दृष्टिकोण – पुष्पा जोशी

  रजनी का सिर चकरा रहा था, उसनें सपने में भी कल्पना नहीं की थी ,कि उसकी अपनी बेटी शिल्पी, उसे,इस तरह जवाब देगी |उसके कानों में शिल्पी के कहे शब्द गूंज रहे थे | ‘ यह क्या माँ ! हर समय साये की तरह,मंडराती रहती हो |खुल कर साँस भी नहीं लेने देती, घुटन होती … Read more

खडूस चौधरी – आरती झा आद्या

बाबू जी हम शहर जाना चाहते हैं…अभय ने डरते हुए अपने पिता रामरतन चौधरी से कहा। काहे काहे जाना चाहते हो शहर…अभय की बात सुनते ही रामरतन चौधरी हाथ का निवाला मुंह तक जाने से रोक अभय के जवाब की प्रतीक्षा में अपलक उसे देखने लगते हैं। बाबू जी वो हम नौकरी करना चाहते हैं…इसीलिए … Read more

उसका निर्णय – स्मिता टोके “पारिजात”

“दी ,,,,आप अपनेआप को बहुत स्मार्ट समझने लगी हैं ,,,,,,,,,,, ।” आरोही का मैसेज पढ़कर अपमान की पीड़ा से नंदा की आँखें छलछला उठीं । “आपको रिस्पेक्ट करती हूँ इसका मतलब ये नहीं कि आप मेरी लाइफ में ही ताकाझांकी करने लगे । बहुत बर्दाश्त किया आपको,,,,,,,, अब और नहीं ,,,,,,,,,,” आरोही के शब्द पिघले … Read more

बेटी का प्यार – के कामेश्वरी

विनया की शादी को हुए दो साल हो गए थे । वह ससुराल में ही है मायके एक बार भी नहीं आई थी ।माता-पिता सोचते हैं कि बिटिया बहुत खुश है उसे मायके की याद न आए ऐसा ससुराल मिला है ।विनया ने भी जब भी फ़ोन किया उनसे चहकते हुए ही बात किया था … Read more

विडंबना – कमलेश राणा

कल बैंक से पैसे निकालने गया तो देखा वहाँ भारी अफरा – तफरी मची हुई थी। अचानक पुलिस की दो तीन गाड़ियां आ गईं सभी ग्राहकों को रोक कर बैंक का शटर बंद कर दिया गया। समझ में नहीं आ रहा था माज़रा क्या है तभी गार्ड्स पर नज़र पड़ी जो करीबन 80 साल के … Read more

“शादी के बाद आठ साल संघर्ष भरे” – नीरू जैन

“जिम्मेदारी ने समय से पहले ही रिया को बड़ा कर दिया था”…. रिया की शादी को अभी पन्द्रह दिन ही हुए थे कि उसके सास-ससुर अचानक से कार एक्सीडेंट हो गया। डॉक्टर ने बताया कि सास कमला जी की कूल्हे की हड्डी टूट गई है जिससे वह अब खड़ी नहीं हो सकेंगी और ससुर जी … Read more

होली का डर  – बेला पुनिवाला   

 वैसे तो होली रंगो का त्यौहार है, खुशियों का त्यौहार है, हर किसी को होली का त्यौहार बहुत ही पसंद है। होली के दिन हर कोई एक-दूसरे पे कलर लगाता है। लोग नाचते है, गाते है, यहाँ तक की भगवान् श्री कृष्ण को भी ये होली का त्यौहार बहुत पसंद है।          मगर पता नहीं मुझे … Read more

जीवन का संघर्ष – सुभद्रा प्रसाद

 “मैं पूछती हूँ माँ जी, यह बुआ जी कबतक हमारे घर में रहेंगी ? सारा दिन खांसती रहती है  |आप इन्हें इनके घर भेजती क्यों नहीं? रमा की छोटी बहू रचना ने पूछा |             ” अरे ये अब कहीं नहीं जायेगी| यहीँ मरेगी, तभी पिंड छूटेगा हमारा इनसे |” बडी बहू राखी ने कहा | … Read more

अन्तिम इच्छा  – माता प्रसाद दुबे

“डाक्टर साहब!क्या अब मै अपनी माता जी को घर ले जा सकता हूं?” विनायक ने नर्सिंग होम मे भर्ती अपनी मां का इलाज कर रहे डॉक्टर से पूछा।”जी हा,आप अब अपनी माता जी को घर ले जा सकते है,मगर इनका ध्यान रखियेगा,ये ज्यादा सोचे नही,इन्हे खुश रखने की जरूरत है?”डाक्टर ने विनायक से कहा।”जी मै … Read more

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