गरीब कौन – लक्ष्मी त्यागी :  Moral Stories in Hindi

रुपाली के फोन की घंटी बजी, वो अभी अपने घरेलू कार्यों में व्यस्त थी। न जाने किसका फोन आ गया ?सोचकर वह अपने फोन को देखती है। फोन उसकी मम्मी का था ,नंबर देखकर वो परेशान हो गयी ,अब न जाने क्या बात हो गयी ? मम्मी से कितनी बार कहा है ?अब आपकी उम्र … Read more

मिल गयी हुनर को नई पहचान – अर्चना सिंह :  Moral Stories in Hindi

सोनिया ने अपनी ननद रम्भा से फोन पर कहा…”दीदी ! मम्मी जी दिन भर घर पर बोर होती रहती हैं, क्यों न उनके कला और शौक को बढ़ावा देने और उनका समय अच्छे से व्यतीत कराने के लिए कोई आर्ट गैलरी या आर्ट कॉर्नर खोल दें ? उनका मन लगा रहेगा । अपने पास हैदराबाद … Read more

जेठ जी की इतनी औकात कहां -स्वाती जैंन :  Moral Stories in Hindi

भाभी , यहां हर महिने का खर्चा कैसे चलता हैं ?? मेरा मतलब हैं हर महिने बिजली बिल , किराने का बिल कौन भरता हैं ?? देवरानी अंकिता अपनी जेठानी मेघा से बोली !! मेघा को अंकिता की यह बात सुनकर थोडी हैरानी हुई क्योंकि अभी अंकिता को शादी किए सिर्फ दस दिन हुए थे … Read more

‘पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया’ –  प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ :  Moral Stories in Hindi

 “ये लो आंटी” ये प्यारे से शब्द सुनकर प्रमिला ने चौंककर देखा तो मासूम सी छोटी लड़की के हाथ में उसका पर्स था जो प्रमिला के हाथ से गिर गया था, और वह उसके पल्लू को खींचकर उससे कह रही थी।उसकी उम्र लगभग 5 वर्ष की रही होगी।यूँ तो वह इस लड़की को अक्सर मन्दिर … Read more

परिवार पूरा हो गया हमारा – चाँदनी झा :

 Moral Stories in Hindi जब तुम माँ बनोगी तब पता चलेगा।” ये वाक्य तो माँ से बचपन से सुनती आई थी, पर माँ ने जब ये कहा था, “जब तुम बेटी की माँ बनोगी, तभी मेरे दर्द को समझ पाओगी। ऐसे तुम नहीं समझ सकती हो। मुझे क्या दर्द है कितना दर्द है?” फिर भी … Read more

प्यार का जाल – अमिता कुचया :  Moral Stories in Hindi

आज जैसे ही रीतेश और उसके दोस्तों की नजर पहली बार कालेज आते हुए साहिल पर पड़ती है तब वह ग्रुप के सब लड़के और रोमी कहते- चल यार नया बकरा फंसा है ,मजा लेते हैं। जैसे उनके पास से वह गुजरता है तभी रोमी उसी के सामने वह अपना पैर उस पर अड़ा देती … Read more

काली रात – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

मैं स्वर्णा अपने माता- पिता की लाडली बेटी थी ….हम तीनों बहुत खुश थे गाँव में सब मेरी ख़ूबसूरती को लेकर बहुत तारीफ़ करते थे । सब कहते थे कि ……. मैं अपनी माँ के समान बला की खूबसूरत हूँ । विधाता को शायद हमारी खुशी मंजूर नहीं थी …….. अचानक माँ की मृत्यु हो … Read more

कहीं ये वो तो नहीं पार्ट – 2 :लतिका श्रीवास्तव 

अहा यही तो है मेरा पर्स मेरा लकी पर्स खुशी से चीख पड़ी रचना।झपट कर पर्स को दोनों हाथों में उठा गले से लगा लिया। पर्स पर ही पूरा प्यार लुटा दीजिएगा या पर्स आपको देने वाले के लिए भी कुछ बचाएगा तल्लीनता से आनंदित होती रचना को देख वह युवक मुखर हो उठा। खुशी … Read more

परिचय की जरूरत -लतिका श्रीवास्तव :

हेलो जी क्या आप समर्थ जी केघर से बोल रहे हैं मैं राकेश उनका पुराना परिचित बोल रहा हूं ।मुझे उनसे मिलना है क्या वे घर पर है आवाज सुनते ही समर्थ ने तुरंत कहा नहीं मैं उनका भाई बोल रहा हूं भैया तो ऑफिस निकल गए हैं आप फिर कभी आइए और उधर से … Read more

पता नहीं क्यों ससुराल वाले बड़ी बहू को इंसान नहीं समझते” – रितिका सोनाली :  Moral Stories in Hindi

प्यार वाला पति मिला या पैसे वाला इस बात की कशम कश में जिंदगी बीती  जा रही है. आशा के पति का मिज़ाज़ अजीब ही है. सारी दुनिया की खुशियां खरीदने को तैयार लेकिन अपने घर में अपने भाई- बहन और माँ-बाप के आगे बिलकुल अदना सा किरदार बना कर रखने वाला व्यक्ति. अपनी आँखों … Read more

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