‘ बहिष्कार ‘ – विभा गुप्ता

आज फिर माँ ने दामिनी को बाहर जाने से रोका तो उसने कहा, ” क्यों नहीं जाऊँगी, जो होना था,वो तो हो चुका।” कहकर वो काम के लिए निकल गई।          दामिनी एक बुनाई केन्द्र में सुपरवाजर के पोस्ट पर काम करती थी।घर में माँ और एक छोटा भाई थें।कुछ साल पहले पिता काम करने की … Read more

“जीवन संघर्षों से भरा” – नीरू जैन

लड़की के जन्म से लेकर मृत्यु तक सारा जीवन हर पल एक जंग है जिसे वह कदम कदम पर जीतने की पूरी कोशिश करती है और जहां वह कमजोर पड़ने लगती है तो दुनिया से पहले उसे अपने घरवालों के अनेक तानों का सामना करना पड़ता है। आइए पढ़ते हैं एक ऐसी कहानी कल्पना की:- … Read more

ना धर्म, ना बिरादरी, सिर्फ इंसानियत …. – सविता गोयल

” देखो नितिन की मां, अपने बेटे को या तो तुम समझा लो नहीं तो फिर मैं अपने हिसाब से समझाऊंगा…. अरे कितनी बार कहा है अपनी बिरादरी अपने मेल के लोगों के साथ उठा बैठा करे…. लेकिन साहबजादे ने पता नहीं कैसे कैसे यार दोस्त बना रखे हैं… आखिर समाज में भाईचारा भी कोई … Read more

दोहरा मापदंड – नंदिनी

नमन ओर पायल ने घूमने जाने का प्लान बनाया इस बार वो अपने मां पापा को भी साथ ले जा रहा था घुमाने के लिए , उनके लिए तो मानो खुशी का ठिकाना ही नहीं था , जब भी जिक्र चलता किसी के सामने बड़े खुश होकर बताते नमन घुमाने ले जा रहा है शिमला … Read more

अटूट रिश्ता – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

मैं शिखा नई नई कालोनी में शिफ्ट हुई थी… कालोनी में दो सौ चौदह मकान थे। मुझे कार्नर का मकान मिला था इसलिए मकान के बाहर स्पेस ज्यादा था। वर्क लोड बढ़ जाने से मेरी तबीयत खराब हो गई थी। शाम का समय था मैं आराम कर रही थी तभी एक  अधमरी कुतिया घसीटते घसीटते … Read more

जब जागो तभी सबेरा  – कमलेश राणा

अरे विभा बड़े दिनों बाद दिखाई दी हो आज, तुम तो बिल्कुल ईद का चाँद हो गई हो।  बस घर गृहस्थी के कामों से कहाँ फुर्सत मिलती है यार.. वैसे तुम्हें शायद मालूम नहीं कि मैं सुमित के साथ दुबई शिफ्ट हो गई हूँ।  अरे वाह तो मेरी सखी परदेशी हो गई है अब.. पर … Read more

अनदेखा सपना – स्मिता टोके “पारिजात” 

शॉप में साड़ियों का पेमेंट करके जैसे ही मैं पीछे मुड़ी सामने जाना पहचाना चेहरा देखकर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा । दमकता चेहरा उसकी खुशहाल ज़िंदगी की कहानी कह रहा था । सहसा वह बुझी-बुझी सी रहनेवाली अनुभा याद आ गई ।  “मनू ,कहाँ खो गई ?” अनुभा मुस्कुराते हुए बोली । “अरे, … Read more

बाबूजी – पूजा मनोज अग्रवाल

अरे साहब चलो ना  ! ,,, मेरा  रिक्शा खाली है ,,,मैं ले चलूंगा आपको ,,।  नहीं भाई नहीं ,,,! तुम्हारे हाथ में चोट लगी है , और मुझे समय पर पहुंचना है,, तुम रिक्शा धीरे चलाओगे तो मुझे देरी हो जाएगी । बाबूजी ,,, मैं आपसे विनती करता हूं  ,,,आप मेरी रिक्शा में बैठ जाइए … Read more

प्यार से बंधी रिश्तों की डोर” – कविता भड़ाना

“हाय कितनी गर्मी हो रही है” पसीने को पोंछती हुई माही बड़बड़ाते हुए बोली…दोपहर के 2 बजे अप्रैल माह की चिलचिलाती गर्मी में माही अपनी 10वर्षीय बेटी परी को लेने घर से थोड़ी दूर बस स्टॉप पर आई थी, उसके जैसे और भी कई पैरेंट्स अपने अपने बच्चों को लेने आए थे, गर्मी से सबका … Read more

दर्द – गीता वाधवानी

अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी मृदुल स्वभाव वाली संध्या को कहीं ना कहीं यह आभास था कि उसका जीवन अब शेष नहीं है।  बिस्तर पर पड़े पड़े, उसे कुछ दिन पूर्व की बात स्मरण हो आई, जिस दिन उसके पति से उसकी छोटी सी बात पर कुछ कहासुनी हो गई थी और वह गुस्से में … Read more

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