समन्वय – पुष्पा जोशी
शास्त्री जी बोलते कुछ नहीं, इशारे से कविता को कुछ कहने के लिए मना करते,और हौले से उसके सिर पर हाथ रख देते | कविता को अपने सिर पर एक छत्र महसूस होता ,और सासुजी की बात का, उस पर असर नहीं होता | वह जानती थी ,कि वह कुछ गलत नहीं कर रही … Read more