“मां!” – आरती श्रीवास्तव

अपनी शादी के सिर्फ़ छह महीने के बाद मुझे अपनी बुआ के बेटे नैतिक भैया की शादी में जाने का मौका मिल रहा था। मेरी शादी के बाद मायके की यह पहली शादी थी जिसमें शामिल होने के लिए मैं खासी उत्साहित थी।  कुछ ही समय पश्चात् हम ट्रेन के द्वारा रांची से पटना बुआ … Read more

तारीख   –  ऊषा भारद्वाज

आज सुबह से मन्टूअपनी दादी को देख रहा था कि उसकी दादी अपने कपड़े तह करके अपने ब्रीफकेस में रख रहीं थी । अपनी जरूरत का सारा सामान धीरे-धीरे छोटी सी बैग में रखा । मंटू दादी के पास आया और उनसे पूछा – “दादी आप कहीं जा रही हो?” सावित्री देवी ने बड़ी मायूसी … Read more

मेरा गुलाब  – दीप्ति सिंह

अभी स्कूल बस आने में देर थी । आरव तैयार था बस करुणा को बालों में कंघी करनी थी। अचानक उसकी नजर बरामदे में रखे गमले के अधखिले लाल गुलाब पर गयी। उसके चेहरे पर मुस्कान के साथ एक याद भी तैर गयी। ” आप मुझे गुलाब नही देंगे क्या?” उसने अरुण से पूछा था। … Read more

प्यार की निशानी –  डा.मधु आंधीवाल

अवनी पंलग पर रखे टैडी वीयर को अपलक देख रही थी । वह उसे किसी को देकर भी उन यादों से पीछा नहीं छुटा सकती थी । ये उसकी छोटी बहन नेहा का था । इस टैडी वीयर को नेहा किसी को छूने नहीं देती थी पर अवनी को उसे छेड़ने में ही मजा आता … Read more

जाएं तो जाएं कहाँ – कमलेश राणा

 अभी कुछ दिनों पहले ईश्वर की असीम अनुकंपा से हमारे घर में पोती का अवतरण हुआ है। परंपराओं के अनुसार उसके नामकरण संस्कार के लिए मैं पंडित जी के पास गई जो शहर के प्रसिद्ध ज्योतिषी भी हैं। काफी लोग अपनी बारी आने की प्रतीक्षा कर रहे थे अतः मैं भी बैठ गई और समय … Read more

पहले सहेली फिर बहू बनी – गुरविंदर टूटेजा 

  नन्दिता बहुत खुश थी…क्योंकि आज भतीजें अनय का रिश्ता एक घर छोड़कर रहने वाली रूही से हो रहा था…!!!! वैसे तो घर कि खुशी में खुश थी पर वो ज्यादा खुश इसलिए थी कि पूरी कॉलोनी की प्यारी रूही दीदी जिसमें हर गुण हैं…हर उम्र से अलग ही रिश्ता बनाती है सच उसमें अलग ही … Read more

गोरे रंग पर न इतना गुमान कर 

सुरभि एक सांवली लड़की थी. लेकिन वह सांवली होने के बाद भी बहुत होनहार और काबिल थी. वह हर क्षेत्र मैं खुद को औरों से बेहतर साबित करती थी. लेकिन फिर भी उसके परिवार में उसके पिता एक सांवली लड़की होने की वजह से उसे आते जाते ताना मारते थे. लेकिन सुरभि उसके पिता की … Read more

समय का खेल 

“इस बार तो अकाल बारिश होने से हमारी फसल भी नहीं हुई… और जब हम फसल करते भी है तो पानी की कमी के कारण फसल फिर बर्बाद हो जाती है. ऐसे में हम दिन-ब-दिन बूढ़े भी होते जा रहे है हम गांव में रहकर और अकेला गुजारा नहीं कर सकते…” “हां जी तभी तो … Read more

जैसी करनी वैसी भरनी

धर्मपुर नाम का एक गांव था. लेकिन उस गांव में रहता भोलाराम अपने धर्म से चूक गया था. भोलाराम की एक अकेली मां थी जो अपने पति के मृत्यु के बाद भोलाराम को अकेले पाल कर, और खेत खलिहान का सारा कारोबार संभाल कर सारी संपत्ति जमा की. और खुद मेहनत करके दिन गुजारा किया. … Read more

बुनियाद – ऋतु अग्रवाल 

आज गंगा बहुत बेचैन थी। ना जाने, मन में कैसे-कैसे भाव आ रहे थे। इन्हीं भावों की परिलक्षितता उसके उठान में दिख रही थी। बड़ी ही तीव्रता से लहरें उठती और उसी वेग में गिरकर वापस लौट जाती। गंगा से जब रहा नहीं गया तो वह सरस्वती को पुकारने लगी,” सरस्वती! छोटी! कहाँ हो तुम? … Read more

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