थकान – स्मिता सिंह चौहान

तुम कितनी एक्टिव हो गयी हो,दिन भर आफिस में काम करती हो,और घर आकर भी लग गयी काम पर। लेकिन थकान का नामो निशान भी नहीं।वाह यार क्या जबरदस्त चेंज आया है ,तुम में।जब तक घर में रहती थी ,तब तक तो तुम बात बात पर थक जाती थी।ये घर से बाहर निकलने की ताजगी … Read more

वक्त – बीना शुक्ला

” वक्त अच्छा हो तो सब अपने नहीं तो सब पराये।”  यह बात विशालाक्षी से अधिक इस समय कौन जान सकता है?  वक्त बीतता चला जाता है, पता ही नहीं चलता। आज दस साल बाद अपने शहर लौटकर आई है विशालाक्षी। अपनी आश्रम सखी गुंजन बहुत आग्रह करके जबरदस्ती अपनी बहन ने बेटे की शादी … Read more

फेसबुक का प्यार – संगीता अग्रवाल 

उस दिन दोनों ने एक कैफे में मिलने का फैसला किया काफी दिन से शेखर इसरार कर रहा था और दीपाली इनकार कर दी थी पर आखिरकार मान गई और दोनों का अगले दिन कैफे में मिलने का समय मुकर्रर हुआ। दीपाली और शेखर की मुलाकात फेसबुक पर हुई थी। दीपाली एक बतीस साल की … Read more

जो हम न समझ पाए वक्त ने समझा दिया”  – मोहिनी गुप्ता 

सुमित की आंखों में पश्चाताप के आंसू साफ दिखाई दे रहे थे मगर वो उन्हें जैसे रोक लेना चाहता हो। अतीत की यादों में वो खो सा गया था इसलिए तो विभा की आवाज़ भी उसे सुनाई नहीं दे रही थी। विभा सुमित की धर्मपत्नी थी। उसने पास आकर सुमित को झकझोरा,सुनिए ….कहां खो गए … Read more

वक्त किसी का एक सा नहीं रहता… – श्रद्धा खरे 

“आज मां ने  सुबह फोन पर बताया कि चाची जी नहीं रही। मेरा मन बहुत बेचैन हो उठा और चाची जी के साथ बिताए बचपन से शादी तक की सभी यादें ताजा होने लगी।और उनके हाथ के बने लड्डू मठरी का स्वाद मुंह में आने लगा।               निसंतान चाची जी जब भी कुछ बनाती मोहल्ले भर … Read more

बीस साल पहले – मधु शुक्ला

नरेंद्र बाबू ने सामान का थैला सीमा को सौंपते हुए कहा, “बहुत मँहगाई बढ़ गई है। बीस साल पहले राशन का महिने भर का सामान तीन चार हजार में आ जाता था। जब कि बच्चे और अम्मा बाबूजी साथ रहते थे।और अब हम दो ही हैं, फिर भी दस हजार के ऊपर खर्च हो जाता … Read more

वक़्त के मोहरे – अभिलाषा कक्कड़

अरे भई अपर्णा कहाँ हो !! बाहर से आते ही अमन पत्नी को बार बार आवाज़ देने लगा । छत पर कपड़े सुखाती अपर्णा पति कीं आवाज़ सुनकर जल्दी से नीचे दौड़कर आई । आप आ गये.. चाय बना कर लाऊँ ?? तौलिए से हाथ पोछते हुए बोली । चाय नहीं पीनी , मैं भैया … Read more

वक्त कब कौन से मोड़ पे लाके छोड़ दे … – मनीषा मारू

दिव्या की शादी को साल भर हुए थे। घर परिवार सब अच्छा देख मां बाबा ने ब्याहा था। लेकिन कहते हैं ना की…. किस्मत और वक्त कब कौन से मोड़ पे लाके छोड़ दे मालूम ही नहीं चलता। साल भार में पति करण महाजन का आना जाना लगा रहा। जाहिर हैं नई नई शादी कभी … Read more

बाबूजी की बापसी – मनीषा भरतिया 

रामलाल जी अपनी धर्म पत्नी के साथ नैनीताल के एक छोटे से कस्बे में रहते थे। शादी को 5 साल होने को आए, लेकिन उन्हें कोई औलाद नहीं हुई। इस वजह से वह और उनकी धर्मपत्नी सविता बहुत चिंतित और परेशान रहते थे। घर में धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं थी……क्योंकि रामलाल जी की सरकारी … Read more

इंतजार कैसा – ऋतु गर्ग

 सूखे पड़े गमलों को रीता झांक झांक कर देख रही थी।  क्या हो गया है सभी पौधे सूख कैसे गए???  क्या वक्त की मार ने इन्हें भी सुखा दिया था?  यह तो बहुत हरे-भरे दिखते थे कभी एक पीला पत्ता भी कभी गलती से भी दिखाई नहीं देता था। ओर ओर नानी को क्या हो … Read more

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