लाड़ो – मधु शुक्ला

शान्ति देवी ने जब से बेटे का विवाह किया है। उनकी जिंदगी बदल गई है। सुंदर, सुशील, कमाऊ बहू की बढ़ाई करना, जेवर खरीदना और किटी पार्टियों की शोभा बढ़ाना उनकी दिनचर्या बन गई थी। बहू अपनी कमाई से घर चलाती थी। तो शांति देवी को सुअवसर मिल रहा था। पति की कमाई बचाने का। … Read more

मेरी सासु माँ का दोहरा व्यक्तित्व – अमिता कुचया

आज कल‌ जैसे की सोच होती है ,पढ़ी लिखी बहू आए और अगर नौकरी वाली  बहू आती है। तो ससुराल वाले को पुराने सोच बदलने की जरूरत होती है। क्योंकि सर्विस वाली बहू के रहन सहन और व्यवहार में अंतर होता है, घरेलू बहू की अपेक्षा… कहने को आधुनिक विचारों वाले सोच हम लोग है  … Read more

नहीं पता था, तेरे भी दो चेहरे है – अर्चना कोहली “अर्चि”

“अम्मा। ओ अम्मा”। ऑफिस से आते ही चाय पीने के बाद सुधीर चिल्लाया। क्या बात है मुन्ना। क्यों चिल्ला रहा है”। “अम्मा, कितनी बार कहा है, मुझे मुन्ना न कहा करो। अब मैं बहुत बड़ा ऑफिसर हूँ। कोई सुनेगा तो मज़ाक बन जाएगा”। “नाराज़ न हो बेटा। भूल जाती हूँ। उम्र का तकाजा है। अब … Read more

बूढ़ी सास रसोई में खपे और बहू मजे करे- आरती झा आद्या

नई नवेली दुल्हन राखी शर्माई सकुचाई सी सुबह पांच बजे ही उठकर तैयार होकर कमरे से बाहर निकली तो सामने ही सासु मां दिख गई। राखी उन्हें देखते ही झुककर पैर छू कर खड़ी हो गई। इतनी सुबह सुबह क्यों जाग गई बहू…वो तो हमारा जमाना था जब सास से पहले बहुओं के जागने का … Read more

मित्रता और पद – संजय मृदुल

मंच पर परिचय का सिलसिला जारी है, एक एक कर परिवार आते जा रहे हैं और सबके सम्मुख अपने और परिवार के बारे में बता रहे हैं। स्कूल के पुराने छात्रों का मिलन समारोह चल रहा है। रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश विदेश में निवास कर रहे पूर्व छात्रों … Read more

मुखौटे पर मुखौटा – सुषमा यादव

नीलू मार्केट गई थी,उसका फोन बार बार बजे जा रहा था। घर आकर देखा तो उसके मामा ससुर के पोते का फोन था,चार पांच मिस्ड कॉल थे। फिर फोन आया, उसने हेलो कहा और व्यंग्य भरी मुस्कान के साथ कहा,,कहो, आज़ ढाई साल बाद कैसे मेरी याद आई, उधर से रमेश की आवाज आई, अरे,आप … Read more

सुगनी काकी  – पुष्पा जोशी

यशोधरा ने रोते हुए घर में प्रवेश किया, रोते-रोते उसका बुरा हाल था, मॉं ने कहा- ‘क्या बात है क्या आज फिर सुगनी काकी ने तुझसे कुछ कहा?’ वह कुछ नहीं बोली सीधे अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गई उसका रोना रूक ही नहीं रहा था.’अब तो हद ही हो गई, पीछे ही … Read more

नक़ाब – ममता गुप्ता

अरे!! मोहनदास जी आप हमे तो बस रोटी बेटी चाहिए।। हमारे पास भगवान का दिया सबकुछ है,बस कमी है तो सिर्फ एक बहू के रूप में बेटी की।। और मैं वादा करता हूँ कि तुम्हारी बेटी रिया को कभी भी किसी तरह की कोई परेशानी नही होगी…गर वो शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी … Read more

बाल-विधवा – पुष्पा पाण्डेय

काकी थकी हारी हाट से आई, लेकिन उसके चेहरे पर खुशी की चमक थी। आज उसके सारे अमरूद, नींबू बिक चुके थे। उसकी टोकरी में जो दो अमरूद बचे थे उसे काकी हाट के गेट पर बैठी उस बच्ची के  हाथ में थमा दिया जो माँ के साथ भीख मांग रही थी। काकी घर आकर … Read more

गलती से भी मुझे कमजोर मत समझना- निभा राजीव “निर्वी”

मानसी के पिता के असामयिक निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार और सभी क्रिया कर्म हो चुके थे। आज सभी मेहमान भी जा चुके थे। माँ अब भी दीवार से पीठ टिकाए हौले हौले सिसक रही थी। मानसी की आंखों में भी बेबसी के आंसू भर आए।             पिता के मृत्यु के एक दिन पूर्व ही … Read more

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