गंगा के संघर्ष का सुख – शुभ्रा बैनर्जी

आज हमारी कॉलोनी में महिला दिवस के उपलक्ष्य में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया था।पिछले पच्चीस सालों से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण मैं भी आमंत्रित थी।मुख्य अतिथि के साथ मुझे भी मंच पर बैठाया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई।महिलाओं के सशक्तीकरण पर कविताएं और भाषण प्रस्तुत … Read more

 एक नई पहचान  – सारिका चौरसिया

विशिष्ट अतिथिगण मंच पर अपनी अपनी निर्धारित कुर्सियों पर विराजमान थे और सरस्वती वंदना के साथ ही अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह कार्यक्रम शुरू हो चुका था।सभागार की सबसे अग्रिम पंक्ति में जिलाधिकारी महोदया के ठीक सामने बैठी वह अपने विचारों में खो रही थी। विचार, लगभग तीस वर्षों के कठिन सफर के। … Read more

“माक़ूल जवाब” – स्मिता टोके “पारिजात”

बात उन दिनों की है जब घर में सिर्फ़ लैंडलाईन फोन ही होता था । उस दिन साक्षी को मार्केट जाना था इसलिए उसने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी । लेकिन ऑफ लेने के बावजूद सुबह की दिनचर्या में कोई आराम नहीं था । किचन में मदद करनेवाली घरेलू सहायिका भी उस दिन छुट्टी … Read more

पंख पखेरू – रश्मि प्रकाश 

“ देख रचित कहे दे रहा हूँ…कान खोलकर सुन ले…जब मैं बड़ा हो जाऊँगा ना मम्मी पापा हमेशा मेरे साथ रहेंगे…. तेरी बीबी तो झगड़ालूहोगी वो रहने ही नहीं देगी साथ में।” बचपन में अक्सर रंजन अपने छोटे भाई से कह कर लड़ता रहता था  “ ये देखो सुमिता हमारे बच्चे अभी मेरे कंधे तक … Read more

संस्कार – पूनम अरोड़ा

आज फिर काशी अब तक नहीं आई थी। नीता को ऑफिस जाने में देर हो रही थी, वो खुद ही बड़बड़ाती जा रही थी “कितनी बार उससे कहा है कि मेरे जाने से पहले आ जाया कर, बाद में आने से अभय को दरवाजा खोलने उठना पड़ता है और उसकी नींद खराब होती है लेकिन … Read more

एक अजनबी  – आरती झा आद्या 

विवाह के तीन चार साल हो गये थे। विश्विद्यालय की परीक्षा में हिन्दी साहित्य में स्वर्ण पदक विजेता स्वाति चाह कर भी घर गृहस्थी के अलावा कुछ नहीं सोच पा रही थी। कभी लिखना पढ़ना गुनगुनाना यही जिंदगी थी उसकी। हिन्दी साहित्य से जुड़ी हुई कोई भी प्रतियोगिता हो.. महाविद्यालय या विश्विद्यालय की तरफ से … Read more

माँ का मान  – पूनम अरोड़ा

बचपन में  गर्मी  की छुट्टियाँ  में  लगभग हर वर्ष  ही नानी के  घर जाना होता। हमारी  मामी जी  मोहल्ले की स्थानीय कीर्तन  मंडली की सदस्या थीं। हर दो तीन बाद वहाँ  किसी न किसी के घर या मंदिर में  कीर्तन  का प्रोग्राम  होता। मामी जी तो जातीं  ही थी कभी-कभी  वो  हमें और मम्मी  को … Read more

भगवान ऐसा दामाद सबको दे – सविता गोयल

” आ गई बेटा, बहुत इंतज़ार करवाती है अपनी मां को ,, सरला जी अपनी बेटी के लाड लडाते हुए बोलीं।   ” अरे मां, अभी दो महीने पहले ही तो आई थी …. पता है मेरे आने के नाम से ही मेरी सासु मां का जी उठ जाता है। कहने लगती हैं कि तेरे बिना … Read more

  * सीख * – पुष्पा जोशी

‘मेडम जी मीनू बेबी जी आई है, आपसे मिलने’. शारदा ने दामिनी जी से कहा. ‘कौन? मीनू आई है.उसे यहीं ले आ. ‘अपने कमरे में किताबों की अलमिरा  जमाते हुए दामिनी जी ने कहा.दामिनी जी अभी कुछ दिन पूर्व, हायर सेकण्डरी स्कूल की प्राचार्या के पद से सेवा निवृत्त हुई है.मीनू उनके पड़ोस में रहती … Read more

कीमत – नंदिनी

सुबह का समय ,सब अपने अपने काम पर लग चुके थे ,मां नाश्ता बनाने में,पापा चाय सँग पेपर पड़ने में,दादी गेहूं साफ करने में, हम भाई बहन तैयार होकर स्कूल जाने में । कल तो रविवार की छुट्टी है माँ से आलूबड़े बनवाएंगे रवि चहक कर अपनी बहन बड़ी बहन रुपाली से बोला आज तो … Read more

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