बचपन की गलियां—कहानी—देवेन्द्र कुमार

तीनों सखियाँ—रचना,जया और रंजना सोसाइटी के पार्क में बैठीं धूप का आनन्द ले रही थीं। छुट्टी का दिन, सर्दियों का मौसम—बच्चे घास पर उछल- कूद करते हुए खिलखिला रहे थे। हिरणों की तरह दौड़ते बच्चों को देख कर तीनों मुस्करा उठीं। रचना ने कहा—‘ इन खिलंदड बच्चों को देख कर अपना बचपन याद आ जाता … Read more

 हर बच्चा खास है – संगीता अग्रवाल  

” मम्मी मारा…मम्मी मारा..!” बारह वर्षीय चिराग बाहर से रोता हुआ आया। ” ओह मेरा बच्चा किसने मारा!” चिराग की मां मीनू उसे प्यार करते हुए बोली। ” छोटू मारा ..छोटू मारा।” चिराग सुबकते हुए बोला और मां की गोद में लेट गया। मीनू उसे प्यार से सहलाने लगी थोड़ी देर में चिराग सो गया … Read more

ये अन्याय न होने दूंगी…. – संगीता त्रिपाठी

“सुनो जी, टप्पू और अन्नू अब बड़े हो गये, मै सोच रही थी मै एक बुटीक खोल लेती हूँ घर में, कुछ आय भी हो जायेगा और समय भी कट जायेगा, “रूचि ने पति विकास को चाय का कप पकड़ाते कहा।     वक्र मुस्कान से रूचि को देखते विकास बोले “तुम और बुटीक….तुम्हारी किट्टी पार्टी, सहेलियां … Read more

नही अब और नही – किरन विश्वकर्मा

कुछ फैसले अचानक ही लिए जाते हैं…. और वह फैसला मैं ले चुकी हूं…. बस अब मैं बेवकूफ नहीं बनूंगी ना ही अपने बच्चों को छोड़कर किसी की तीमारदारी करने जाऊंगी अगर तुम्हारे घर में सिर्फ मेरा काम सबकी मदद करना और बातें सुनना है तो अब मुझसे यह सब और नहीं हो पाएगा…. हां … Read more

सुरभि

सुरभि एक सांवली लड़की थी. लेकिन वह सांवली होने के बाद भी बहुत होनहार और काबिल थी. वह हर क्षेत्र मैं खुद को औरों से बेहतर साबित करती थी. लेकिन फिर भी उसके परिवार में उसके पिता एक सांवली लड़की होने की वजह से उसे आते जाते ताना मारते थे. लेकिन सुरभि उसके पिता की … Read more

अच्छे दिन का कोइछा – कंचन श्रीवास्तव आरजू

  अभी कल ही तो तेरहवीं बीती है और आज …..ही हिस्सा बांट की बात वो भी सुजाता के मुंह से ,कुछ अच्छा तो नहीं लगा कमल को फिर भी कर ही क्या सकता है ,भाई अब तो कोर्ट ने भी आडर दे दिया है कि बाप की दम्पत्ति में बेटा और बेटी का बराबर … Read more

अन्याय –  रश्मि सिंह 

ज्योति- हे ! भगवान आज मेरे समीक्षा अधिकारी की परीक्षा का परिणाम आने वाला है, अबकी बार निराश मत होने देना, बहुत मेहनत की है। सोनू ( ज्योति का भाई)- दीदी रोल नंबर बताओ रिजल्ट आ गया है। ज्योति- सोनू, ये रहा रोल नंबर। तू ही देखना मुझे ख़ुद देखने में डर लग रहा है। … Read more

 एक मां ऐसी भी – नूतन योगेश सक्सेना

रात के घने अंधेरे और निस्तब्धता को चीरती हुई एक बच्चे के रोने की आवाज बहुत देर से आ रही थी । पर लग रहा था कि शहर में रहने वाले लोगों के कान भी दिल की तरह ही बहरे हो चुके थे, सब सुनकर भी अनसुना कर रहे थे ।                 तभी उधर से हीरा … Read more

आपके आशीर्वाद के बिना सब बेकार है….. : रश्मि प्रकाश

‘‘ये क्या अनर्थ कर दिया तुमने,  कितनी बार समझाया है तुम अपने कमरे से बाहर नहीं निकल सकती। घर में शुभ काम की तैयारी चलरही है, तुम अपना अशुभ साया लल्ला किशु पर मत पड़ने दो। अरे क्यों चाहती हो घर में जितने मेहमान आए हैं वो बातें बनाएं?‘‘ घर कीबड़ी बहू  सुचिता पावनी से … Read more

प्रश्नचिन्ह – बालेश्वर गुप्ता

  आज केवल विक्रम को ही नही बल्कि पूरे परिवार को उस समाचार का इंतजार था,जिससे पूरे परिवार में गर्वीली हर्ष की लहर दौड़ जानी थी। आखिर विक्रम का स्नातक का परिणाम आना था।मेधावी विक्रम प्रथम ना आये ऐसा तो उसका प्रतिद्वंद्वी भी नही सोच सकता था।         अपने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में वो प्रथम … Read more

error: Content is protected !!