अंतिम इच्छा – अनुराधा श्रीवास्तव

सचिन की माॅं एक अनपढ़, मानसिक रोगी और उद्दण्ड महिला थी जिनका विवाह सचिन के पिता से धोखे में रखकर करवा दिया गया। तब के जमाने में बहू लाने से पहले इतनी जांच पड़ताल नहीं की जाती थी और सचिन के नाना नानी ने भी अपनी बेटी के मानसिक बीमारी को छिपाकर अपनी बला टाल … Read more

जिम्मेदारी –  दीपा माथुर

दिनकर जी आपकी बच्ची पाकर हम धन्य हो गए सच में क्या संस्कार दिए है आपने हमारे घर को तो स्वर्ग बना दिया। कोई भी पिता अपनी बच्ची के ससुर से इन शब्दों को सुनकर भावविभोर होना स्वाभाविक है। इसीलिए दिनकर जी की छाती भी दो इंच फूल चुकी थी। तभी दिनकर जी की बेटी … Read more

डर के आगे जीत है – पूनम अरोड़ा

 ईशिता  सुबह से  अलमारी से  न जाने कितनी ड्रेस निकालती — कभी आईने के सामने देखती, कभी पहन के माँ  को दिखाती फिर भी संतुष्ट नहीं  हो पा रही थी। आज उसकी बैस्ट  फ्रेंड  अनाया का जन्मदिन है और वो भी ऐसे ही नहीं  शहर के सबसे राॅयल, भव्य माने जाने वाले होटल में  सेलिब्रेट … Read more

जिम्मेदारी – पूनम श्रीवास्तव

रेखा और निशांत में बहस चल रही थी कि रेखा बार बार कहे जा रही थी कि तुम्हारे मम्मी पापा की जिम्मेदारी क्या मेरी ही है? तुम्हारे और भी दो भाई है क्या उनका फर्ज नहीं है कि वह भी अम्मा बाबूजी का ध्यान रखें लेकिन तुम्हें समझ नहीं आता है! रेखा तुम ही बताओ … Read more

जीवट – बालेश्वर गुप्ता

बचाओ- बचाओ का आर्तनाद गूँज उठा,आस पास के लोग उस आवाज की ओर दौड़ पड़े।देखा सेठ जी की दुकान के गोडाउन में मुनीम जी कई भारी बोरियो के नीचे दबे पड़े थे।सहायता की गुहार उन्ही की थी।झटपट सभी ने मुनीम जी को बाहर निकाला, पानी पिलाया।मुनीम जी जैसे ही उठने को तत्पर हुए तो फिर … Read more

मुझ-पर  हक है उसका – रीमा महेन्द्र ठाकुर

अरे गुरू उठ जा  सुबह हो गयी” मां की तीखी आवाज गुरु  के कानो में पडी”  वो कुनमुनाया”” पप्पा आ रहे होंगे “ मै” कल चला जाऊंगा पढने मां”  ये लडका रोज बहाने करता हैं “” पता नही क्या होगा इसका “ मां बडबडाऐ जा रही थी” गुरू ने वापस आंखें बंद कर ली “ … Read more

मां ” बेटी की दहलीज ” – रीमा महेन्द्र ठाकुर

मां  मै वापस आ गयी “ दरवाज़े की कुंडी खटखटाई ”  विनती ने” अंदर से कोई आवाज न आयी “ मां  सो गयी क्या “ मां “मां “ काफी देर तक इंतजार करती रही विनती” क्या हुआ बिटिया कब आयी! बस अभी काकी “ सोचा मां को सप्राइज  दे दूं”  पर ये तो  घोडा बेचकर … Read more

स्वार्थी कौन..? – रोनिता कुंडू

ओफ ओह…! मां… क्या हर छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ बना देती हो आप..? अब कहा ना याद नहीं था… मनोज अपनी मां शारदा जी से कहता है… शारदा जी:  बेटा..! यह बाल धूप में सफेद नहीं किए हैं मैंने… मुझे सब पता है… तेरी मां अब तुझ पर बोझ बन गई है… पर क्या करूं … Read more

बहु-बेटी – डॉ रश्मि सक्सेना

अर्चना के दो बेटे थे तो आराम से उनकी परवरिश की ।जब बड़े बेटे की नौकरी लग गई तो उन्होंने उसकी शादी के लिए लड़कियां देखना शुरू किया।बड़े बेटे मोहित की शादी सुरभि से की ।जब बहु आई तो उन्होंने उसे बेटी की तरह रखा सुरभि ने इंजीनियरिंग करी थी अभी उसे एम बी ए … Read more

अपने घर से मायका बन जाने का सफर – संगीता अग्रवाल 

दुल्हन के जोड़े मे सजी रितिका विदाई से पहले अपने पूरे घर को बड़ी हसरत से निहार रही थी। वो घर जो कुछ देर बाद ही उसे छोड़ कर जाना है। अचानक उसकी निगाह हलवाइयों का हिसाब निमटाते पिता पर गई एक दिन मे ही कितनी मायूसी छा गई उनके चेहरे पर अपनी लाडो को … Read more

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