कभी–कभी बहू की इज़्ज़त का बोझ भी पति के कंधों पर होना चाहिए – ममता  यादव

“आख़िर कब तक मैं ही इन सबकी ख़ुशी के लिए अपनी हर छोटी–बड़ी इच्छा कुर्बान करती रहूँगी, आदित्य? मेरी पसंद, मेरे मन का कोई मोल नहीं तुम्हारे लिए?”स्नेहा अलमारी से कपड़े निकालते–निकालते अचानक रुक गई। उसकी आवाज़ में रूका हुआ रोष और बरसों की थकान दोनों घुल गए थे। आदित्य लैपटॉप बंद करते हुए बोला,“फिर … Read more

पर घर अलग होना ज़रूरी है – सीमा श्रीवास्तव 

“मम्मी, ये भी कोई बात हुई? हर बार विवेक की तरफ़ से हम ही खड़े हों, तो वो कब जिम्मेदार बनेगा?” सान्या ने रसोई के दरवाज़े पर खड़ी-खड़ी आवाज़ थोड़ी धीमी, लेकिन साफ़ रखी। शांता देवी ने बर्तन में दाल चलाते हुए माथे पर पल्लू टिकाया,“अरे बहू, तू हर वक्त हिसाब ही करती रहती है। … Read more

मायका और ससुराल दो अलग दुनिया नहीं – मुकेश पटेल

 रीना को  ऑफिस की छुट्टियाँ मुश्किल से मिली थीं और उसने मन ही मन तय कर रखा था – “इस बार तो पूरा हफ्ता बस आराम… सीरियल, मोबाइल और चैन की  नींद… किसी रिश्तेदार, किसी पड़ोसी के चक्कर में नहीं पड़ना।” अंदर से उसकी सास सरोज की आवाज़ आई – “रीना बेटा, जरा इधर तो … Read more

 बेचारी नहीं हैं हम – विभा गुप्ता 

        आज सुबह से ही किशोरी के छोटे-से घर में लोगों का आना-जाना लगा हुआ था।सभी आकर उसे बधाई देते और कहते,” वाह किशोरी! तेरी बेटी ने तो कमाल कर दिया।” जवाब में वो सिर्फ़ मुस्कुरा देती क्योंकि वो जानती थी कि कल तक यही लोग तो मेरी बेटी को मर जाने की बद्दुआ देते रहे … Read more

जब मां की नसीहत बेटी पर पड़ी भारी – स्वाती जैंन

सोनी , तुम सास के पास गांव जाकर क्या करोगी ? उन्होंने वैसे भी वहां अपनी बेटी को बुला रखा हैं तो तुम भी यहां मायके दिवाली मनाने आ जाओ , सास – ससुर को कितना भी अपना बना लो वह कभी माँ- बाप नहीं बन सकते ! सोनी की मां ममता जी सोनी से … Read more

खून के आंसू रुलाना – सीमा सिंघी 

विवान और आर्यन में बड़ी अच्छी दोस्ती थी मगर धीरे-धीरे विवान में अपने पिता की संपत्ति को लेकर अहम आते गया ! जबकि आर्यन अपने पिता की सीमित आय होने के कारण बड़ी साधारण सी मगर बहुत खुशनुमा और सुकून की जिंदगी जी रहा था।  आर्यन विवान के दिन-ब-दिन बदलते बदलाव को देख कर समझ … Read more

ये कैसी इज्जत है – आरती कुशवाहा

“मीरा, आज कंपनी की फाउंडेशन डे पार्टी है, मेरे सम्मान में स्पेशल अवॉर्ड भी मिलने वाला है… शाम को जल्दी तैयार रहना, ऑफिस से लौटकर फ्रेश होकर सीधे क्लब चले जाएँगे,”आरव ने ड्रॉअर से अपनी घड़ी उठाते हुए कहा। मीरा चहक उठी,“सच में? वाह, ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है! तुम्हारे साथ चलूँगी, मुझे भी … Read more

पहला पहला प्यार है – वीणा सिंह

आज नील और मैं एक-दूसरे से ऐसे बात कर रहे थे जैसे सालों पुराने अजनबी हों।सूखे से, औपचारिक, जैसे बस ज़रूरत भर की बात करनी हो। मैंने बालकनी के शीशे में अपना चेहरा देखा तो मन ही कसक उठा—कहाँ गया वो नील जो मेरी हँसी सुनते ही खुद हँसने लगता था?कहाँ गई वो आर्या जो … Read more

ढलती उम्र का साया

सुबह का समय था। रसोई में रिया टिफिन पैक कर रही थी। रवि ऑफिस जाने की जल्दी में तैयार हो रहा था। उसने ऊँची आवाज़ में कहा —“रिया, मेरा टिफिन तैयार हो तो जल्दी दो। मुझे देर हो रही है।” रिया ने टिफिन आगे बढ़ाते हुए धीरे से कहा —“सुनिए, क्या आज भी आप पापा … Read more

आशीर्वाद – गरिमा चौधरी

“वाह री नई बहू! सुबह-सुबह सोफे पर पैर चढ़ाकर बैठी है, हाथ में मोबाइल, सामने लैपटॉप… और सासू माँ वहाँ किचन में बर्तन खटखटा रही हैं। ज़रा-सा भी ख्याल नहीं कि घर में बड़ों की भी कोई ज़रूरत होती है कि नहीं!” शारदा चाची ने ड्राइंग रूम से ही ऊँची आवाज़ में कहा ताकि उनकी … Read more

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