मन का रिश्ता- शुभ्रा बैनर्जी  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : “अरे ओ दिद्दा,कहां गई ?ये ले भुट्टे लाई हूं तेरे लिए।”शशि अंदर से भागती हुई आई और बोली”नहीं अम्मा,भुट्टा मत देना।इन्हें भूनने का समय ही नहीं मिलता,पड़े-पड़े सूख जातें हैं।मन मारकर फिर फेंकना पड़ता है। जबरदस्ती हर बार पकड़ा जाती हो कुछ ना कुछ।पैसे भी नहीं लेती हो।नहीं लूंगी कुछ … Read more

मेरी होटल वाली दादी – मंजू तिवारी : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : यह बात लगभग  सन् 1985- 86 की रही होगी तब मैं बहुत छोटी थी मेरे बाबा यानी कि दादा हमेशा दुकान पर ही रहते थे जहां मेरे पापा चाचा ताऊ का बिजनेस होता था सिर्फ  खाना खाने आते थे,,,,,, बाबा को चाय देने मै बहुत छोटी अवस्था से दुकान पर … Read more

 शांत गंगा –   बालेश्वर गुप्ता

सूर्य की लालिमा से गंगा की पूरी जल राशि लाल रंग में रंग कर झिलमिला रही थी।सूर्य मानो गंगा मैय्या के आंचल से ही उदय हुआ था।मनोहारी दृश्य था और जय गंगा मैय्या का नाद चहुँ ओर गूंज रहा था।हर की पैड़ी पर यह नित्य का ही क्रम है,बस तीर्थ यात्री बदलते रहते हैं।       पर … Read more

हृदय परिवर्तन – डाॅ उर्मिला सिन्हा : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : वे मंदिर की सीढियां धीरे-धीरे उतरने लगी। “यह गठिया का दर्द भी न… “वे बुदबुदाई।  दो नवयुवतियां हाथ में पूजा का थाल लिये आपस में बातें करती उनके आगे पीछे सीढियां उतर रही थी।  “इस बार पूजा की तैयारी कैसी चल रही है…पिछली बार तुमने गरवा में प्रथम पुरस्कार प्राप्त … Read more

एक सबक – पुष्पा जोशी : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : बेटा जुगल आज दिल बहुत घबरा रहा है, किसी काम में मन नहीं लग रहा। ऐसा लग रहा है कि कोई अपना मुसीबत में है।’ विश्वनाथ बाबू ने अपने बेटे से कहा तो वह बोला – ‘बाबा आप यूहीं चिन्ता कर रहे हैं। हम सब ठीक है, कल ही दीदी … Read more

खून का रिश्ता – मीनाक्षी सिंह : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : हमें यहां रहते हुए छह  साल हो गए कुनाल पर कभी महसूस नहीं हुआ कि हम अपने परिवार के बीच नहीं हैँ…. मुझे तो मन में बहुत डर था कि हम भागकर लव मेरिज कर रहे हैँ सबकि मर्जी के खिलाफ जाकर… पता नहीं कैसे रहेंगे, कैसे कमायेंगे , खायेंगे … Read more

हाँ, नहीं हूँ मैं एक परफेक्ट हाउस वाइफ –  पल्लवी विनोद

क्या करती हो दिन भर, कोई अपना किचन ऐसे रखता है क्या! अरे! देखो पोर्च में कितने जाले लगे हैं। दस दिन के लिए आई मम्मी जी के ताने सुबह से शुरू हैं और मैं कैलेंडर में दिन गिन रही हूँ कि आज से चार दिन और झेलना है इन्हें। मुझे कभी-कभी खुद पर शर्म … Read more

आखिर खुन का रिश्ता था , कमजोर कैसे होता ?? – स्वाती जैन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : विभोध , हो ना हो मेरी सोने की चैन तुम्हारी बहन ने ही चुराई हैं और आज वह अपने ससुराल वापस जाने वाली हैं !!  हमें उसका बैग चेक करना पड़ेगा , वैसे भी सीमा नहाने गई हुई हैं , चलो तब तक हम उसका बैग चेक कर लेते हैं … Read more

एक बार फिर (भाग 32 ) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

अब तक आपने पढ़ा कि शेखर प्रिया की दी के यहां डिनर पर जाता है। जहां प्रिया शेखर से मिल कर प्राब्लम साल्व कर लेती है। वो रियलाइज करती है कि शेखर उसके लिए सबसे इम्पोर्टेंट है। दोनो दोबारा से दोनों एक हो जाते हैं अब आगे – प्रिया ऑफिस में फाइल्स चैक कर रही … Read more

शायद कभी नहीं – संगीता श्रीवास्तव

 “अरे, क्या कर रहे हो तुमलोग? शीशे हैं, चुभ जाएंगे पैरों में।” मैंने उन्हें टोका था। उन्हीं में से एक लड़के ने कहा था- “दीदी, हमने इन्हीं शीशों पर तो चलना सीखा है, इन्हीं कूड़ों पर तो होश संभाला है।” “पर इसके पहले तो मैंने तुम्हें यहां नहीं देखा।” “हां दीदी ,हम आज पहली बार … Read more

error: Content is protected !!