फिर मिलेंगे ! – अनिल कान्त 

लगता नही था ये क्रिसमस ईव से पहले का दिन है । ठीक उसका दिसम्बर न लगने जैसा । जब तक कोई खुद से न कहे कि यह दिसम्बर है । सड़क का एक छोर आते-आते पुल पर ख़त्म होता था । सड़क कहाँ ? शायद पगडण्डी कहना ठीक हो । जो वह पहले कही … Read more

भेदभाव का परिणाम  – पुष्पा जोशी

मंगला देवी और दिनेश जी मध्यमवर्गीय परिवार के दम्पति थे, उनकी दो बेटियां थी सूजी ५ साल की और रूही ३ साल की दोनों बहुत खुश थे. मगर दिनेश जी की माँ घर में हमेशा क्लेश करती थी.उनके, क्लेश का कारण था, कि उन्हें एक पौते की ख्वाहिश थी, हमेशा यही कहती, बेटियां पराया धन … Read more

आखिर भेदभाव क्यों? – संगीता श्रीवास्तव

“तुम मानो या ना मानो धीरन की अम्मा! तुम्हारे बहुरिया के कोख में ही खोट हवे, तभी तो दोनों बार बहुरिया ने बेटी ही जनम दीहो है।”पड़ोसन सरला देवी ने बेधड़क, सुलोचना जी से कहा। कुछ और बातें सरला देवी कह न दे इसलिए सुलोचना जी ने उन्हें इधर -उधर की बातों में उलझाए रखा … Read more

नयी बहू – भगवती सक्सेना गौड़

पढ़ी लिखी इंजीनियर बहू आरती आयी थी, घर मे, सासु पूजा देवी, ठहरी गांव की दसवीं किसी तरह पास करी हुई। जब से शादी तय हुई, मन ही मन बहुत परेशान थी, अभी तो घर मे सिर्फ बेटा अक्षय और उसके बाबूजी ही अनादर करते थे। कुछ बात चल रही हो और अगर पूछ लें … Read more

‘कोई भेद नहीं ‘ – विभा गुप्ता

छह महीने पहले जब रीमा के पति का इस कस्बे में तबादला हुआ था तब यहाँ सुविधाओं की कमी थी।साथ ही,एक समस्या यह भी थी कि यहाँ नीची जाति के लोग ज़्यादा थें।उसके ससुराल में जात-पात को बहुत महत्व दिया जाता था।उसकी सास तो छुआछूत को इतना मानती थी कि काम करने वाला या वाली … Read more

एक प्रेम कहानी ऐसी भी – अनिल कान्त 

एक प्रेम कहानी ऐसी भी – अनिल कान्त  रात लौट आई लेकर फिर से वही ख्वाब कई बरस पहले सुला आया था जिसे देकर थपथपी कमबख्त रात को भी अब हम से बैर हो चला है अक्सर कहानी शुरू होती है प्रारंभ से…बिलकुल शुरुआत से…लेकिन इसमें ऐसा नहीं…बिलकुल भी नहीं…ये शुरू होती है अंत से…जी … Read more

अब भेदभाव नहीं सहूँगी – अर्चना कोहली “अर्चि”

जैसे ही सुमिता ने घर में प्रवेश किया, उसे बिठाकर बिना किसी भूमिका के दादी ने एक ही साँस में कई प्रश्न दाग दिए। मानो कोई परीक्षक परीक्षा ले रहा हो। सभी प्रश्नों का मुख्य केंद्र सिर्फ़ शशांक ही था। “शशांक कैसा लड़का है? कब से तुम्हारे साथ काम करता है? स्वभाव कैसा है? कितनी … Read more

माँ माँ में भेदभाव क्यों – सुभद्रा प्रसाद

“मम्मी जी, मेरी माँ की तबियत खराब है |पापा ने सुबह फोन किया था| मैं दो चार दिन के लिए मायके जाना चाहती हूँ |” नैना ने सुबह की चाय देते हुए अपनी सासू माँ मालती जी से कहा|         “निखिल से पूछ लिया? क्या कहा उसने ? ” मालती जी ने पूछा |           “उन्हें अभी … Read more

बच्चे की समझदारी – कांता नेगी 

रीमा एक पढ़ी-लिखी नवयुवती थी।उसका छोटा-सा परिवार था।वह और उसका पति रीतेश एक ही आफिस मे काम करते थे,घर में सास-ससुर थे।जब वह ब्याह कर आयी काफी खुश थी।सास-ससुर का खूब सम्मान करना पर जब से ससुर को दिल का दौरा पड़ा,उसके स्वभाव में बदलाव आ गया था। रीतेश को उसके पिता ने काफी मेहनत … Read more

दाई माँ – ऋतु गुप्ता

कैसी हो बहुरिया,अब  कौन सा महीना चल रहा है ,बताओ तो.. सोसायटी में सफाई करने आती परसन्दी काकी ने कुछ ही समय पहले रहने आये रितेश की पत्नी रीमा से पूछा… रितेश और रीमा को लगभग 1 वर्ष हो गया था, बिहार के गांव से यहां शहर आए।रितेश यहां किसी कंपनी में कार्यरत है, उसके … Read more

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