बेटी अब से ससुराल ही अब तेरा घर हैं अब तू यहॉँ की मेहमान हैं – कविता सक्सेना : Moral Stories in Hindi

सिया की शादी की तैयारी चल रही थी उसके पिता रवि और माँ रंजना अक्सर लड़के देखने जाते थे सिया से आकर कहते तो वो हर लड़के में कमी निकालती कभी कहती लड़के की हाइट कम हैं कभी कहती मोटा हैं उसकी हरकतों से माता पिता परेशान थे जब भी वह उससे शादी की बात … Read more

बेटी का घर- दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

रागिनी पिछले दो दिनों से बहुत परेशान थी। उसे यह समझ ही नहीं आ रहा था, उसे अत्यधिक प्रेम करने वाली मां का व्यवहार इतना कैसे बदल गया। पिछले दो दिनों से प्रतिभा जी रागिनी से ठीक से बात तक नहीं कर रही थी। आज तो मां के शब्द उसके कानों में सीसे की तरह … Read more

“टूटते हुए रिश्ते” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा : Moral Stories in Hindi

नीलिमा जी ने अपने तीसरे और सबसे छोटे बेटे की शादी बड़े ही धूमधाम से संपन्न कर लिया। आज उनकी बहू विदा होकर आने वाली थी। नीलिमा जी ने उसके स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ा था। पूरे घर को दुल्हन की तरह सजवाया था। डाला -दउरा ,फूलों का हार,आरती का थाल जिसमें अक्षत- चंदन … Read more

एक भूल …(भाग-20) एवं अन्तिम – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

अब आगे ••••••• रामलला घर में आये तो शिवाकान्त शुक्ल के परिवार की समृद्धि के द्वार खुलते गये। वह टूटा फूटा मकान धीरे धीरे हवेली में बदल गया लेकिन घर के पूजा वाले कमरे का फर्श सदैव वैसा ही ईंटों वाला ही रहा। आधुनिकता के  सारे साधन घर में आते गये लेकिन घर के मुखिया … Read more

एक भूल …(भाग-19) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

अब आगे ••••••• सांकल की धीमी आवाज सुनकर वह पुत्र को वैसे ही गोद में उठाये द्वार की ओर दौड़ी, तब तक दुबारा सांकल बजी साथ ही शिवाकान्त का स्वर सुनाई दिया – ” कालिन्दी, जल्दी द्वार खोलो।” द्वार खोलते ही कालिन्दी के होश उड़ गये, उसके सामने खड़ा एक सैनिक कालिन्दी को परे हटाकर … Read more

एक भूल …(भाग-18) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

अब आगे •••••• संदलपुर के एक अति धनी और वैभवशाली परिवार में एक वृद्ध जानकी रमण जीवन की अन्तिम यात्रा की ओर बढ़ रहा था। आज उसने अपने जीवन के पिचहतर वर्ष पूर्ण कर लिये थे। वार्ध्क्य उसके केशों से भले ही प्रकट हो रहा था लेकिन उसके चेहरे और ऑखों में तेज दमक रहा … Read more

एक भूल …(भाग-17) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

अब आगे ••••••• महारानी को राजमहल वापस लाने का दायित्व उनकी प्रिय सखी पर डालकर युवराज आखेट के लिये चले गये। उन्हें पता था कि उनके सारे कृत्य महारानी के समक्ष उजागर हो चुके हैं और क्रोध के आवेश में आज तो उन्होंने बहुत अधित अनुचित व्यवहार किया है। साथ ही वह जानते थे कि … Read more

एक भूल …(भाग-16) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

अब आगे ••••••• महारानी के नेत्रों में एक बार फिर से सत्ता का गौरव लहराने लगा। उन्होंने प्रजा को वहीं रुकने को कहा और स्वयं भी मन्दिर की सीढियों पर सामान्य नारी की तरह बैठ गई। उनके सामने जन समुदाय था। महारानी ने जन समुदाय को सम्बोधित करते हुये कहा – ” आप सबका अपराधी … Read more

एक भूल …(भाग-15) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

अब आगे ••••••••• चयन प्रक्रिया का तीसरा दिवस व्यतीत हो चुका था परंतु महारानी को अभी उत्तराधिकारी की प्राप्ति नहीं हुई थी। मंत्री, सेनापति आदि विस्मय से देख रहे थे कि आखिर महारानी इस प्रश्न के माध्यम से बच्चों में क्या ढूंढ रही हैं? तभी एक सात वर्षीय बालक महारानी के समक्ष उपस्थित हुआ – … Read more

एक भूल …(भाग-14) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

अब आगे ••••••••••• प्रजा के आग्रह और निवेदन से सोलह वर्ष की कोमल कलिका सी राजकुमारी मोहना शासन की बागडोर पकड़ कर गरिमामयी महारानी बन गई। रामलला की मोहक छवि में राजकुमार को निहारते और पूजते हुये बाल्यावस्था और किशोरावस्था पार किया था । जब यौवन के द्वार पर खड़े होकर राजकुमार के मिलन की … Read more

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