ऐसे होते हैँ ससुर जी – मीनाक्षी सिंह

अंकित ,क्यूँ आ रहे हैँ पापाजी (ससुर जी) गांव से ! तुम्हे पता हैँ हम दोनों वर्किंग हैँ ! शुभी (बेटी ) भी सुबह स्कूल चली जाती हैं ! पूरा दिन घर साफ सुथरा पड़ा रहता हैँ ! पापाजी को हमेशा बलगम रहता हैँ ! पूरे दिन खांसते और थूकते रहते  हैँ ! और तो … Read more

पैसे की ताकत – रीटा मक्कड़

सुनीता के घर के  वेहड़े में  पीछे की तरफ एक सर्वेंट क्वार्टर था।जिसमे एक जोड़ा रहता था उनको देख कर लगता था कि उनकी शादी को अभी डेढ़ दो साल से ज्यादा नही हुए थे।वो लड़की जिसका नाम मीना था ,वो वैसे तो किसी कोठी में काम करती थी लेकिन कोविड की वजह से उसका … Read more

कुछ कहते रहिए – लतिका श्रीवास्तव 

हेलो बेटा हेलो….शैलजा जी मोबाइल पर कहती जा रही थीं….पर शायद उधर से कोई उनकी बात सुनकर भी अनसुना करता जा रहा था….मनोहर जी के गुस्से का  पारा बढ़ता जा रहा था….क्या हो गया है इसे जवाब क्यों नहीं देता हम लोगों की बात ही नही सुनता …इतना व्यस्त हो गया है वहां जाकर..!!जब से … Read more

क्यो कुछ बच्चो के पास अपने जन्मदाताओं के लिए इज़्ज़त की दो रोटी नही होती? – संगीता अग्रवाल

अपने कमरे मे गुमसुम बैठे अस्सी वर्षीय रामलाल जी बहुत कुछ सोच रहे थे। पास लेटी जीवनसंगिनी सुलोचना जो उनके सुख दुख की साथी रही थी आज लकवे के कारण बेबस पड़ी थी ।बेबस तो खुद रामलाल जी भी थे किसी बीमारी से ज्यादा अपनों से सताये हुए जो थे। अस्सी की उम्र देखभाल चाहती … Read more

जाके पाँव न फटी बिवाई – नीलम सौरभ

‘चौधरी जी का बाड़ा’…यही नाम है हमारे शहर की पुरानी बस्ती के बीच बसे उस चॉल का। ‘यू’ आकार में बनी उस तीन मंजिला रिहायशी इमारत में 36 खोलियाँ हैं अर्थात 36 परिवारों का निवास स्थान है चौधरी बाड़ा। बाड़े के मालिक अवध नारायण चौधरी परिवार सहित पॉश इलाके के अपने बड़े बंगले में रहते … Read more

ससुराल की देहरी – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज अपराजिता की बेटी अन्वी की शादी थी। बेटी की ज़िद थी कि उसकी शादी की सारी रस्में मां के हाथों ही हों इसलिए अपराजिता को उस ससुराल की देहरी को लांघ कर फिर से कुछ दिन के वापिस आना पड़ा। ये ही तो वो दहलीज़ थी जिसको आज से लगभग पंद्रह साल पहले वो … Read more

फैसला – रीटा मक्कड़

“मीरा..ये देख सासू मां के कितने सुन्दर और नए नए सूट रखे हैं..जितने चाहिए ले जा और सुन पूनम तू भी ले ले और अपनी अम्मा और बहन के लिए भी ले जाना..और सुनो तुम दोनो अगर ये स्वेटर और शॉल वगैरह भी लेने तो वो भी ले लेना..!” आज नीलम का मन बहुत ज्यादा … Read more

इधर भी क्लिीनिक है । – डा. नरेंद्र शुक्ल

पिछले कुछ दिनों से मेरे दोनों पंजों में जलन थी । मित्रों ने सलाह दी कि किसी डॉक्टर को दिखाओ वर्ना कुछ ही दिनों में चलना – फिरना मुश्किल हो जायेगा । मैं एक के पास गया । उन्होंने कहा – यूरिक एसिड हो सकता है । शूगर के भी लक्षण हैं । ब्लड टैस्ट … Read more

ये इश्क़ हाये! – नीलम सौरभ

एयरपोर्ट में फ्लाइट का इंतज़ार करते हुए थोड़ा बोर हो रहा हूँ मैं। साथ वाले सभी उन दो नन्हें खिलौनों से खेलते आपस में इतने मशगूल हैं, कि किसी का भी ध्यान मेरी तरफ नहीं है अब। चलिए, बोरियत दूर करने के लिए मैं चितरंजन आप सबको एक कहानी सुनाता हूँ। ये कहानी तब शुरू … Read more

“रिश्तों की तुरपाई” – शुभ्रा बैनर्जी

मालिनी की बेटी  बचपन मेंअक्सर सिलाई मशीन देखकर उससे पूछती” मां,दादी को इतनी अच्छी सिलाई आती है,पर तुमसे क्यों नहीं बनता कुछ?दादी ने कभी सिखाया नहीं तुमको?”मालिनी हंसकर ज़वाब देती”मैंने पहले ही बता दिया था तेरी दादी को,कि मुझे सिलाई करने का बिल्कुल भी शौक नहीं।” बोलने को तो उसने बोल दिया था पर उसे … Read more

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