सास भी कभी बहू थी  –  किरण केशरे

आज ऑफिस से निकलते हुए सलोनी को काफी देर हो गई थी, अचानक ही बॉस ने अतिरिक्त कार्य सौंप दिया, उन फाइलों को निपटाते रात के साढ़े सात बजने को आ गए थे, वह सोच रही थी, नमन भी घर आ गए होंगे। सास और ससुर जी की चिंता भी अलग होने लगी ! शाम … Read more

माँ – नीलिमा सिंघल 

मानसी के विवाह को 7 महिने हो चुके थे, बहुत खुशहाल ससुराल था उसका, ससुराल मे पति सास ससुर और एक  नन्द थी जिसकी शादी हो चुकी थी, सभी मानसी को बहुत प्यार करते थे,  एक दिन अचानक मानसी की तबियत खराब हुई तो उसको अस्पताल ले जाया गया जहाँ से वापस आकर सबको खुशखबरी … Read more

हमारे यहाँ भी एसी आयी हैँ  – मीनाक्षी सिंह

नीरा एक मध्यमवर्गीय परिवार की महिला ,मई का महीना ,भीषण गर्मी ! कूलर  महाराज भी टाय बोल गए ! भई और कितना साथ देते ! 10 साल से तो लगातार  निहस्वार्थ भाव से पूरे घर को ठंडी हवा दे रहे थे ! पतिदेव ने कहा – अब क्या सही करवाये यार इसे ,बहुत पैसा लग … Read more

बहू मेरा अक्स – ऋतु अग्रवाल

“सुनो! आज मैं बच्चों के पास ही सोऊँगी। राध्या को बहुत तेज बुखार है। सारा बदन तप रहा है उसका। रात को कुछ परेशानी हुई तो किससे कहेगी वह? रोमिल तो अभी बहुत छोटा है।” सुगंधा ने अश्विन की चिरौरी करते हुए कहा।           “मुझे कुछ नहीं पता। दवाई दे दी है न उसे। रात में … Read more

बहु हो तो ऐसी ” – कविता भड़ाना

“दुल्हन आ गई, दुल्हन आ गई” का शौर करते हुए बच्चे घर के अंदर भागते हुए आए, तो सुमित्रा जी ने जल्दी से पूजा की थाली तैयार करी और द्वार पर बहु का स्वागत करने आ गई, रीति रिवाजों से सारी रस्में निभाई गई और  इस तरह सुमित्रा जी भी आज बहु वाली हो गई … Read more

किरचें लहू लुहान कर गयी” – उमा वर्मा

सुबह सुबह यश और गौरी ने सुनीता के पैर छू कर प्रणाम किया तो वह गदगद हो गई ।कितनी प्यारी और सुन्दर है मेरी बहू ।कल रात को पार्टी में भी सबने यही कहा था ” कहाँ से लाये इतनी सुन्दर और प्यारी बहु? सुनीता निहाल हो गई थी ।ढेरों आशीर्वाद देते हुए चाबियों का … Read more

मैं माँ हूँ – विभा गुप्ता

 ” क्या अम्मा जी, परेश कोई बच्चे हैं जो आप उनकी राह तकती रहती हैं,आ जायेंगे।आप जाकर सो जाइये।” दीपा ने अपनी सास से कहा जो अपने बेटे के आने का इंतज़ार कर रहीं थीं।  ” बहू, बेटा कितना ही बड़ा हो जाये,माँ के लिए तो वह बच्चा ही रहता है।परेश बाहर भटकेगा तो मेरी … Read more

धर्म बेटी – डा. मधु आंधीवाल

वृद्धाश्रम का एक कमरा एक सौम्य ,शालीन वृद्ध महिला चुपचाप गीता का पाठ कर रही थी । अपनी मौन साधना में खोई हुई । देखने से लगता था बहुत सम्पन्न घर की होगी पर पता ना किन परिस्थितियों में यहाँ पहुँच गयी । लविका एक रिसर्च स्कालर थी समाज शास्त्र की । वह महिलाओं पर … Read more

मैं बहू हूं साहब….. – मंजू तिवारी

मैं बहू हूं साहब,, मेरे अधिकारों पर सदा से मेरी सासू मां का कॉपीराइट चला आ रहा है। शदियां गुजर गई मैं अभी तक अपने अधिकारों को सुरक्षित नहीं कर पाई हूं।,,, मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। मैं सदा से घर की धुरी रही हूं। लेकिन मुझे कभी महत्व नहीं दिया गया,,,, कई घरों में … Read more

पासा पलट गया  – पूनम अरोड़ा

मुम्बई  में उच्च पद पर कार्यरत विवान ने अपने लिए अपने ही ऑफिस की ही  एक लड़की अपनी जीवनसंगिनी के रूप में पसंद कर ली थी और वो भी उसे पसंद करती थी । विवान  मूल रूप से तो एक छोटे से कस्बे का ही था लेकिन यहाँ   महानगर  में  आकर यहीं  के वातारण … Read more

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