नियति का चक्र
सासू माँ विजयाजी कई दिनों से बहू की हरकतें देख रही थी.. कभी बहू नेहा चुपचाप रसोईघर में कुछ बनाते बनाते खा लेती , अगर विजया जी पहुँच जाती तो चुपचाप गैस के नीचे खाने की चीज सरका देती, अपना पल्लू बड़ा सा कर लेती .. घूंघट के अंदर से ही जल्दी जल्दी खाना गले … Read more