विजयपथ – आरती झा आद्या

चारु तुम..अपनी बेटी की जिद्द पर उसकी दोस्त की  कत्थक क्लास में एडमिशन कराने आई माधवी अपनी सहेली चारु को उस एक कमरे के घर में देख आश्चर्य चकित रह गई थी। माधवी तुम…मुझे देखते ही बच्चियों को कत्थक के लिए ताल देती चारु आगे बढ़ गले लग गई। चारु तू यहां कैसे… कब से … Read more

फुलवा – अनुराधा श्रीवास्तव “अंतरा “

’’फुलवा, अरी हो फुलवा। कहाॅं मर गयी, जब जरूरत होती है तो इस लड़की का कहीं पता नहीं चलता है। खेल रही होगी कहीं लड़कों के साथ कंचा, गोटी। आने दो, मार मार कर चमड़ी ना उधेड़ दी तो मेरा भी नाम कमली नहीं।’’ कमली बड़बड़ाती जा रही थी और घर का काम समेटती जा … Read more

जीवन एक संघर्ष – रश्मि प्रकाश

“ माँ सोच रही हूँ प्रिया को बुला लूँ ।” राशि ने अपनी माँ से कहा जो बहुत समय बाद मायके आई थी  लगभग पाँच साल पहले वो ये शहर छोड़ कर कहीं और चली गई थी । “ तुम अभी तक उसको भूली नहीं हो पाँच साल हो गया यहाँ से गए आज भी … Read more

हम बुरा क्यो ना माने – संगीता अग्रवाल

” बहू जल्दी जल्दी हाथ चलाओ नितेश के दोस्त होली खेलने आते ही होंगे फिर अर्चना भी तो आ रही है जमाई जी के साथ अपनी भाभी की पहली होली पर !” सरला जी पकोड़े तलती हुई अपनी बहू मीनाक्षी से बोली। ” जी मम्मीजी बस होने वाला है !” मीनाक्षी मुस्कुराते हुए बोली।  इधर … Read more

चंदा का संघर्ष – पुष्पा पाण्डेय 

किसी-किसी की जिन्दगी संघर्ष का पर्याय बन जाता है। चंदा जब आठ साल की थी तभी से संघर्ष के साथ जीना सीख लिया था। माँ को बिमारी ने छीन लिया और एक साल बाद ही पिता ने चंदा के लिए नयी माँ ला दी। खिलौने से खेलती-खेलती चंदा कब किसी के हाथों की खिलौना बन … Read more

मां तुम एक कमल की तरह हो – सुषमा यादव

मेरी प्यारी मां, अपने पिता जी की इकलौती संतान। मेरे नाना जी को पहली शादी रास नहीं आई थी, वो बहुत जल्द भगवान को प्यारी हो गईं थीं, परिवार ने उनकी दूसरी शादी करवा दी,पर वो भी अपनी इस नन्ही सी बच्ची को जो एक साल की थी छोड़कर असमय ही चलीं गईं। सबके बहुत … Read more

एक थी विद्या – किरन विश्वकर्मा

रामनगर का गांव हरिहरपुर मास्टर जी लकड़ी की कुर्सी पर बैठे हुए बच्चों को पढ़ा रहे थे सभी बच्चे जमीन पर टाट की पट्टी बिछा कर बैठे हुए थे आम के पेड़ के नीचे उसकी छाया में गुरु जी की क्लास लगती थी। सभी बच्चे मास्टर जी की बातों को ध्यान से सुन रहे थे। … Read more

जैसे को तैसा – बेला पुनिवाला 

मर्यादा एक बहुत बड़ा शब्द है, जो बचपन से हर लड़की को सिखाया जाता है, धीरे से बोलो, धीरे से हँसो, बड़ों का मान-सम्मान करो, घर का सारा काम सीखो और भी बहुत कुछ लड़कियों को बचपन से सिखाया जाता है और वह लड़की बिना किसी सवाल किए इन सब बातों का, इन सब रीती-रिवाज़ो … Read more

 सॉरी – गुरविंदर टूटेजा

मीनल जल्दी कर बेटा ट्रेन का टाइम हो रहा है अपने सारे डॉक्यूमेंट रख लिए ना…?? जी पापा सब रख लिए हैं आप चिन्ता मत करों मैं अच्छे से मन लगाकर पढ़ाई करूँगी…मुझे पता है आपने कितनी मुश्किल से फीस भरी है आप अपना और मम्मी का ध्यान रखना और फिर मेरे साथ पारूल भी … Read more

 अजीब दास्ताँ – पुष्पा जोशी

आज इतने वर्षों बाद सेठ ब्रजमोहन के घर खुशियों ने दस्तक दी है,उनके एकलोते बेटे मालव की पत्नी केतकी उम्मीद से थी, जैसे ही महिला चिकित्सक ने यह खबर दी घर में खुशी की लहर दौड़ गई। केतकी की उम्र ४४ साल थी,इस उम्र में शारीरिक परेशानी कुछ ज्यादा थी। डॉक्टर ने बेडरेस्ट की सलाह … Read more

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