थैंक्यू मेरी बिटिया रानी – आरती झा आद्या

सुनो ना मैं सोच रहा था अब तुम किसी स्कूल में शिक्षिका बन जाओ … बीएड करने के बाद से तुम्हारी डिग्री धूल ही खा रही है। धूल झाड़ते झाड़ते ऊब गई होगी तुम भी… बड़े प्यार से कृपा के पति श्याम ने सुबह की सैर करते हुए कहा। और घर बच्चे कौन देखेगा… कृपा … Read more

अस्तित्व की तलाश …(भाग 2) – लतिका श्रीवास्तव 

..क्या नौकरी लग गई तुम्हाई तुम्ही बता दो मुझे नही पढ़ना तुम्हारा ये बकवास नियुक्ति पत्र… अवाक और कुछ नाराज पिता के पूछने पर मानस ने जैसे ही शिक्षक की नौकरी मिलने की बात  बताई राघव जी तो आगबबूला ही हो गए …शिक्षक की नौकरी करोगे अब  !! इतनी वर्षो की हमारी जमी जमाई इज्जत … Read more

” मेरी बेटियां ” – सीमा वर्मा

आज उनके घर पति की तेरहवीं थी।  बेतरतीबी से पहनी हल्के हरे रंग की साड़ी आंखों में गहन उदासी उनकी चिर- परिचित सहज सौम्य रूप से बिल्कुल भी मेल नहीं खा रही थी। उनके साथ- साथ उनकी तीन बेटियां उनकी छाया की तरह पीछे लगी हुई थीं। उन्होंने मुझे आते देख होंठों पर जबरन मुस्कान … Read more

संघर्षरत बेटी –  मुकुन्द लाल

 सपना सजने-धजने और अपनी औकात के अनुसार मामूली संसाधनों से अपना श्रृंगार करने में ऐसा मशगूल हो गई कि उसे पता ही नहीं चला कि साहब के निवास में पहुंँचने में मात्र घंटे-भर ही बचे हैं।   जब निर्धनता की चक्की में पिस रहे उसके परिवार को दो वक्त की रोटी पर भी आफत आ गई … Read more

भेद-भाव  – डाॅ संजु झा

पत्नी के इंतजार में रवि आसमान  में उड़ते हुए  बादल और ढ़लते  सूरज की रश्मियों की लुका-छिपी का खेल देख रहा है।नौकरी की आपा-धापी की व्यस्तता से समय निकालकर पत्नी और बच्चों से मिलने आया है।बच्चे बाहर खेलने गए हैं और वह बेसब्री से अस्पताल से डाॅक्टर पत्नी रिचा का इंतजार कर रहा है।रवि रिचा … Read more

पापा ,कुछ दिन और रुकेंगे – मीनाक्षी सिंह : Short Stories in Hindi

Short Stories in Hindi : दिव्याजी को अपने आलीशान घर और पैसों का बहुत घमंड था ! हो भी क्यूँ ना पति शहर के जाने मानें बिजनेसमेन जो ठहरे ! जैसा दिव्याजी का स्वभाव था ,वैसा ही बच्चों का भी हो गया था ! वैसे तो वो कभी अपने पुश्तैनी गांव जाती नहीं थी ये … Read more

मार्गदर्शक – अनुराधा श्रीवास्तव “अंतरा “

डा0 श्यामसुन्दर जी एक डिग्री कालेज के प्रधानाध्यापक हैं। वह अपने विद्यालय में हर साल एक जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन करते हैं जिसमें वह कई प्रकार के खेलकूद व प्रतिभाओं को आमन्त्रित कर प्रतियोगिता कराते हैं। इस बार भी जब सत्र समाप्ति के समय कार्यक्रम की तैयारियाॅं शुरू हुई तो मुख्य अतिथि किसे बनाया … Read more

मुफ्त ताने – रोनिता कुंडू

देखिए मम्मी जी…! नंदनी के मुन्ने के लिए क्या खरीदारी की है..? मैंने और रौशन ने… यह कहकर संगीता ने सारे सामान बिखेर दिए… सरला जी:   अरे वाह..! इतना सामान…! सच में नंदिनी बहुत भाग्यशाली है जो, उसे इतने अच्छे भैया भाभी मिले… जिसकी वजह से उसका अपने ससुराल में रौब जमेगा… वरना जो … Read more

प्यार है,भेदभाव नहीं – विभा गुप्ता

 बहुत दिनों से मेरी इच्छा थी ‘गोल्डन टेम्पल’ देखने की।कभी बच्चों की परीक्षाएँ हो जाती तो कभी पति को ऑफ़िस से छुट्टी नहीं मिलती और हमें अपना बनाया हुआ प्रोग्राम कैंसिल कर देना पड़ता था।अब इन ज़िम्मेदारियों से मुक्त हो गये तो पिछले दिसम्बर में हमने अमृतसर जाना तय किया और वो भी ट्रेन से … Read more

“भेद नजर का” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा

सीमा सुबह से तैयारियां कर रही थी। सबके लिए  नाश्ते बनाने के बाद उसे खुद के लिए तैयार होना था। काम इतना बढ़ गया था कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। सासु माँ बार- बार किचन में आकर बोल रही थीं “-  बहू जल्दी करो,जल्दी से काम निपटा लो और तैयार … Read more

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