हारी परीक्षा है। मानसी– दादी आपने मुझे जो संस्कार दिये हैं आपको … Read more

बेटीयांँ  होती है बड़ी प्यारी, है ना ! ( भाग -2) – बेला पुनि वाला

ये तो पता नहीं, मुझे जाना था कहा ?        मगर मैं चल पड़ी थी कहीं दूर,       मंजिल का पता नहीं था, मगर कदम थे,         कि रुके ही नहीं।        मन में लिए एक ही सवाल, आखिर मेरी गलती क्या थी ? और  क्या सच में आज तक मैंने अपनी बेटी के लिए कुछ भी नहीं किया … Read more

मां ही मेरा परिवार है – गीता वाधवानी 

एक बड़े से शहर के छोटे से पार्क में विनय बैठा था। तभी उसका मोबाइल बजा, उसने देखा कि उसके दोस्त देव का फोन है।  देव-“विनय, क्या मैं 2 दिन के लिए तेरे साथ तेरे कमरे में रहने आ जाऊं? मुझे पूरी आशा है कि 2 दिन में मेरे अपने कमरे का इंतजाम हो जाएगा।”  … Read more

चार लोग…..? – मंजू तिवारी

चार लोग यह बड़े ही महत्वपूर्ण होते हैं। हर किसी के लिए लेकिन आज तक इन चार लोगों का नाम नहीं पता चल सका है ।लेकिन एक बात पक्की है। इन चार लोगों की,,, यह हर जगह मौजूद होते हैं। और सभी को इन चार लोगों का डर हमेशा सताता रहता है। परंतु एक स्त्री … Read more

तेरी मेरी प्रेम कहानी – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज बहुत दिनों बाद श्रेया को घर और ऑफिस के काम से छुट्टी मिली थी,बच्चे भी बड़े हो गए थे वो भी सुबह स्कूल के लिए निकलकर फिर अपनी खेल और गायन की कक्षा करके शाम तक ही आने वाले थे।पति भी ऑफिस के कार्य से बाहर चार पांच दिन के लिए विदेश गए हुए … Read more

शक की सुई  –  रश्मि प्रकाश

“ यार तुम अपना सामान क्यों पैक कर रही हो बताओ तो सही हुआ क्या है…. हमने एक दूसरे से वादा किया था ना हम हमेशा एक दूसरेसे सब शेयर करेंगे फिर अचानक आज तुम्हें क्या हो गया……राशि क्या बात है तुम क्यों ऐसे व्यवहार कर रही हो…. यार कुछ तोबोलो…..मेरी गलती तो बताओ……मैंने ऐसा … Read more

क्या हम तुम्हारे परिवार नहीं..? – रोनिता कुंडू

मम्मी जी..! सोच रही थी, इस गर्मी की छुट्टियों में मायके होकर आऊं… काफी समय हो गया है, अपने परिवार से मिले हुए..   राधा ने अपनी सासू मां कावेरी जी से कहा….  कावेरी जी:   पर उस वक्त तो अरुणा आएगी… तुम्हें तो पता ही है, पूरे साल में वह एक ही बार आती है… … Read more

औरत क्या नहीं कर सकती – मीनाक्षी सिंह

ये क्या मोहिनी ,तुम मेरी ये विस्की की बोतल क्यूँ लेकर बैठी हो ?? पागल हो गयी हो क्या ?? ये क्या हाल बना रखा हैँ ,नमकीन ,सोडा ,पानी लेकर ऐसे आराम से बैठी हो,जैसे कोई काम ही ना हो ! विनित आग बबूला होते हुए बोला ! यार विनित ,तुम तो रोज लेकर बैठते … Read more

माँ सब देखती हैं – विभा गुप्ता

अंधेरा गहरा रहा था।मंत्री जी ने टेबल पर रखी गिलास में शराब की अंतिम बूँद को भी गटक लिया और आवाज़ लगाई, ” अबे हरिया, कहाँ मर गया है?” ” जी मालिक …” ” हममम… मेरा सामान कहाँ है?” ” मालिक, आपहीं के कमरे में तो रख..” ” ठीक है.. ठीक है.., और सुन.. कोई … Read more

” अपना अपना स्वार्थ ” – डॉ. सुनील शर्मा

रिदिमा ने जब मां को उसके साथ ही ऑफिस में कार्यरत संकेत का विवाह का प्रस्ताव बताया तो एक बार तो मां पशोपेश में पड़ गईं. किसी तरह अपने आप को संभाला. रिदिमा और उसके दोनों बहन भाई बहुत छोटे थे जब पति की एक सड़क दुर्घटना में म‌त्यु हो गई थी. कंपनी ने उनके … Read more

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