टूटते रिश्ते – उषा शिशीर : Moral Stories in Hindi

रीना  ‍ रीना  पलट कर जब रीना ने अपने बचपन की साखी निशा को दिखा एकदम चौंक गई, अरे निशा तुम यहां, तुम तो गुड़गांव चली गई थी अचानक यहां कैसे।  अरे रीना चल गई थी, मगर अभी 2 वर्ष पूर्व पापा जी को अटैक आया, तो विवेक वापस दिल्ली आ गए अब पापा जी … Read more

बेटी अब से ससुराल ही तेरा घर है अब तो तू यहां की मेहमान है। – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ : Moral Stories in Hindi

सुबह सुबह अचानक अपनी बेटी सौम्या को अकेले दरवाजे पर देखकर पूनम आश्चर्यचकित रह गई। सौम्या की शादी कुछ ही महीने पहले हुई थी और ऐसा भी नहीं है कि सौम्या पहली बार इस तरह अकेले आई हो…इससे पहले भी वह अपने पति सुलभ से छोटी छोटी बातों पर झगड़कर अपने पति की शिकायत करने … Read more

पाप या पुण्य… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

धम्म से गिरने की आवाज सुनते ही… प्रभा उठकर लपकी तो अम्मा बीच में आ गई…” नहीं तुझे नहीं जाना… लता जाएगी… लता देख तो…!”  “जी अम्मा…!” ” नहीं मां… भास्कर मेरी राह देख रहा होगा…!” ” बोला ना नहीं… सिर्फ भास्कर ही नहीं यह चार दिन की नन्ही जान भी तेरी राह देख रहा … Read more

जिंदगी रोबोट सी – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

बेटी अब ससुराल ही तेरा घर है, मायके में तो तू मेहमान है-यही कहा था ना माँ। जिसके साथ गठबंधन कर रिश्ता जोड़ा था, वह तो हर दूसरे दिन चोटी पकड़कर घर से निकल जाने की धौंस देता है, बता ना मां तू किस घर की बात कर रही थी? क्या ऐसा ही होता है … Read more

परिवार में चालाकियाँ बर्बाद कर देती हैं – शनाया अहम : Moral Stories in Hindi

माँ , बस करो , ये सब जो तुम कर रही हो ये परिवार में सही नहीं है।  अपना वर्चस्व क़ायम रखने के लिए तुम अपने ही परिवार में *फूट डालो राजनीती करो* की धारणा पर चल रही हो लेकिन आगे चलकर तुम्हारी ये चालाकियां तुम्हें कही का नहीं छोड़ेंगी ” अंजलि ने दुखी मन … Read more

सर जी – पुष्पा पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

सुबह चाय के साथ अखबार हाथ में लेते ही आरती अन्दर तक हिल गयी। चाय का कप हाथ से छूट कर जमीन पर बिखर गया। मन का मंदिर जो सुना हो गया था। “तो क्या नवीन सर अब नहीं रहे?” और अतीत का पन्ना फड़फड़ाने लगा। सातवीं कक्षा में थी आरती। उसी समय हिन्दी के … Read more

सख़्त पिता,घर की खूंट – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

गौरव की शादी मधु से हुई थी।सुंदर सुशील और शालीन थी सुधा।आतें ही मां ने घर की चाबियां (जिम्मेदारियां)सुधा के हाथों सौंप कर निश्चिंत हो गई।पढ़ी लिखी थी सुधा।बी एड भी किया था।पास के ही विद्यालय में नौकरी करने लगी थी। ऐसा करने वाली वह इस घर की पहली बहू थी।गौरव बहुत गंभीर स्वभाव के … Read more

नया अवतार – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

शोभना रसोई में सुबह से व्यस्त थी।आज बेटे राघव का जन्मदिन जो था।अब बड़ा हो गया है राघव।पहले की तरह पाव -भाजी या चाट समोसे की पार्टी अब नहीं दे सकता दोस्तों को।कल रात ही कह दिया था उसने”मम्मी,इस बार दोस्तों को होटल में ही पार्टी देने की सोच रहा हूं। “झरोखा”रेस्टोरेंट में मंचूरियन और … Read more

सवंरते रिश्ते – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

राघव एवं माधव दोनों पेशे से इंजिनियर थे और एक साथ ही एक ही कम्पनी में ज्वाइन  किया था। स्वाभाविक था कि दोनों में मित्रता  हो गई।दोनों ही पहली कम्पनी से जाॅव बदल कर  आये थे ।इस समय वे अकेले थे सो साथ ही रह  लिए।  बाद में राघव ने एक बडा फ्लैट लिया कारण … Read more

वापसी टिकट – अर्चना सिंह: Moral Stories in Hindi

आराधना की डिलीवरी में तकरीब बीस दिन बचे थे । पहली डिलीवरी थी तो आराधना कुछ ज्यादा ही उत्साहित थी । समझ नहीं पा रही थी वो किसके लिए क्या खरीदे और किसके लिए क्या करे । एक तरफ तो उसे भर्ती होने की चिंता थी तो दूसरी ओर उसे अनिमेष की मम्मी का तानाशाही … Read more

error: Content is protected !!