दूसरी पारी – शिव कुमारी शुक्ला

समीर जी के रिटायरमेंट का समय जैसे -जैसे पास आता जा रहा था उनका उत्साह,जोश भी उतना ही बढ़ता जा रहा था।वे अब अपने लिए जीना चाहते थे।जीवन के एक -एक पल का भरपूर आनंद उठाना चाहते थे।जिन खुशियों की चाहत में पूरा जीवन तरसे उन्हें अब उन्हें दोनों हाथों से समेट लेना चाहते थे। … Read more

बद्दुआ लेने वाले काम ही न करो – विमला गुगलानी

“ नई ममी आ गई, नई ममी आ गई” चार साल की रूही खुशी में चिल्लाते हुए बोली।बाहर बाजा बजने की आवाज आ रही थी। कैलाशवती ने आरती की थाली तैयार कर रखी थी। दुल्हा , दुल्हन का पूरे रीति रिवाज से स्वागत किया गया।       जब सब हो गया तो कैलाशवती ने बेटी स्नेहा को … Read more

बचपन की यादें – रीतू गुप्ता

मामू की शादी में सभी बरसों बाद मिल रहे थे। मामू, मौसी और मम्मी तो कभी मुस्करा रहे थे कभी आंख भर लेते । नानी बार बार तीनों बच्चों को, नाती-नातिन को साथ देख बलाएं ले रही थी। “देख रही हो सुगंधा …आज पूरा घर बच्चों के ठहाकों से गूंज रहा है” ~ नानू बोले।  … Read more

बददुआ – खुशी

दुआ और बददुआ ऐसे शब्द है जिनमें सिर्फ एक ही अक्षर का फरक है।दुआ किसी को लग जाए तो आदमी के बारे न्यारे करती हैं और बददुआ जिसे लग जाए उसका सब कुछ छीन लेती हैं। दया और माया दो बहने थी। अपने माता पिता रजत और कमला की दो संतान दया और माया।दया बचपन … Read more

मेरी यादों में दूर्गापूजा – डाॅ उर्मिला  सिन्हा

दशहरा ..शारदीय नवरात्रि के दशमी को नीलकंठ पक्षी का  दर्शन अत्यंत शुभ माना जाता है.. अतः आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है  -नीलकंठ, हे भोलेनाथ आप सभी को सपरिवार विजयादशमी की हार्दिक  शुभकामनाएँ  बधाई.. मां भगवती की  कृपा बनी  रहे।बडों को चरणस्पर्श और छोटों को शुभाशीष..  मेरी यादों में—दुर्गापूजा डॉ उर्मिला सिन्हा    बरसात में निरन्तर … Read more

“हम साथ साथ है” – रीतू गुप्ता

नताशा और उसका परिवार अभी अभी नयी सोसाइटी में शिफ्ट हुआ था । इसी सोसाइटी में उसकी कजन मधु रहती थी। जिस कारण उसे शिफ्ट होने में .. नए दोस्त बनाने में कोई मुश्किल नहीं आयी। मधु की ही सहेली नीलम उसकी भी अच्छी दोस्त बन गयी।   तीनों की दोस्ती सोसायटी में जल्दी ही मशहूर … Read more

अहंकार रिश्तो का दुश्मन है – लतिका पल्लवी

भैया का फोन था,पर मैंने साफ साफ कह दिया कि आने का कोई सवाल ही नहीं है. बार बार पूछने पर अनिरुद्ध जी नें अपनी पत्नी कांति जी को बताया।आज इतने दिनों बाद किसलिए बुला रहे है? कांति जी नें जानना चाहा।छोड़ो हमें क्या करना है? जब जाना ही नहीं है तो आगे इस बात … Read more

रिश्ते अहंकार से नहीं त्याग और माफ़ी से टिकते हैं – दिव्या मिश्रा

सच्चा रिश्ता वही कहलाता है जिसमें अपनत्व की भावना हो कुछ गलतफहमियों के दस्तक देने पर भी उसमें कोई कड़वाहट न  फैले बल्कि वह अपने रिश्ते में मिठास बने रहने के लिए हर गलतफहमियों को भी नजरअंदाज कर देता है वहीं सच्चा रिश्ता होता है रिश्तों को अमीरी या ग़रीबी के तराजू में नहीं तौला … Read more

आग में घी डालना – प्रतिमा श्रीवास्तव

आग में घी डालना( लघुकथा) सासू मां को मैं फूटी आंख नहीं सुहाती थी। किसी तरह उनके दिल में जगह बनाना शुरू ही किया था कि छोटी ननद आकर मेरे खिलाफ भड़का दी थी। उस दिन मुझे बहुत दुख हुआ था कि बहू कितनी भी कोशिश कर ले ससुराल को अपना बनाने की लेकिन उसे … Read more

रिटायरमेंट का पैसा

रिटायरमेटं के समारोह के बाद जब अवधेश जी पत्नी के साथ घर आए तो , पड़ोस मे रहने वाले जगदीश जी और उनकी पत्नी अवधेश जी को बधाई देने आए ,और 1 शाल उढाकर रामायण ग्रंथ उनके हाथों में देकर बोले ,अवधेश जी अब तो बहुत काम कर  लिया अब आराम से जिंदगी बसर किजिए … Read more

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