प्रायश्चित – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi
गाँव की सीमा पर बिखरी झाड़ियों और सूखे पेड़ों के बीच एक टूटी-फूटी कोठरी में विश्वनाथ रहता था। उम्र के पचासवें पड़ाव पर खड़ा वह व्यक्ति, जिसके चेहरे पर गहरी झुर्रियाँ नहीं, बल्कि उसके अंतस की उधेड़बुन दर्ज थी। गाँव वाले उसे “पंडितजी” कहकर पुकारते, क्योंकि वह संस्कृत का विद्वान था और कभी मंदिर में … Read more