रिटायरमेंट – जिंदगी की दूसरी पारी – संगीता अग्रवाल

” सुधा तैयार हो जाओ हमें फोटो खिंचवाने चलना है !” ऑफिस से आते ही जयेश जी पत्नी से बोले । ” पर फोटो क्यो खिंचवानी है मेरी ?” सुधा आश्चर्य से बोली।  ” अरे भाग्यवान रिटायरमेंट का फॉर्म भरना है उसमे हम दोनो की फोटो लगेगी !” जयेश जी बोले। ” ओह्ह हां आपकी … Read more

रिटायरमेंट – ज्योति आहुजा

हरिदास जी की ज़िंदगी साधारण थी, एक मिडिल क्लास आदमी की तरह। सुबह ऑफिस, शाम घर, बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च। उन्होंने अपने सपनों को हमेशा टाल दिया—कभी गाना-बजाना, कभी घूमना-फिरना उनके शौक हुआ करते थे। लेकिन उनका सबसे बड़ा सपना था गॉल्फ खेलना। कॉलेज के दिनों में उनके दो-चार अमीर सहपाठी गोल्फ़ … Read more

क्या करे पूर्वी ? – विमला गुगलनी

रोहित अभी थोड़ी देर पहले ही घर आया था। फ़्रेश होकर दो कप चाय बनाई और ट्रे में कुछ बिस्कुट और नमकीन रख कर पत्नी रोमा के पास आकर मेज़ पर चाय रखी। तकिये का सहारा देकर पहले रोमा को अच्छे से बिठाया और फिर चाय का कप उसके हाथ में पकड़ाया। रोमा ने चुपचाप … Read more

जस्सी और प्रीति – विमला गुगलनी

ट्रिगं- ट्रिगं की तीन बार आवाज़ सुनकर भी जब जस्सी बाहर नहीं आई तो प्रीती का मन हुआ कि वो आज अकेली ही स्कूल के लिए चल दे। जस्सी के कारण रोज ही देर हो जाती है, और फिर साईकल कितनी तेज़ चलानी पड़ती है। कल तो खेतों की मुँडेर पर साईकल चलाते समय दोनों … Read more

रिटायरमेँट के अकेलापन में आस का दीपक – डॉ बीना कुण्डलिया 

आज कालेज का पहला दिन था। मालती ने जैसे ही महाविद्यालय में प्रवेश किया, वो डरी डरी सहमी सहमी न जाने क्यों ? उसको ऐसा लग रहा सभी लड़के, लड़कियां जैसे उसको ही देख रहे हैं। वैसे भी स्वभाव गत मालती शर्मीली झेंपू क़िस्म की लड़की थी । बी एस सी फर्स्ट ईयर की क्लासेज … Read more

आप से बाहर होना – रीतू गुप्ता

कविता का दिमाग खराब हो रहा था .. अकेली.लगी पड़ी थी काम पर … त्यौहार आ रहे थे पर मजाल है बच्चे थोड़ा साथ देदे .. बेटा अमन जो कि मोबाइल पर गेम खेल.रहा था…. अमन जब देखो तब मोबाइल देखते रहते हो.. मोबाइल बंद करते हो तो टीवी चला लेते हो …टी.वी बंद तो … Read more

कॉफी में छुपा प्यार – श्वेता अग्रवाल

“आराध्या, उठ जा बेटा। ले कॉफी पी ले। फिर अपने घाघरे की फिटिंग देख लेना।” माॅं की प्यार भरी आवाज सुनकर आराध्या उठ बैठी और माॅं के हाथ से काफी का मग लेकर काफी पीते पीते अपनी माॅं से बातें करने लगी। कुछ देर तक बेटी की प्यारी बातें सुनने के बाद कुंतल बेचैन होकर … Read more

रिश्ते अहंकार से नहीं त्याग और माफी पर टिकते हैं – विनीता सिंह 

गांव में एक बड़ी सी हवेली थी उस हवेली के मालिक सेठ मूलचंद जी थे। उनकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी, उनकी एक छोटी सी बच्ची जिसका नाम मीनाक्षी था जिसे सेठ जी ने बड़े लाड़ प्यार से पाला था उन्होंने अपनी दूसरी शादी भी नहीं की उनकी बेटी को कोई सौतेली मां परेशान ना … Read more

मन का रिश्ता – करुणा मलिक 

केतकी ! ऊपर वाले स्टोर की सफ़ाई करवा देना  किसी को कहकर कल । कल…. मैं आज  खुद ही सफ़ाई कर दूँगी । कल  सुबह तो अरुण आएगा  भाभी ।  अच्छा….. हाँ…. दिमाग़ से ही निकल गया था ।  सचमुच  बहुत मुश्किल रास्ता तय किया है तूने ।  हाँ भाभी, रास्ता तो कठिन था पर … Read more

“काॅंख में छोरा, गाॅंव में ढिंढोरा” – श्वेता अग्रवाल

नीरजा अपनी चचेरी बहन चेरी की शादी में जयपुर आई थी। उसकी शादी के बाद पीहर में यह पहला बड़ा फंक्शन था तो वह इसे लेकर बहुत एक्साइटेड थी। बचपन से ही सजने-संवरने की शौकीन नीरजा अपनी सबसे अच्छी-अच्छी ड्रेसेस छाँट कर लाई थी इस शादी में।आखिर आज मौका भी था और दस्तूर भी। रही-सही … Read more

error: Content is protected !!