सौ रुपये का बोरा – सीमा पण्ड्या

बेटियाँ #पाँचवा जन्मोत्सव, कहानी क्रमांक १ लंबे इंतज़ार और अथक प्रयासों के बाद आख़िर मेरा स्थानांतरण गृह नगर हो ही गया। बहुत ख़ुश थे हम लोग कि अब सभी अपने मित्र, सहयोगियों और रिश्तेदारों के बीच में रहेंगे ।पत्नी भी ख़ुश थी क्योंकि उसका ससुराल के साथ-साथ मायका भी यहीं था। बच्चे भी अति प्रसन्न … Read more

वो खौफनाक दोपहर  – डॉ उर्मिला शर्मा

मंजुला हमेशा की तरह सुबह चाय के साथ समाचार पत्र पढ़ रही थी। सुबह में वो समाचारों के हेडलाइंस ही प्रायः देखती थी। विस्तृत जानकारी वाली खबरों को वह शाम को पढ़ती या किसी फुरसत के क्षणों में पढ़ती थी। सरसरी नजर अखबार पर डालते हुए उसकी नजर एक खबर पट आकर अटक गई- “अमुक … Read more

गलत आदमी-कह – देवेंद्र कुमार

मैं रिक्शा में बाजार जा रहा था। एकाएक आवाज आई, “सर, प्रणाम।” और एक स्कूटर रिक्शा के पास आकर रुक गया। मैंने रिक्शा वाले से रुकने को कहा। स्कूटर सवार ने मेरे पैर छू लिए। मैंने उसे पहचान लिया—वह मेरा पुराना छात्र यशपाल था। उसने कहा, “मैंने तो आपको दूर से पहचान लिया था,” फिर … Read more

क्या मर्द रो नहीं सकते (पार्ट -1) – मीनाक्षी सिंह

चांदनी – ये क्या यार ,विभू के जाने में बस 15 दिन बचे हैँ ! मेरा दिल बैठा जा रहा हैँ ! तुम हो कि अपनी ही धुन में मस्त ! कभी फ़ोन ,कभी टीवीं ,कभी सैर पर निकल जाते हो ! आखिर किस मिट्टी के बने हो तुम ! सुन रहे हो ना ,मैं … Read more

गिफ़्ट – नंदिनी

चलो जी आज शिखा से मिलते हैं और जानते हैं आखिर उसकी अनोखी जन्मदिन की गिफ़्ट डिमांड थी क्या ….. तीन भाइयों के परिवार में शादी हुई  शिखा की, छोटी बहू बनकर आई घर में, विशाल की दुल्हनिया बन कर । सास ससुर ,दो जेठानी उनके प्यारे दो बच्चे दिन भर चाची चाची करते । … Read more

दिल के रिश्ते  – नेकराम 

यह बात 12 मार्च 2011 की है रात का वक्त था मैं ड्यूटी से छुट्टी करके घर लोटा ही था कि — उस दिन मां बड़ी चिंतित थी मेरे घर आते ही बोली दवाई मैंने ले ली है और गोली भी खाली अब मेरी बात सुनो गौर से मेरी उम्र का कुछ ठिकाना नही कब … Read more

सीख – अभिलाषा कक्कड़

बच्चे जैसे ही सात आठ साल की उम्र में पहुँचते हैं तो बहुत ही जिज्ञासु प्रकृति के बन जाते हैं, ख़ासकर लड़के ..लड़कियाँ थोड़ी ठहरी स्वभाव की होती है । वो अपनी गुड़िया या फिर छोटे से टेडी बीअर में ही ख़ुश रहती है । मेरा बेटा जब आठ बरस का हुआ तो हमारे दोस्त … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे…..!! – विनोद सिन्हा “सुदामा”

नहीं नहीं .. मुझसे नहीं होगा माँ जी… सुलेखा ने झिझकते हुए अपनी सास शारदा देवी से कहा… क्यूँ नहीं होगा….भला और इसमे हानि ही क्या है…. क्या लड़कियाँ दुकान नहीं चलाती…व्यपार नहीं करती..?? पर माँ जी लोग क्या कहेंगे..?? फिर आस पड़ोस एवं मुहल्लों वालों का क्या ..?? किस किस को जवाब देंगी मैं … Read more

सालगिरह की सौगात – आरती झा आद्या

“दिवाली की सफाई के बाद थकी हारी सुहानी आराम कुर्सी पर अथलेटी सी बैठी थी, तभी गेट खोल कर दफ्तर का चपरासी रामविलास दाखिल हुआ।  “बहु जी, यह चिट्टियां लेकर आया हूँ, साहब का फोन भी आया था, मुंबई से कोलकाता के लिए चल पड़े हैं परसों लौट आएंगे।” उसने चिट्टियां देते हुए कहा। सुहानी … Read more

“संघर्ष सफर का” – डॉ. अनुपमा श्रीवास्तवा

तालियों की गड़गड़ाहट से समूचा हॉल गूँज उठा। तभी माईक पर आवाज गूंजी…… डॉ. स्मृति आप यहां आयें और अपनी मंजिल आपने कैसे पाया कृपया उसके बारे में दो शब्द कहें । यहां उपस्थित सभी मेहमान तथा मेडिकल कॉलेज के छात्र आपके यहां तक के सफर और संघर्ष की कहानी आपकी ही जुबानी सुनना चाहते … Read more

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