विचारों में पीएचडी – बालेश्वर गुप्ता

लगभग प्रतिदिन समाचार आता कि आज चीन ने हमारी एक चौकी पर कब्जा कर लिया,आज दो चौकी हमारे हाथ से निकल गयी।सुनकर झल्लाहट होती,पर बेबबस थे।          मैं तब आठवीं कक्षा का विद्यार्थी था,1962 के अक्टूबर माह में ही चीन ने भारत पर आक्रमण किया था।लम्बी गुलामी और विदेशी शासन से बहुत संघर्ष के बाद आजादी … Read more

मदद – संगीता अग्रवाल 

स्मिता अपने बेटे के साथ बाज़ार से निकल रही थी बड़े बड़े शोरूम और उनमे एक से एक मन को लुभाने वाली चीजे। शोरूमो के शीशो मे सजे पुतले और उनको पहनाये कीमती कपड़े। शोरूमो मे भारी भीड़ ।  सब कितना खूबसूरत नज़र आ रहा है पर क्या सच मे ये खूबसूरत है इसका एक … Read more

कुम्हार – सीमा पण्ड्या 

आज एक विवाह समारोह में डाक्टर वसुधा से मुलाक़ात हुई, बहुत ही आत्मीयता से मिलीं  मेरे पूरे परिवार से।   बच्चे क्या कर रहे हैं? भविष्य में क्या करना चाहते हैं सब पूछा। बच्चों और पत्नी उनके व्यक्तित्व और आत्मीयता से बहुत प्रभावित हुए ।बच्चे बोले-“लगा ही नहीं इनसे मिलने पर कि पहली बार मिल रहे … Read more

अगले जन्म में मिलेंगे – मुकुन्द लाल

दशकों बाद जब विशाल अपने गांँव गया तो उसके कदम अनायास ही उस खंडहरनुमा भवन की ओर बढ़ गए। उसके समीप पहुंँचने पर पहले की तरह ही वह ध्वस्त  विल्डिंग जो कभी खूबसूरत इमारत हुआ करती थी के पास से गुजरने वाले सोता के जल की कल-कल ध्वनि सन्नाटे को भंग कर रही थी। वह … Read more

कुटुंब – नीरजा नामदेव

रतन राजस्थान के एक छोटे से गांव से दिल्ली कॉलेज में पढ़ाई करने जाता है। वहां के माहौल में बहुत ही अंतर होता है। लेकिन वह धीरे-धीरे वहां के माहौल के अनुसार ढलने लगता है। वह पढ़ाई में तो होशियार रहता ही है साथ ही कॉलेज में होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी भाग लेता … Read more

एक अनकहा रिश्ता – मीनाक्षी सिंह

मेरा तबादला जब मथुरा से आगरा में हुआ तो मुझे गांव में ही रहना पड़ा ! बीटिया छोटी थी ! दूर से आना जाना ,बेटी को संभालना मुश्किल हो जाता इसलिये वही विद्यालय के पीछे रहने का निर्णय किया ! पतिदेव भी सहमत थे ! आ गए हम सामान लेकर अपने गांव !  मेरे घर … Read more

कॉउंसलिंग – ज्योति अप्रतिम

वो आज वापस आ गई।पूरे दो महीने बाद। कुछ अजीब सी लग रही है।अचानक से मोटी हो गई है।स्वभाव भी कुछ अलग सा हो गया है । जी हाँ !विद्या की बात कर रही हूँ जो दो महीने पहले स्कूल में जॉब करने आई थी। न जाने कौनसा ग्रहण लग गया उसके लावण्य और स्वभाव … Read more

सबक – नीरजा कृष्णा

“रेवा, आज तुमसे मिल कर बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे वो समय याद आ रहा है…जब मिनी के पापा के देहांत के बाद तुम कैसी बावली सी हो गई थीं।” रंजना आज काफ़ी वर्षों के बाद अपनी मित्र से मिल रही थी। उस समय की रेवा तो कहीं गुम हो चुकी थी। आज वो … Read more

वो खट्टी मीठी यादें – नीरजा नामदेव

ये मेरी शादी के बाद की घटना है इधर शादी के बाद नाश्ता या खाना बनाने से पहले सासू मां से क्या बनाना है, कैसे बनाना है पूछ कर बनाना पड़ता है तो मैं भी ऐसा ही करती थी। सासू मां क्या बनाना है के साथ ही मात्रा भी बता देती थी और बनाने की … Read more

चेहरे पे चेहरा  – बेला पुनिवाला 

डिम्पल के पापा ने डिम्पल की शादी एक बहुत ही बड़े घराने में की थी, उनको ये नहीं पता था, कि ” ऐसे बड़े घरो में रहनेवाले लोगों के हाथी के दाँत दिखाने कुछ ओर और चबाने वाले दाँत कुछ और होते है.. “         डिम्पल एक बहुत खुले विचारों वाली पढ़ी-लिखी लड़की थी, घूमना फिरना, … Read more

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