योद्धा – कमलेश राणा

जानकी और ओमी के पास सब कुछ था बस कमी थी तो एक औलाद की लोग जानकी को बांझ कहते और ओमी को दूसरे विवाह की सलाह देने से बाज़ नहीं आते आखिर ईश्वर ने 10 वर्ष के लंबे इंतज़ार के बाद कन्या रत्न से नवाजा। घर में खुशियाँ मनाई गई, पूरे गांव में लड्डू … Read more

 सपना – बालेश्वर गुप्ता

आज मनी बहुत ही प्रसन्न थी,आज उसका सपना पूरा हो रहा था।20 वर्ष हाँ पूरे 20 वर्ष उसके जीवन मे कैसे बीते वो सब चलचित्र की तरह उसकी आँखों के सामने तैर रहे थे।         अभी शादी को दो वर्ष ही बीते थे गोद मे मुन्ना आ गया।पूरा संसार ही बदल गया, हर समय मुन्ना की … Read more

रिश्ता ये कैसा – कुमुद चतुर्वेदी

अस्ताचलगामी सूर्य की ओर मुँह किये एक आदमी समुद्र के किनारे दोंनों हाथ उठाये खड़ा था मानो ताजी हवा ले रहा हो कि अचानक वह पानी में कूद गया और डूबने लगा। कुछ लोग जो तैरना जानते थे एकदम पानी में कूद पड़े और थोड़ी देर में ही उस व्यक्ति को कंधे पर लादे बाहर … Read more

मेट्रीमोनियल वाली शादी – डॉ उर्मिला शर्मा

कोर्ट के कॉरिडोर में खड़ा नवीन रुचि को चार साल की गोल- मटोल नन्ही टियारा को सीढ़ियों से उतारकर ले जाते हुए प्यार भरी निगाहों से देख रहा था। उसका मन कर रहा था कि लपककर टियारा को बाहों में भरकर खूब प्यार करे। लेकिन यह आसान न था। न ही रुचि टियारा को उसके … Read more

सूखी सूखी होली – संजय मृदुल

स्वर्णा की यह कॉलोनी में पहली होली है, उसके पति मानव बैंक में जॉब करते हैं छोटे से कस्बे में रहने वाले मानव की पोस्टिंग प्रमोशन के साथ बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय में हो गयी तो घर परिवार छोड़ कर स्वर्णा को भी साथ आना पड़ा। सालों तक ससुराल में बिना पति के रहने के … Read more

आत्मोत्सर्ग ….होलिका का – लतिका श्रीवास्तव 

होलिका दहन का समय हो गया है मंजूषा जल्दी आ बेटा क्या कर रही है अभी तक …. मां जोर जोर से आवाज़ लगा रही थीं..उसके ना दिखने पर उनकी आवाज में एक प्रकार की बेचैनी और व्यथा भी झलक जाती थी..मंजूषा रसोई में खामोशी से डिनर की अंतिम डिश मावा वाली सेंवइयां बना रही … Read more

जीना इसी का नाम है – के कामेश्वरी 

सरोज एक बहुत बड़ी कंपनी में नौकरी करती थी।  पति राघव अपनी नौकरी के सिलसिले में बाहर निकल जाते थे वैसे ही कई सालों तक वे इराक़ और ईरान जैसे देशों में नौकरी करते थे । कभी-कभी छुट्टियों में बच्चों को और सरोज को भी घुमा फिरा करलाते थे । अपने ग़ुस्से के कारण बच्चे … Read more

 ‘ बहिष्कार ‘ – विभा गुप्ता

आज फिर माँ ने दामिनी को बाहर जाने से रोका तो उसने कहा, ” क्यों नहीं जाऊँगी, जो होना था,वो तो हो चुका।” कहकर वो काम के लिए निकल गई।          दामिनी एक बुनाई केन्द्र में सुपरवाजर के पोस्ट पर काम करती थी।घर में माँ और एक छोटा भाई थें।कुछ साल पहले पिता काम करने की … Read more

“जीवन संघर्षों से भरा” – नीरू जैन

लड़की के जन्म से लेकर मृत्यु तक सारा जीवन हर पल एक जंग है जिसे वह कदम कदम पर जीतने की पूरी कोशिश करती है और जहां वह कमजोर पड़ने लगती है तो दुनिया से पहले उसे अपने घरवालों के अनेक तानों का सामना करना पड़ता है। आइए पढ़ते हैं एक ऐसी कहानी कल्पना की:- … Read more

ना धर्म, ना बिरादरी, सिर्फ इंसानियत …. – सविता गोयल

” देखो नितिन की मां, अपने बेटे को या तो तुम समझा लो नहीं तो फिर मैं अपने हिसाब से समझाऊंगा…. अरे कितनी बार कहा है अपनी बिरादरी अपने मेल के लोगों के साथ उठा बैठा करे…. लेकिन साहबजादे ने पता नहीं कैसे कैसे यार दोस्त बना रखे हैं… आखिर समाज में भाईचारा भी कोई … Read more

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